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एमपी में SIR ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी: 37 लाख नाम हटाने की तैयारी, पहले मिलेगा जवाब का मौका
भोपाल (म.प्र.)
कलेक्टर जिलों में करेंगे प्रकाशन, राजनीतिक दलों को दी जाएगी पूरी जानकारी; 15 जनवरी तक दावा-आपत्ति का अवसर
मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को इसकी प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में राज्यभर में लगभग 37 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की स्थिति बनी है। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी नाम को अंतिम रूप से हटाने से पहले संबंधित मतदाताओं को नोटिस देकर दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा।
प्रारूप सूची का प्रकाशन सभी जिलों में कलेक्टरों के माध्यम से किया जाएगा। वहीं, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, भोपाल में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। जिला स्तर पर भी कलेक्टर स्टैंडिंग कमेटी की बैठक के जरिए राजनीतिक दलों को प्रक्रिया से अवगत कराएंगे।
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार SIR की शुरुआत 4 नवंबर से हुई थी। पहले इसे 4 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर सत्यापन और तकनीकी कारणों से इसकी अवधि दो बार सात-सात दिन के लिए बढ़ाई गई। इसके बाद 23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची जारी करने का निर्णय लिया गया।
नोटिस और दस्तावेज़ी सत्यापन की प्रक्रिया
प्रारूप सूची के प्रकाशन के बाद उन मतदाताओं को नोटिस भेजे जाएंगे, जिनके नाम हटाने की अनुशंसा की गई है। उनसे आयोग द्वारा निर्धारित दस्तावेज मांगे जाएंगे। यदि दस्तावेज सही और मान्य पाए जाते हैं, तो संबंधित मतदाता का नाम पुनः मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा। दस्तावेज प्रस्तुत न करने या जानकारी असंतोषजनक होने की स्थिति में नाम हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
युवाओं और दावा-आपत्ति का अवसर
चुनाव आयोग ने एक जनवरी 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके साथ ही मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या पते में संशोधन के लिए 17 दिसंबर से 15 जनवरी तक दावा-आपत्ति आवेदन किए जा सकते हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व
एसआईआर प्रक्रिया को आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को त्रुटिरहित और अद्यतन बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी भी योग्य मतदाता को वंचित करना नहीं, बल्कि फर्जी, स्थानांतरित या मृत मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को शुद्ध करना है।
आगे की स्थिति
दावा-आपत्ति की अवधि समाप्त होने के बाद सभी आवेदनों का परीक्षण किया जाएगा। इसके उपरांत अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा, जिसे आगामी चुनावों में उपयोग में लाया जाएगा।
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एमपी में SIR ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी: 37 लाख नाम हटाने की तैयारी, पहले मिलेगा जवाब का मौका
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को इसकी प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में राज्यभर में लगभग 37 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की स्थिति बनी है। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी नाम को अंतिम रूप से हटाने से पहले संबंधित मतदाताओं को नोटिस देकर दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा।
प्रारूप सूची का प्रकाशन सभी जिलों में कलेक्टरों के माध्यम से किया जाएगा। वहीं, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, भोपाल में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। जिला स्तर पर भी कलेक्टर स्टैंडिंग कमेटी की बैठक के जरिए राजनीतिक दलों को प्रक्रिया से अवगत कराएंगे।
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार SIR की शुरुआत 4 नवंबर से हुई थी। पहले इसे 4 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर सत्यापन और तकनीकी कारणों से इसकी अवधि दो बार सात-सात दिन के लिए बढ़ाई गई। इसके बाद 23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची जारी करने का निर्णय लिया गया।
नोटिस और दस्तावेज़ी सत्यापन की प्रक्रिया
प्रारूप सूची के प्रकाशन के बाद उन मतदाताओं को नोटिस भेजे जाएंगे, जिनके नाम हटाने की अनुशंसा की गई है। उनसे आयोग द्वारा निर्धारित दस्तावेज मांगे जाएंगे। यदि दस्तावेज सही और मान्य पाए जाते हैं, तो संबंधित मतदाता का नाम पुनः मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा। दस्तावेज प्रस्तुत न करने या जानकारी असंतोषजनक होने की स्थिति में नाम हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
युवाओं और दावा-आपत्ति का अवसर
चुनाव आयोग ने एक जनवरी 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके साथ ही मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या पते में संशोधन के लिए 17 दिसंबर से 15 जनवरी तक दावा-आपत्ति आवेदन किए जा सकते हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व
एसआईआर प्रक्रिया को आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को त्रुटिरहित और अद्यतन बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी भी योग्य मतदाता को वंचित करना नहीं, बल्कि फर्जी, स्थानांतरित या मृत मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को शुद्ध करना है।
आगे की स्थिति
दावा-आपत्ति की अवधि समाप्त होने के बाद सभी आवेदनों का परीक्षण किया जाएगा। इसके उपरांत अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा, जिसे आगामी चुनावों में उपयोग में लाया जाएगा।
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