भोपाल में उपभोक्ता की जीत: चार बिस्किट का दावा, निकले तीन—कंपनियों पर 50 हजार का जुर्माना

भोपाल (म.प्र.)

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भ्रामक पैकेजिंग पर जिला उपभोक्ता आयोग सख्त, ब्रिटानिया और डी-मार्ट को चेतावनी

उपभोक्ता अधिकारों को लेकर एक अहम फैसले में भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड और डी-मार्ट को भ्रामक पैकेजिंग का दोषी ठहराया है। आयोग ने दोनों कंपनियों पर संयुक्त रूप से 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला एक साधारण उपभोक्ता शिकायत से शुरू हुआ, जिसने बड़ी कंपनियों की पैकेजिंग नीति पर सवाल खड़े कर दिए।

क्या है पूरा मामला 

भोपाल के कोलार क्षेत्र निवासी सुमित श्रीवास्तव ने 11 जनवरी 2024 को आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। सुमित ने डी-मार्ट से 180 रुपये में ब्रिटानिया फिफ्टी-फिफ्टी जीरा बिस्किट का पैकेट खरीदा था। पैकेट पर साफ तौर पर चार स्नैक पैक होने का दावा किया गया था, लेकिन पैकेट खोलने पर उसमें केवल तीन स्नैक पैक निकले।

कैसे सामने आई गड़बड़ी

खरीद के बाद जब सुमित ने डी-मार्ट स्टोर पर इसकी शिकायत की, तो स्टोर प्रबंधन ने इसे गंभीरता से लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद सुमित ने उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान पैकेजिंग, उत्पाद विवरण और उपभोक्ता के साक्ष्यों की जांच की गई।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि उत्पाद के पैकेट पर चार स्नैक पैक का स्पष्ट उल्लेख था, जबकि वास्तविक सामग्री उससे कम पाई गई। यह उपभोक्ता को गुमराह करने का मामला है, जिसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ और ‘सेवा में कमी’ माना जाता है।

कंपनियों की दलील और आयोग का रुख

डी-मार्ट ने अपने बचाव में कहा कि वह केवल रिटेलर है और उत्पाद की मात्रा व गुणवत्ता की जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की है। वहीं, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने दावा किया कि उनके उत्पाद गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होते हैं और शिकायत तथ्यात्मक नहीं है। हालांकि, आयोग ने दोनों तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि उपभोक्ता के प्रति जवाबदेही निर्माता और विक्रेता—दोनों की बनती है।

फैसला और चेतावनी

आयोग की अध्यक्ष गिरीबाला सिंह और सदस्य अंजुम फिरोज की पीठ ने दोनों कंपनियों पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। आदेश में कहा गया है कि यदि तय समयसीमा में जुर्माने की राशि जमा नहीं की गई, तो उस पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

शिकायतकर्ता के वकील अरुण गोस्वामी और स्वेक्षा प्रकाश ने इस फैसले को उपभोक्ताओं के लिए मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि छोटी-सी दिखने वाली गड़बड़ी भी उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराना जरूरी है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला कंपनियों को पैकेजिंग और विज्ञापन में पारदर्शिता बरतने का स्पष्ट संदेश देता है। आने वाले समय में ऐसे मामलों में उपभोक्ता जागरूकता और बढ़ने की उम्मीद है।

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www.dainikjagranmpcg.com
29 Dec 2025 By Nitin Trivedi

भोपाल में उपभोक्ता की जीत: चार बिस्किट का दावा, निकले तीन—कंपनियों पर 50 हजार का जुर्माना

भोपाल (म.प्र.)

उपभोक्ता अधिकारों को लेकर एक अहम फैसले में भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड और डी-मार्ट को भ्रामक पैकेजिंग का दोषी ठहराया है। आयोग ने दोनों कंपनियों पर संयुक्त रूप से 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला एक साधारण उपभोक्ता शिकायत से शुरू हुआ, जिसने बड़ी कंपनियों की पैकेजिंग नीति पर सवाल खड़े कर दिए।

क्या है पूरा मामला 

भोपाल के कोलार क्षेत्र निवासी सुमित श्रीवास्तव ने 11 जनवरी 2024 को आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। सुमित ने डी-मार्ट से 180 रुपये में ब्रिटानिया फिफ्टी-फिफ्टी जीरा बिस्किट का पैकेट खरीदा था। पैकेट पर साफ तौर पर चार स्नैक पैक होने का दावा किया गया था, लेकिन पैकेट खोलने पर उसमें केवल तीन स्नैक पैक निकले।

कैसे सामने आई गड़बड़ी

खरीद के बाद जब सुमित ने डी-मार्ट स्टोर पर इसकी शिकायत की, तो स्टोर प्रबंधन ने इसे गंभीरता से लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद सुमित ने उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान पैकेजिंग, उत्पाद विवरण और उपभोक्ता के साक्ष्यों की जांच की गई।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि उत्पाद के पैकेट पर चार स्नैक पैक का स्पष्ट उल्लेख था, जबकि वास्तविक सामग्री उससे कम पाई गई। यह उपभोक्ता को गुमराह करने का मामला है, जिसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ और ‘सेवा में कमी’ माना जाता है।

कंपनियों की दलील और आयोग का रुख

डी-मार्ट ने अपने बचाव में कहा कि वह केवल रिटेलर है और उत्पाद की मात्रा व गुणवत्ता की जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की है। वहीं, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने दावा किया कि उनके उत्पाद गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होते हैं और शिकायत तथ्यात्मक नहीं है। हालांकि, आयोग ने दोनों तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि उपभोक्ता के प्रति जवाबदेही निर्माता और विक्रेता—दोनों की बनती है।

फैसला और चेतावनी

आयोग की अध्यक्ष गिरीबाला सिंह और सदस्य अंजुम फिरोज की पीठ ने दोनों कंपनियों पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। आदेश में कहा गया है कि यदि तय समयसीमा में जुर्माने की राशि जमा नहीं की गई, तो उस पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

शिकायतकर्ता के वकील अरुण गोस्वामी और स्वेक्षा प्रकाश ने इस फैसले को उपभोक्ताओं के लिए मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि छोटी-सी दिखने वाली गड़बड़ी भी उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराना जरूरी है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला कंपनियों को पैकेजिंग और विज्ञापन में पारदर्शिता बरतने का स्पष्ट संदेश देता है। आने वाले समय में ऐसे मामलों में उपभोक्ता जागरूकता और बढ़ने की उम्मीद है।

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