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चाइनीज मांझे से मौत पर गैर-इरादतन हत्या का केस: हाईकोर्ट सख्त, बच्चों के मामले में माता-पिता भी जिम्मेदार
इंदौर (म.प्र.)
बैन के बावजूद बढ़ती घटनाओं पर अदालत की नाराजगी, मकर संक्रांति से पहले 14 जिलों से कार्ययोजना रिपोर्ट तलब
चाइनीज मांझे से हो रही मौतों और गंभीर हादसों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ किया है कि प्रतिबंध के बावजूद यदि चाइनीज मांझे के कारण किसी व्यक्ति की मौत होती है, तो संबंधित आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा। कोर्ट ने इसे गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा का विषय बताते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
सोमवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा कि चाइनीज मांझे पर पहले से प्रतिबंध के बावजूद लगातार जानलेवा घटनाएं सामने आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चाइनीज मांझा बेचने, रखने या उपयोग करने वालों के खिलाफ सीधे आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यदि कोई नाबालिग इस प्रतिबंधित मांझे का इस्तेमाल करते पाया जाता है, तो उसके माता-पिता या अभिभावकों को जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी।
इंदौर में तीन मौतों का हवाला
कोर्ट ने इंदौर में बीते कुछ महीनों के दौरान चाइनीज मांझे से हुई तीन मौतों का उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में पक्षी भी इसकी चपेट में आकर मारे गए हैं। न्यायालय ने कहा कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति है, जब पतंगबाजी चरम पर होती है, ऐसे में प्रतिबंधित मांझे से बड़े हादसों की आशंका और बढ़ जाती है।
14 जिलों से रिपोर्ट तलब
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र सीनियर एडवोकेट विवेक शरण और आकाश शर्मा ने सुझाव दिया कि इंदौर सहित हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 14 जिलों से अब तक उठाए गए कदमों और कार्ययोजना की विस्तृत रिपोर्ट मंगाई जाए। कोर्ट ने इस पर सहमति जताते हुए संबंधित जिलों से रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी। इस दौरान इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा भी अदालत में उपस्थित रहे।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लागू है और इसके दुष्परिणामों को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने कहा कि अवैध बिक्री रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है और हादसों से बचाव के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। हाईकोर्ट पहले ही 11 दिसंबर 2025 को इंदौर और आसपास के जिलों में इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर चुका है।
पीड़ितों की आवाज अदालत में
सुनवाई के दौरान महिला अधिवक्ता कविता उइके ने अदालत को बताया कि चाइनीज मांझे से उनका गला कट गया था और जान बचाने के लिए उन्हें मांझा हाथों से तोड़ना पड़ा, जिससे उनकी हथेली गंभीर रूप से जख्मी हो गई। इस पर कोर्ट ने गहरी संवेदना जताते हुए शासन को और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि प्रतिबंध के बावजूद घटनाएं जारी रहीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। अदालत का जोर स्पष्ट है—सार्वजनिक सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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चाइनीज मांझे से मौत पर गैर-इरादतन हत्या का केस: हाईकोर्ट सख्त, बच्चों के मामले में माता-पिता भी जिम्मेदार
इंदौर (म.प्र.)
चाइनीज मांझे से हो रही मौतों और गंभीर हादसों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ किया है कि प्रतिबंध के बावजूद यदि चाइनीज मांझे के कारण किसी व्यक्ति की मौत होती है, तो संबंधित आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा। कोर्ट ने इसे गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा का विषय बताते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
सोमवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा कि चाइनीज मांझे पर पहले से प्रतिबंध के बावजूद लगातार जानलेवा घटनाएं सामने आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चाइनीज मांझा बेचने, रखने या उपयोग करने वालों के खिलाफ सीधे आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यदि कोई नाबालिग इस प्रतिबंधित मांझे का इस्तेमाल करते पाया जाता है, तो उसके माता-पिता या अभिभावकों को जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी।
इंदौर में तीन मौतों का हवाला
कोर्ट ने इंदौर में बीते कुछ महीनों के दौरान चाइनीज मांझे से हुई तीन मौतों का उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में पक्षी भी इसकी चपेट में आकर मारे गए हैं। न्यायालय ने कहा कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति है, जब पतंगबाजी चरम पर होती है, ऐसे में प्रतिबंधित मांझे से बड़े हादसों की आशंका और बढ़ जाती है।
14 जिलों से रिपोर्ट तलब
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र सीनियर एडवोकेट विवेक शरण और आकाश शर्मा ने सुझाव दिया कि इंदौर सहित हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 14 जिलों से अब तक उठाए गए कदमों और कार्ययोजना की विस्तृत रिपोर्ट मंगाई जाए। कोर्ट ने इस पर सहमति जताते हुए संबंधित जिलों से रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी। इस दौरान इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा भी अदालत में उपस्थित रहे।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लागू है और इसके दुष्परिणामों को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने कहा कि अवैध बिक्री रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है और हादसों से बचाव के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। हाईकोर्ट पहले ही 11 दिसंबर 2025 को इंदौर और आसपास के जिलों में इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर चुका है।
पीड़ितों की आवाज अदालत में
सुनवाई के दौरान महिला अधिवक्ता कविता उइके ने अदालत को बताया कि चाइनीज मांझे से उनका गला कट गया था और जान बचाने के लिए उन्हें मांझा हाथों से तोड़ना पड़ा, जिससे उनकी हथेली गंभीर रूप से जख्मी हो गई। इस पर कोर्ट ने गहरी संवेदना जताते हुए शासन को और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि प्रतिबंध के बावजूद घटनाएं जारी रहीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। अदालत का जोर स्पष्ट है—सार्वजनिक सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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