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एमपी पुलिस की महिला इंस्पेक्टर ने फतह किया किलिमंजारो, बनीं पहली अफसर
भोपाल,(म.प्र.)
भोपाल की इंस्पेक्टर दीपिका गौतम ने 5865 मीटर ऊंचे माउंट किलिमंजारो पर तिरंगा लहराकर रचा इतिहास, भारत से थीं अकेली प्रतिभागी
मध्यप्रदेश पुलिस की महिला अधिकारी इंस्पेक्टर दीपिका गौतम ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने न केवल पुलिस विभाग बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। भोपाल स्थित एससीआरबी पीएचक्यू में पदस्थ दीपिका गौतम ने अफ्रीका के देश तंजानिया में स्थित विश्व प्रसिद्ध माउंट किलिमंजारो को फतह कर इतिहास रच दिया है। करीब 5865 मीटर ऊंची इस चोटी पर पहुंचने वाली वह मध्यप्रदेश पुलिस की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि की चर्चा पुलिस महकमे से लेकर आम लोगों के बीच भी हो रही है। बताया जा रहा है कि 29 मई को उन्होंने सफलतापूर्वक शिखर तक पहुंचकर अपना अभियान पूरा किया। खास बात यह रही कि इस अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली वह अकेली प्रतिभागी थीं। ऐसे में उनकी यह सफलता और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दीपिका गौतम की यह उपलब्धि सिर्फ एक पर्वत की चढ़ाई भर नहीं है, बल्कि यह उस सोच का परिणाम है जिसमें व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने सपनों को भी जीवित रखता है। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग नौकरी, परिवार और दैनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच अपने व्यक्तिगत सपनों को पीछे छोड़ देते हैं। लेकिन उन्होंने हमेशा यह कोशिश की कि जिम्मेदारियों के साथ अपने लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाया जाए। उनका मानना है कि सपनों के बिना जीवन अधूरा है और यही सोच उन्हें हजारों किलोमीटर दूर अफ्रीका के इस चुनौतीपूर्ण अभियान तक ले गई। उनके अनुसार रास्ता आसान नहीं था, लेकिन हर कठिन कदम उन्हें अपने लक्ष्य के और करीब ले जाता गया।
किलिमंजारो पर्वत को दुनिया के सबसे प्रसिद्ध ट्रेकिंग और पर्वतारोहण अभियानों में गिना जाता है। अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी तक पहुंचने के लिए पर्वतारोहियों को कई दिनों तक कठिन मौसम, ऑक्सीजन की कमी और लगातार बदलती परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। दीपिका गौतम का अभियान भी कुछ ऐसा ही रहा। जानकारी के मुताबिक यह पांच दिन का लंबा और चुनौतीपूर्ण सफर था। इस दौरान उन्हें तीन अलग-अलग बेस कैंप पार करने पड़े। अंतिम चढ़ाई रात के समय शुरू हुई, जब तापमान माइनस 10 से माइनस 15 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया था। तेज ठंडी हवाएं और बदलता मौसम इस अभियान को और कठिन बना रहे थे। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार आगे बढ़ती रहीं।
अधिकारियों के अनुसार पर्वतारोहण केवल शारीरिक ताकत का खेल नहीं होता, बल्कि मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी होती है। कई बार ऊंचाई पर पहुंचने के बाद शरीर जवाब देने लगता है, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने की इच्छा व्यक्ति को आगे बढ़ाती रहती है। दीपिका ने भी इसी जज्बे का परिचय दिया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखा और आखिरकार शिखर तक पहुंचकर सफलता हासिल की। इस उपलब्धि के बाद मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में भी खुशी का माहौल देखा गया। उनके सहयोगियों और अधिकारियों ने उन्हें बधाई देते हुए इसे पूरे विभाग के लिए गर्व का क्षण बताया।
हालांकि यह दीपिका गौतम का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियान था, लेकिन पहाड़ों और ट्रेकिंग से उनका रिश्ता नया नहीं है। इससे पहले वह अमरनाथ और केदारनाथ जैसे कठिन धार्मिक ट्रेक कई बार कर चुकी हैं। इन यात्राओं ने उन्हें ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चलने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का अनुभव दिया। यही अनुभव किलिमंजारो अभियान में भी उनके काम आया। खुद को मल्टीटास्किंग मानने वाली दीपिका का कहना है कि जीवन में नई चुनौतियों को स्वीकार करना जरूरी है, क्योंकि यही व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
उनकी सफलता खासतौर पर उन महिलाओं के लिए प्रेरणा मानी जा रही है जो नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपने सपनों को सीमित मान लेती हैं। दीपिका की कहानी यह बताती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास लगातार किए जाएं तो बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। सोशल मीडिया पर भी लोग उनकी उपलब्धि की सराहना कर रहे हैं और उन्हें नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बता रहे हैं। इस उपलब्धि के बाद अब दीपिका गौतम का अगला लक्ष्य भी लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने अभी अपने आगामी अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी है, लेकिन संकेत दिए हैं कि अगले वर्ष वह विदेश में एक और पर्वतारोहण अभियान का हिस्सा बन सकती हैं।
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एमपी पुलिस की महिला इंस्पेक्टर ने फतह किया किलिमंजारो, बनीं पहली अफसर
भोपाल,(म.प्र.)
मध्यप्रदेश पुलिस की महिला अधिकारी इंस्पेक्टर दीपिका गौतम ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने न केवल पुलिस विभाग बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। भोपाल स्थित एससीआरबी पीएचक्यू में पदस्थ दीपिका गौतम ने अफ्रीका के देश तंजानिया में स्थित विश्व प्रसिद्ध माउंट किलिमंजारो को फतह कर इतिहास रच दिया है। करीब 5865 मीटर ऊंची इस चोटी पर पहुंचने वाली वह मध्यप्रदेश पुलिस की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि की चर्चा पुलिस महकमे से लेकर आम लोगों के बीच भी हो रही है। बताया जा रहा है कि 29 मई को उन्होंने सफलतापूर्वक शिखर तक पहुंचकर अपना अभियान पूरा किया। खास बात यह रही कि इस अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली वह अकेली प्रतिभागी थीं। ऐसे में उनकी यह सफलता और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दीपिका गौतम की यह उपलब्धि सिर्फ एक पर्वत की चढ़ाई भर नहीं है, बल्कि यह उस सोच का परिणाम है जिसमें व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने सपनों को भी जीवित रखता है। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग नौकरी, परिवार और दैनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच अपने व्यक्तिगत सपनों को पीछे छोड़ देते हैं। लेकिन उन्होंने हमेशा यह कोशिश की कि जिम्मेदारियों के साथ अपने लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाया जाए। उनका मानना है कि सपनों के बिना जीवन अधूरा है और यही सोच उन्हें हजारों किलोमीटर दूर अफ्रीका के इस चुनौतीपूर्ण अभियान तक ले गई। उनके अनुसार रास्ता आसान नहीं था, लेकिन हर कठिन कदम उन्हें अपने लक्ष्य के और करीब ले जाता गया।
किलिमंजारो पर्वत को दुनिया के सबसे प्रसिद्ध ट्रेकिंग और पर्वतारोहण अभियानों में गिना जाता है। अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी तक पहुंचने के लिए पर्वतारोहियों को कई दिनों तक कठिन मौसम, ऑक्सीजन की कमी और लगातार बदलती परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। दीपिका गौतम का अभियान भी कुछ ऐसा ही रहा। जानकारी के मुताबिक यह पांच दिन का लंबा और चुनौतीपूर्ण सफर था। इस दौरान उन्हें तीन अलग-अलग बेस कैंप पार करने पड़े। अंतिम चढ़ाई रात के समय शुरू हुई, जब तापमान माइनस 10 से माइनस 15 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया था। तेज ठंडी हवाएं और बदलता मौसम इस अभियान को और कठिन बना रहे थे। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार आगे बढ़ती रहीं।
अधिकारियों के अनुसार पर्वतारोहण केवल शारीरिक ताकत का खेल नहीं होता, बल्कि मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी होती है। कई बार ऊंचाई पर पहुंचने के बाद शरीर जवाब देने लगता है, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने की इच्छा व्यक्ति को आगे बढ़ाती रहती है। दीपिका ने भी इसी जज्बे का परिचय दिया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखा और आखिरकार शिखर तक पहुंचकर सफलता हासिल की। इस उपलब्धि के बाद मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में भी खुशी का माहौल देखा गया। उनके सहयोगियों और अधिकारियों ने उन्हें बधाई देते हुए इसे पूरे विभाग के लिए गर्व का क्षण बताया।
हालांकि यह दीपिका गौतम का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियान था, लेकिन पहाड़ों और ट्रेकिंग से उनका रिश्ता नया नहीं है। इससे पहले वह अमरनाथ और केदारनाथ जैसे कठिन धार्मिक ट्रेक कई बार कर चुकी हैं। इन यात्राओं ने उन्हें ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चलने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का अनुभव दिया। यही अनुभव किलिमंजारो अभियान में भी उनके काम आया। खुद को मल्टीटास्किंग मानने वाली दीपिका का कहना है कि जीवन में नई चुनौतियों को स्वीकार करना जरूरी है, क्योंकि यही व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
उनकी सफलता खासतौर पर उन महिलाओं के लिए प्रेरणा मानी जा रही है जो नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपने सपनों को सीमित मान लेती हैं। दीपिका की कहानी यह बताती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास लगातार किए जाएं तो बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। सोशल मीडिया पर भी लोग उनकी उपलब्धि की सराहना कर रहे हैं और उन्हें नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बता रहे हैं। इस उपलब्धि के बाद अब दीपिका गौतम का अगला लक्ष्य भी लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने अभी अपने आगामी अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी है, लेकिन संकेत दिए हैं कि अगले वर्ष वह विदेश में एक और पर्वतारोहण अभियान का हिस्सा बन सकती हैं।
