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इंदौर मेट्रो का दूसरा फेज तैयार, 21 जून से नए ट्रैक पर दौड़ेगी
इंदौर,(म.प्र.)
20 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर करेंगे लोकार्पण, लाखों यात्रियों को मिलेगा फायदा
इंदौर मेट्रो परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। येलो लाइन के दूसरे फेज को हरी झंडी मिलने के बाद अब 20 जून को इसका औपचारिक लोकार्पण किया जाएगा, जबकि 21 जून से आम लोग नए रूट पर मेट्रो की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इस विस्तार के साथ इंदौर मेट्रो न केवल अपने नेटवर्क को और मजबूत करेगी, बल्कि भोपाल मेट्रो की तुलना में विकास की रफ्तार में भी आगे निकलती दिखाई दे रही है। मेट्रो के नए कॉरिडोर के शुरू होने से शहर के सबसे व्यस्त इलाकों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन से जोड़ा जाएगा। मेट्रो का नया रूट सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक रहेगा। यह कॉरिडोर इंदौर के कई प्रमुख आवासीय, व्यावसायिक और आईटी क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग माना जा रहा है। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार इस रूट से सीधे तौर पर 4 से 6 लाख लोगों को लाभ मिलेगा, जबकि फीडर बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को जोड़ने के बाद यह संख्या 8 से 10 लाख यात्रियों तक पहुंच सकती है। शहर के जिन इलाकों से यह मेट्रो गुजरेगी, वहां प्रतिदिन लाखों लोग निजी और सार्वजनिक वाहनों से सफर करते हैं। ऐसे में ट्रैफिक दबाव कम होने के साथ-साथ यात्रा का समय भी घटने की उम्मीद है।
इस रूट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह इंदौर के तेजी से विकसित हो रहे आईटी और कॉरपोरेट हब को जोड़ता है। टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी कंपनियों के कैंपस इसी कॉरिडोर के आसपास स्थित हैं। इसके अलावा एयरपोर्ट, एसईजेड, आईटी पार्क, होटल, शैक्षणिक संस्थान और कई कॉरपोरेट कार्यालय भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संचालन के शुरुआती दिनों में प्रतिदिन 25 से 40 हजार यात्री इस रूट का उपयोग कर सकते हैं। आने वाले वर्षों में जब सुपर कॉरिडोर और आसपास के क्षेत्र और विकसित होंगे, तब यह संख्या एक लाख यात्रियों प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। लोकार्पण से पहले भोपाल स्थित मेट्रो मुख्यालय में लगातार बैठकें चल रही हैं। मेट्रो प्रबंधन किराया, टाइमिंग और ट्रेनों के फेरों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक अगले कुछ दिनों में पूरा शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। नए फेज के साथ करीब 17 किलोमीटर लंबे नेटवर्क पर मेट्रो सेवाएं उपलब्ध होंगी। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्टेशन संचालन, टिकटिंग व्यवस्था और फीडर सेवाओं पर भी काम किया जा रहा है।
मेट्रो परियोजना के तहत सुपर कॉरिडोर स्टेशन-2, सुपर कॉरिडोर स्टेशन-1, भौंरासला चौराहा, एमआर-10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा जैसे स्टेशन शामिल होंगे। ये सभी इलाके शहर के प्रमुख यातायात और व्यावसायिक केंद्र माने जाते हैं। ऐसे में मेट्रो के संचालन से यात्रियों को रोजाना होने वाली ट्रैफिक समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर भोपाल मेट्रो परियोजना पर भी तेजी से काम जारी है, लेकिन निर्माण की जटिलताओं के कारण उसका दूसरा फेज इंदौर से पीछे चल रहा है। भोपाल में ऑरेंज लाइन और ब्लू लाइन पर कार्य प्रगति पर है। यहां सुभाष नगर से एम्स तक का प्रायोरिटी कॉरिडोर पहले ही शुरू हो चुका है, जबकि अगले चरण में अंडरग्राउंड रूट का निर्माण किया जा रहा है। करीब 3.39 किलोमीटर लंबी सुरंग और दो भूमिगत स्टेशन इस परियोजना का हिस्सा हैं। अधिकारियों के अनुसार यह कार्य वर्ष 2028 तक पूरा होने की संभावना है।
भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत में भी बड़ा इजाफा हुआ है। वर्ष 2016 में करीब 6,241 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली परियोजना अब बढ़कर 10,033 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई लागत से निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी और अगले दो वर्षों में परियोजना का स्वरूप और स्पष्ट दिखाई देगा। इंदौर मेट्रो के दूसरे फेज का शुभारंभ शहर के सार्वजनिक परिवहन ढांचे के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि आईटी सेक्टर, व्यापारिक गतिविधियों और शहरी विकास को भी नई गति मिलेगी।
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इंदौर मेट्रो का दूसरा फेज तैयार, 21 जून से नए ट्रैक पर दौड़ेगी
इंदौर,(म.प्र.)
इंदौर मेट्रो परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। येलो लाइन के दूसरे फेज को हरी झंडी मिलने के बाद अब 20 जून को इसका औपचारिक लोकार्पण किया जाएगा, जबकि 21 जून से आम लोग नए रूट पर मेट्रो की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इस विस्तार के साथ इंदौर मेट्रो न केवल अपने नेटवर्क को और मजबूत करेगी, बल्कि भोपाल मेट्रो की तुलना में विकास की रफ्तार में भी आगे निकलती दिखाई दे रही है। मेट्रो के नए कॉरिडोर के शुरू होने से शहर के सबसे व्यस्त इलाकों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन से जोड़ा जाएगा। मेट्रो का नया रूट सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक रहेगा। यह कॉरिडोर इंदौर के कई प्रमुख आवासीय, व्यावसायिक और आईटी क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग माना जा रहा है। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार इस रूट से सीधे तौर पर 4 से 6 लाख लोगों को लाभ मिलेगा, जबकि फीडर बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को जोड़ने के बाद यह संख्या 8 से 10 लाख यात्रियों तक पहुंच सकती है। शहर के जिन इलाकों से यह मेट्रो गुजरेगी, वहां प्रतिदिन लाखों लोग निजी और सार्वजनिक वाहनों से सफर करते हैं। ऐसे में ट्रैफिक दबाव कम होने के साथ-साथ यात्रा का समय भी घटने की उम्मीद है।
इस रूट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह इंदौर के तेजी से विकसित हो रहे आईटी और कॉरपोरेट हब को जोड़ता है। टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी कंपनियों के कैंपस इसी कॉरिडोर के आसपास स्थित हैं। इसके अलावा एयरपोर्ट, एसईजेड, आईटी पार्क, होटल, शैक्षणिक संस्थान और कई कॉरपोरेट कार्यालय भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संचालन के शुरुआती दिनों में प्रतिदिन 25 से 40 हजार यात्री इस रूट का उपयोग कर सकते हैं। आने वाले वर्षों में जब सुपर कॉरिडोर और आसपास के क्षेत्र और विकसित होंगे, तब यह संख्या एक लाख यात्रियों प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। लोकार्पण से पहले भोपाल स्थित मेट्रो मुख्यालय में लगातार बैठकें चल रही हैं। मेट्रो प्रबंधन किराया, टाइमिंग और ट्रेनों के फेरों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक अगले कुछ दिनों में पूरा शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। नए फेज के साथ करीब 17 किलोमीटर लंबे नेटवर्क पर मेट्रो सेवाएं उपलब्ध होंगी। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्टेशन संचालन, टिकटिंग व्यवस्था और फीडर सेवाओं पर भी काम किया जा रहा है।
मेट्रो परियोजना के तहत सुपर कॉरिडोर स्टेशन-2, सुपर कॉरिडोर स्टेशन-1, भौंरासला चौराहा, एमआर-10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा जैसे स्टेशन शामिल होंगे। ये सभी इलाके शहर के प्रमुख यातायात और व्यावसायिक केंद्र माने जाते हैं। ऐसे में मेट्रो के संचालन से यात्रियों को रोजाना होने वाली ट्रैफिक समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर भोपाल मेट्रो परियोजना पर भी तेजी से काम जारी है, लेकिन निर्माण की जटिलताओं के कारण उसका दूसरा फेज इंदौर से पीछे चल रहा है। भोपाल में ऑरेंज लाइन और ब्लू लाइन पर कार्य प्रगति पर है। यहां सुभाष नगर से एम्स तक का प्रायोरिटी कॉरिडोर पहले ही शुरू हो चुका है, जबकि अगले चरण में अंडरग्राउंड रूट का निर्माण किया जा रहा है। करीब 3.39 किलोमीटर लंबी सुरंग और दो भूमिगत स्टेशन इस परियोजना का हिस्सा हैं। अधिकारियों के अनुसार यह कार्य वर्ष 2028 तक पूरा होने की संभावना है।
भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत में भी बड़ा इजाफा हुआ है। वर्ष 2016 में करीब 6,241 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली परियोजना अब बढ़कर 10,033 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई लागत से निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी और अगले दो वर्षों में परियोजना का स्वरूप और स्पष्ट दिखाई देगा। इंदौर मेट्रो के दूसरे फेज का शुभारंभ शहर के सार्वजनिक परिवहन ढांचे के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि आईटी सेक्टर, व्यापारिक गतिविधियों और शहरी विकास को भी नई गति मिलेगी।
