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बारिश की कमी होगी दूर! मध्य प्रदेश में फिर एक्टिव हुआ मानसून, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मध्य प्रदेश
नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस और दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन बने बारिश की वजह, पांच जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी, कई संभागों में तेज बारिश के आसार
मध्य प्रदेश में लंबे समय से बारिश की कमी झेल रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई इलाकों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस और दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन के सक्रिय होने से प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी, जिससे प्रदेश में अब तक बनी बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।
बुधवार के लिए मौसम विभाग ने पांच जिलों छतरपुर, सतना, दतिया, भिंड और पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम संबंधी सलाह का पालन करने की अपील की है।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के उत्तरी हिस्से में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। इसके साथ ही एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस भी प्रभावी हुआ है। इन तीनों मौसम प्रणालियों के संयुक्त असर से बादलों की आवाजाही बढ़ी है और नमी मिलने के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की संभावना मजबूत हुई है।
राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, सागर, नर्मदापुरम, खंडवा, रायसेन, झाबुआ, धार, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, देवास, मंदसौर, शाजापुर, आगर-मालवा, रतलाम, नीमच, बैतूल, हरदा, दमोह, बालाघाट, मंडला, सिवनी, छिंदवाड़ा, कटनी, रीवा, सीधी, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, डिंडोरी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर और पांढुर्णा सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं तेज बारिश होने के आसार हैं। इस बार बारिश का दायरा काफी व्यापक रहेगा। कई जिलों में लगातार दो से तीन दिन तक रुक-रुककर वर्षा हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और उमस से भी राहत मिलेगी। हालांकि भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और निचले इलाकों में पानी भरने जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं।
प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 407.2 मिलीमीटर यानी करीब 16 इंच बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में इससे अधिक वर्षा होनी चाहिए थी। प्रदेश में लगभग 18 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।
यदि पूरे मानसून सीजन की बात करें तो मध्य प्रदेश की सामान्य औसत बारिश लगभग 37.3 इंच मानी जाती है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में भी सामान्य बारिश 38 से 39 इंच के बीच रहती है, लेकिन इस बार अब तक बारिश का आंकड़ा काफी पीछे चल रहा है। ऐसे में मौसम विभाग की नई भविष्यवाणी किसानों और आम लोगों के लिए राहत की खबर लेकर आई है।
बारिश की कमी का असर खेती पर भी साफ दिखाई देने लगा था। कई जिलों में सोयाबीन, धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की वृद्धि प्रभावित हुई है। किसानों को समय पर पर्याप्त बारिश नहीं मिलने के कारण सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा था। यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश होती है तो फसलों को बड़ा फायदा मिलेगा और खेतों में नमी की स्थिति बेहतर होगी। अगस्त का महीना खेती के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी दौरान होने वाली बारिश फसलों की बढ़वार तय करती है। यदि इस समय पर्याप्त वर्षा हो जाए तो उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है। यही वजह है कि किसान भी मानसून की सक्रियता का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि भारी बारिश वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें। नदी, नालों और जलभराव वाले स्थानों के आसपास सतर्क रहें। बिजली गिरने की आशंका होने पर खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों। वाहन चालकों को भी बारिश के दौरान सावधानी बरतने और धीमी गति से वाहन चलाने की सलाह दी गई है।
शहरी क्षेत्रों में नगर निगम और प्रशासन ने भी बारिश को देखते हुए तैयारियां शुरू कर दी हैं। जल निकासी व्यवस्था की निगरानी की जा रही है ताकि तेज बारिश के दौरान जलभराव की समस्या कम हो सके। वहीं आपदा प्रबंधन की टीमें भी अलर्ट मोड पर रखी गई हैं। यदि वर्तमान मौसम प्रणालियां अगले कुछ दिनों तक सक्रिय बनी रहती हैं तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। इससे न केवल जलाशयों का जलस्तर बढ़ेगा बल्कि पेयजल संकट और खेती से जुड़ी चिंताएं भी कम होंगी।
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बारिश की कमी होगी दूर! मध्य प्रदेश में फिर एक्टिव हुआ मानसून, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में लंबे समय से बारिश की कमी झेल रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई इलाकों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस और दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन के सक्रिय होने से प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी, जिससे प्रदेश में अब तक बनी बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।
बुधवार के लिए मौसम विभाग ने पांच जिलों छतरपुर, सतना, दतिया, भिंड और पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम संबंधी सलाह का पालन करने की अपील की है।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के उत्तरी हिस्से में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। इसके साथ ही एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस भी प्रभावी हुआ है। इन तीनों मौसम प्रणालियों के संयुक्त असर से बादलों की आवाजाही बढ़ी है और नमी मिलने के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की संभावना मजबूत हुई है।
राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, सागर, नर्मदापुरम, खंडवा, रायसेन, झाबुआ, धार, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, देवास, मंदसौर, शाजापुर, आगर-मालवा, रतलाम, नीमच, बैतूल, हरदा, दमोह, बालाघाट, मंडला, सिवनी, छिंदवाड़ा, कटनी, रीवा, सीधी, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, डिंडोरी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर और पांढुर्णा सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं तेज बारिश होने के आसार हैं। इस बार बारिश का दायरा काफी व्यापक रहेगा। कई जिलों में लगातार दो से तीन दिन तक रुक-रुककर वर्षा हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और उमस से भी राहत मिलेगी। हालांकि भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और निचले इलाकों में पानी भरने जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं।
प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 407.2 मिलीमीटर यानी करीब 16 इंच बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में इससे अधिक वर्षा होनी चाहिए थी। प्रदेश में लगभग 18 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है।
यदि पूरे मानसून सीजन की बात करें तो मध्य प्रदेश की सामान्य औसत बारिश लगभग 37.3 इंच मानी जाती है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में भी सामान्य बारिश 38 से 39 इंच के बीच रहती है, लेकिन इस बार अब तक बारिश का आंकड़ा काफी पीछे चल रहा है। ऐसे में मौसम विभाग की नई भविष्यवाणी किसानों और आम लोगों के लिए राहत की खबर लेकर आई है।
बारिश की कमी का असर खेती पर भी साफ दिखाई देने लगा था। कई जिलों में सोयाबीन, धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की वृद्धि प्रभावित हुई है। किसानों को समय पर पर्याप्त बारिश नहीं मिलने के कारण सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा था। यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश होती है तो फसलों को बड़ा फायदा मिलेगा और खेतों में नमी की स्थिति बेहतर होगी। अगस्त का महीना खेती के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी दौरान होने वाली बारिश फसलों की बढ़वार तय करती है। यदि इस समय पर्याप्त वर्षा हो जाए तो उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है। यही वजह है कि किसान भी मानसून की सक्रियता का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि भारी बारिश वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें। नदी, नालों और जलभराव वाले स्थानों के आसपास सतर्क रहें। बिजली गिरने की आशंका होने पर खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों। वाहन चालकों को भी बारिश के दौरान सावधानी बरतने और धीमी गति से वाहन चलाने की सलाह दी गई है।
शहरी क्षेत्रों में नगर निगम और प्रशासन ने भी बारिश को देखते हुए तैयारियां शुरू कर दी हैं। जल निकासी व्यवस्था की निगरानी की जा रही है ताकि तेज बारिश के दौरान जलभराव की समस्या कम हो सके। वहीं आपदा प्रबंधन की टीमें भी अलर्ट मोड पर रखी गई हैं। यदि वर्तमान मौसम प्रणालियां अगले कुछ दिनों तक सक्रिय बनी रहती हैं तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। इससे न केवल जलाशयों का जलस्तर बढ़ेगा बल्कि पेयजल संकट और खेती से जुड़ी चिंताएं भी कम होंगी।
