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72 घंटे जलेगा यूनियन कार्बाइड का 10 टन कचरा, 9 किलो के बने पैकेट, छावनी बना पीथमपुर
INDORE, MP
भोपाल गैस त्रासदी के जहराली कचरे को जलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई. पीथमपुर में पहले 72 घंटे में 10 टन कचरा जलेगा.
देश की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी यानी भोपाल गैस कांड का कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. धार जिले के पीथमपुर स्थित रामकी संयंत्र में त्रासदी का बचा हुआ अवशेष यूनियन कार्बाइड के 337 मीट्रिक टन कचरे को जलाया जाएगा. बताया जा रहा है कि अगले 72 घंटे में रामकी संयंत्र में पहले 10 टन कचरा ट्रायल के तौर पर जलाया जाएगा. जिसे लेकर यहां स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पालन किया जा रहा है. जो प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा तैयार किया गया है. लिहाजा प्रदूषण नियंत्रण द्वारा तैयार तमाम प्रोटोकॉल का पालन हो रहा है.
छावनी में तब्दील पीथमपुर
पीथमपुर को छावनी के रूप में बदल दिया गया है. धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, एसपी मनोज कुमार सिंह, मध्य प्रदेश प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी सहित कई अफसर मौके पर मौजूद हैं. जबकि स्वास्थ्य विभाग की टीम दो विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ परिसर के बाहर मौजूद है. फैक्ट्री परिसर के अंदर स्पेशल आम्र्ड फोर्स के 130 जवान तैनात हैं. डीएसपी रैंक के अधिकारी भी मौजूद है. बिना अनुमति किसी को परिसर के अंदर जाने की अनुमति नहीं है. 650 जवान शहर के अलग-अलग चौराहों और गांव में मौजूद हैं. 10 से ज्यादा वाहन शहर में गश्त पर लगे हैं.
स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर से हो रहा निष्पादन
वहीं मामले में धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि "पीथमपुर में हाईकोर्ट के दिशा निर्देश पर ही कचरा जलाया जा रहा है. इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया है. उसी के अनुसार कचरे का निष्पादन होना है. उन्होंने बताया कचरे को अनलोड किए जाने और अलग-अलग पैकेट में तैयार करने के बाद अब वास्तविक रूप से कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू हो रही है.
72 घंटे में जलेगा 10 टन कचरा
इस प्रक्रिया के दौरान लगातार 72 घंटे तक करीब 10 टन कचरा जलाया जाएगा. जिसकी लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है. कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया जिन कर्मचारियों की ड्यूटी संयंत्र के अंदर है. वह भी प्रदूषण से सुरक्षा के तमाम प्रोटोकॉल का पालन करते हुए काम कर रहे हैं. वही शहर भर में लोगों को विश्वास में लेकर उन्हें कचरे की लाइव मॉनिटरिंग की भी सुविधा दी गई है. उन्होंने बताया कचरा जलाए जाने के दौरान पूरे पीथमपुर में कहीं कोई विरोध नहीं है."

दरअसल यूनियन कार्बाइड कचरे को लेकर लोगों तक वास्तविक जानकारी पहुंचाने का परिणाम है. उन्होंने कहा इसके अलावा जो लोग विरोध कर रहे थे. उन्होंने भी कोर्ट के समक्ष अपना तर्क रखा, हालांकि कोर्ट ने ही अब कचरे के निष्पादन के आदेश दिए हैं, तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था और तमाम प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कचरा जलाया जा रहा है.
900 डिग्री सेल्सियस के तापमान में जलेगा कचरा
परिसर में यूनियन कार्बाइड के कचरे को अनलोड करने के बाद मिक्सिंग और जलाने की प्रक्रिया केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की देखरेख में की जा रही है. पहले कंटेनर से कचरा अलग किया गया. फिर संयंत्र के इंसीनरेटर में 900 डिग्री सेल्सियस के तापमान में कचरे को जलाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि यूनियन कार्बाइड के कचरे में नेपथॉल सेमी प्रोसैस्ट पेस्टिसाइड 47 समेत यूनियन कार्बाइड से इकठ्ठा मिट्टी के भी अवेशष हैं. यूनियन कार्बाइड में प्लांट के अंदर स्थित अन्य सामग्री भी कचरे में शामिल है, जिसे इंसीनरेटर में चूना मिलकर जलाया जा रहा है.

9-9 किलो के बनाए गए पैकेट
10 टन के कचरे को 72 घंटे यानि 3 दिन में जलाया जाएगा. जिसके लिए सबसे पहले 9-9 किलो के पैकेट बनाए गए हैं. हर पैकेट में साढ़े 4 किलो कचरा और इतनी ही मात्रा में चूना है. जिससे रासायनिक प्रभाव को न्यूट्रल किया जा सके. कचरा जलाने के लिए गुरुवार रात से ही इंसीनरेटर को चालू कर दिया गया था. जिसे 900 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रखने के लिए चालू रहना जरूरी है. शुक्रवार सुबह यह तापमान 850-900 डिग्री पहुंचा. फिर उसमें कचरे के पैकेट डालना शुरू किया गया. कचरे के जलने पर जो धुआं या गैस या तत्व निकलेगा, उस पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी नजर बनाए हुए हैं.
जीतू पटवारी ने दी चुनौती
वहीं इस कचरे को लेकर कांग्रेस लगातार विरोध जता रही है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि मैं नेताओं और प्रशासन को चुनौती देता हूं, रामकी एनवायरो के आसपास के 10 किलोमीटर के भूजल की जांच कराई जाए, कि उसमें कैंसर के तत्व हैं या नहीं? जीतू पटवारी ने कहा अगर उसमें कैंसर के तत्व नहीं पाए जाते हैं, तो मैं सार्वजनिक रूप से माफी मांगूगा."
सुप्रीम कोर्ट ने HC के फैसले को ठहराया उचित
बता दें हाईकोर्ट के निर्देश पर भोपाल से यूनियन कार्बाइड का 337 मीट्रिक टन कचरा 1 जनवरी 2025 को लोड करके पीथमपुर रामकी एनवायरो भेजा गया था. इस दौरान भोपाल से लेकर पीथमपुर तक पूरी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी. हालांकि इस दौरान कई सामाजिक संस्थाओं और लोगों ने इस कचरे के पीथमपुर में जलाए जाने का विरोध जताया था. पीथमपुर में विरोध के दौरान एक शख्स ने आत्मदाह का भी प्रयास किया था.
विरोध को देखते हुए हाई कोर्ट ने 27 फरवरी से 10 मार्च तक 3 चरणों में 10-10 मीट्रिक टन कचरा जलाने के आदेश दिए. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई. जहां सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में हाईकोर्ट जबलपुर के फैसले को सही ठहराया. जिसके बाद पीथमपुर में कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू हुई.
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72 घंटे जलेगा यूनियन कार्बाइड का 10 टन कचरा, 9 किलो के बने पैकेट, छावनी बना पीथमपुर
INDORE, MP
देश की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी यानी भोपाल गैस कांड का कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. धार जिले के पीथमपुर स्थित रामकी संयंत्र में त्रासदी का बचा हुआ अवशेष यूनियन कार्बाइड के 337 मीट्रिक टन कचरे को जलाया जाएगा. बताया जा रहा है कि अगले 72 घंटे में रामकी संयंत्र में पहले 10 टन कचरा ट्रायल के तौर पर जलाया जाएगा. जिसे लेकर यहां स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पालन किया जा रहा है. जो प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा तैयार किया गया है. लिहाजा प्रदूषण नियंत्रण द्वारा तैयार तमाम प्रोटोकॉल का पालन हो रहा है.
छावनी में तब्दील पीथमपुर
पीथमपुर को छावनी के रूप में बदल दिया गया है. धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, एसपी मनोज कुमार सिंह, मध्य प्रदेश प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी सहित कई अफसर मौके पर मौजूद हैं. जबकि स्वास्थ्य विभाग की टीम दो विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ परिसर के बाहर मौजूद है. फैक्ट्री परिसर के अंदर स्पेशल आम्र्ड फोर्स के 130 जवान तैनात हैं. डीएसपी रैंक के अधिकारी भी मौजूद है. बिना अनुमति किसी को परिसर के अंदर जाने की अनुमति नहीं है. 650 जवान शहर के अलग-अलग चौराहों और गांव में मौजूद हैं. 10 से ज्यादा वाहन शहर में गश्त पर लगे हैं.
स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर से हो रहा निष्पादन
वहीं मामले में धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि "पीथमपुर में हाईकोर्ट के दिशा निर्देश पर ही कचरा जलाया जा रहा है. इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया है. उसी के अनुसार कचरे का निष्पादन होना है. उन्होंने बताया कचरे को अनलोड किए जाने और अलग-अलग पैकेट में तैयार करने के बाद अब वास्तविक रूप से कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू हो रही है.
72 घंटे में जलेगा 10 टन कचरा
इस प्रक्रिया के दौरान लगातार 72 घंटे तक करीब 10 टन कचरा जलाया जाएगा. जिसकी लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है. कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया जिन कर्मचारियों की ड्यूटी संयंत्र के अंदर है. वह भी प्रदूषण से सुरक्षा के तमाम प्रोटोकॉल का पालन करते हुए काम कर रहे हैं. वही शहर भर में लोगों को विश्वास में लेकर उन्हें कचरे की लाइव मॉनिटरिंग की भी सुविधा दी गई है. उन्होंने बताया कचरा जलाए जाने के दौरान पूरे पीथमपुर में कहीं कोई विरोध नहीं है."

दरअसल यूनियन कार्बाइड कचरे को लेकर लोगों तक वास्तविक जानकारी पहुंचाने का परिणाम है. उन्होंने कहा इसके अलावा जो लोग विरोध कर रहे थे. उन्होंने भी कोर्ट के समक्ष अपना तर्क रखा, हालांकि कोर्ट ने ही अब कचरे के निष्पादन के आदेश दिए हैं, तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था और तमाम प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कचरा जलाया जा रहा है.
900 डिग्री सेल्सियस के तापमान में जलेगा कचरा
परिसर में यूनियन कार्बाइड के कचरे को अनलोड करने के बाद मिक्सिंग और जलाने की प्रक्रिया केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की देखरेख में की जा रही है. पहले कंटेनर से कचरा अलग किया गया. फिर संयंत्र के इंसीनरेटर में 900 डिग्री सेल्सियस के तापमान में कचरे को जलाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि यूनियन कार्बाइड के कचरे में नेपथॉल सेमी प्रोसैस्ट पेस्टिसाइड 47 समेत यूनियन कार्बाइड से इकठ्ठा मिट्टी के भी अवेशष हैं. यूनियन कार्बाइड में प्लांट के अंदर स्थित अन्य सामग्री भी कचरे में शामिल है, जिसे इंसीनरेटर में चूना मिलकर जलाया जा रहा है.

9-9 किलो के बनाए गए पैकेट
10 टन के कचरे को 72 घंटे यानि 3 दिन में जलाया जाएगा. जिसके लिए सबसे पहले 9-9 किलो के पैकेट बनाए गए हैं. हर पैकेट में साढ़े 4 किलो कचरा और इतनी ही मात्रा में चूना है. जिससे रासायनिक प्रभाव को न्यूट्रल किया जा सके. कचरा जलाने के लिए गुरुवार रात से ही इंसीनरेटर को चालू कर दिया गया था. जिसे 900 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रखने के लिए चालू रहना जरूरी है. शुक्रवार सुबह यह तापमान 850-900 डिग्री पहुंचा. फिर उसमें कचरे के पैकेट डालना शुरू किया गया. कचरे के जलने पर जो धुआं या गैस या तत्व निकलेगा, उस पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी नजर बनाए हुए हैं.
जीतू पटवारी ने दी चुनौती
वहीं इस कचरे को लेकर कांग्रेस लगातार विरोध जता रही है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि मैं नेताओं और प्रशासन को चुनौती देता हूं, रामकी एनवायरो के आसपास के 10 किलोमीटर के भूजल की जांच कराई जाए, कि उसमें कैंसर के तत्व हैं या नहीं? जीतू पटवारी ने कहा अगर उसमें कैंसर के तत्व नहीं पाए जाते हैं, तो मैं सार्वजनिक रूप से माफी मांगूगा."
सुप्रीम कोर्ट ने HC के फैसले को ठहराया उचित
बता दें हाईकोर्ट के निर्देश पर भोपाल से यूनियन कार्बाइड का 337 मीट्रिक टन कचरा 1 जनवरी 2025 को लोड करके पीथमपुर रामकी एनवायरो भेजा गया था. इस दौरान भोपाल से लेकर पीथमपुर तक पूरी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी. हालांकि इस दौरान कई सामाजिक संस्थाओं और लोगों ने इस कचरे के पीथमपुर में जलाए जाने का विरोध जताया था. पीथमपुर में विरोध के दौरान एक शख्स ने आत्मदाह का भी प्रयास किया था.
विरोध को देखते हुए हाई कोर्ट ने 27 फरवरी से 10 मार्च तक 3 चरणों में 10-10 मीट्रिक टन कचरा जलाने के आदेश दिए. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई. जहां सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में हाईकोर्ट जबलपुर के फैसले को सही ठहराया. जिसके बाद पीथमपुर में कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू हुई.
