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आदिवासी जमीन सौदे पर कार्रवाई तेज, SDM का ट्रांसफर; जनजाति आयोग ने मांगी रिपोर्ट
छिंदवाड़ा,(म.प्र.)
6.60 करोड़ की बताई जा रही जमीन 6 लाख में खरीदने के आरोप, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मुख्य सचिव और कलेक्टर को नोटिस भेजा
छिंदवाड़ा जिले में आदिवासी जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले ने अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक रूप ले लिया है। मामले में कार्रवाई करते हुए जुन्नारदेव की तत्कालीन एसडीएम कामिनी ठाकुर का स्थानांतरण बैतूल कर दिया गया है। इससे पहले उन्हें उनके पद से हटाकर जिला मुख्यालय अटैच किया गया था। प्रशासनिक आदेश जारी होने के महज दो दिन बाद ही तबादले की कार्रवाई होने से इस पूरे घटनाक्रम को जमीन विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी काफी चर्चा का विषय बना हुआ है और कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी मूल्यवान जमीन का सौदा इतनी कम कीमत पर कैसे हो गया। बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला तामिया क्षेत्र के एक प्रमुख व्यू पॉइंट के आसपास स्थित आदिवासी जमीन से जुड़ा है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस जमीन की बाजार कीमत करीब 6.60 करोड़ रुपए बताई जा रही है, जबकि इसका सौदा मात्र 6 लाख रुपए में किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि जमीन खरीदने वालों में प्रशासनिक अधिकारियों के परिजन और उनसे जुड़े लोग शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि तत्कालीन एसडीएम कामिनी ठाकुर के पिता, उस समय के बीएमओ तथा प्रभारी तहसीलदार की पत्नी के नाम पर जमीन का पंजीयन हुआ। यही वजह है कि मामला केवल जमीन सौदे तक सीमित नहीं रहा बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता और पद के दुरुपयोग जैसे सवाल भी उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित आदिवासी परिवार को काफी समय तक इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि उनकी जमीन का नामांतरण हो चुका है। मामले की चर्चा बढ़ने के बाद जब दस्तावेजों की जांच शुरू हुई तो कई तथ्यों ने प्रशासन को भी असहज कर दिया। सूत्रों के अनुसार जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया और दस्तावेजों की वैधता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले ने नया मोड़ तब लिया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस पर संज्ञान लिया। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, छिंदवाड़ा कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह जानना चाहा है कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया किस आधार पर हुई, क्या नियमों का पालन किया गया और आदिवासी भूमि से जुड़े कानूनी प्रावधानों का कितना पालन हुआ। आयोग का हस्तक्षेप इस बात का संकेत माना जा रहा है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और आने वाले दिनों में इसकी जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
अधिकारियों के अनुसार आयोग ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में संवैधानिक प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338(ए) के अंतर्गत आयोग को विशेष अधिकार प्राप्त हैं और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा जा सकता है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों पर समयबद्ध और तथ्यात्मक रिपोर्ट देने का दबाव बढ़ गया है। उधर जिले में नई प्रशासनिक व्यवस्था भी लागू कर दी गई है। कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने परिवीक्षाधीन डिप्टी कलेक्टर राजनंदिनी सिंह को जुन्नारदेव एसडीएम की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में सामान्य कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। हालांकि जमीन विवाद की जांच और आयोग की कार्रवाई फिलहाल चर्चा के केंद्र में बनी हुई है। आदिवासी भूमि से जुड़े मामलों में कानून काफी सख्त हैं और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर गंभीर कार्रवाई हो सकती है।
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आदिवासी जमीन सौदे पर कार्रवाई तेज, SDM का ट्रांसफर; जनजाति आयोग ने मांगी रिपोर्ट
छिंदवाड़ा,(म.प्र.)
छिंदवाड़ा जिले में आदिवासी जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले ने अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक रूप ले लिया है। मामले में कार्रवाई करते हुए जुन्नारदेव की तत्कालीन एसडीएम कामिनी ठाकुर का स्थानांतरण बैतूल कर दिया गया है। इससे पहले उन्हें उनके पद से हटाकर जिला मुख्यालय अटैच किया गया था। प्रशासनिक आदेश जारी होने के महज दो दिन बाद ही तबादले की कार्रवाई होने से इस पूरे घटनाक्रम को जमीन विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी काफी चर्चा का विषय बना हुआ है और कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी मूल्यवान जमीन का सौदा इतनी कम कीमत पर कैसे हो गया। बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला तामिया क्षेत्र के एक प्रमुख व्यू पॉइंट के आसपास स्थित आदिवासी जमीन से जुड़ा है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस जमीन की बाजार कीमत करीब 6.60 करोड़ रुपए बताई जा रही है, जबकि इसका सौदा मात्र 6 लाख रुपए में किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि जमीन खरीदने वालों में प्रशासनिक अधिकारियों के परिजन और उनसे जुड़े लोग शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि तत्कालीन एसडीएम कामिनी ठाकुर के पिता, उस समय के बीएमओ तथा प्रभारी तहसीलदार की पत्नी के नाम पर जमीन का पंजीयन हुआ। यही वजह है कि मामला केवल जमीन सौदे तक सीमित नहीं रहा बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता और पद के दुरुपयोग जैसे सवाल भी उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित आदिवासी परिवार को काफी समय तक इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि उनकी जमीन का नामांतरण हो चुका है। मामले की चर्चा बढ़ने के बाद जब दस्तावेजों की जांच शुरू हुई तो कई तथ्यों ने प्रशासन को भी असहज कर दिया। सूत्रों के अनुसार जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया और दस्तावेजों की वैधता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले ने नया मोड़ तब लिया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस पर संज्ञान लिया। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, छिंदवाड़ा कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह जानना चाहा है कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया किस आधार पर हुई, क्या नियमों का पालन किया गया और आदिवासी भूमि से जुड़े कानूनी प्रावधानों का कितना पालन हुआ। आयोग का हस्तक्षेप इस बात का संकेत माना जा रहा है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और आने वाले दिनों में इसकी जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
अधिकारियों के अनुसार आयोग ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में संवैधानिक प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338(ए) के अंतर्गत आयोग को विशेष अधिकार प्राप्त हैं और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा जा सकता है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों पर समयबद्ध और तथ्यात्मक रिपोर्ट देने का दबाव बढ़ गया है। उधर जिले में नई प्रशासनिक व्यवस्था भी लागू कर दी गई है। कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने परिवीक्षाधीन डिप्टी कलेक्टर राजनंदिनी सिंह को जुन्नारदेव एसडीएम की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में सामान्य कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। हालांकि जमीन विवाद की जांच और आयोग की कार्रवाई फिलहाल चर्चा के केंद्र में बनी हुई है। आदिवासी भूमि से जुड़े मामलों में कानून काफी सख्त हैं और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर गंभीर कार्रवाई हो सकती है।
