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33 साल बाद नक्सल मोर्चे से बड़ी सफलता: तीन राज्यों में कुख्यात सुनीता आयाम ने किया आत्मसमर्पण, कहा- अब जीना है नया जीवन
Balaghat, MP
नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले से पुलिस को 33 साल बाद बड़ी सफलता मिली है। प्रदेश में नक्सलियों के आत्मसमर्पण के लिए लागू की गई नीति के तहत पहली बार किसी मोस्ट वांटेड नक्सली ने हथियार डाले हैं।
यह महिला नक्सली सुनीता आयाम है, जिस पर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ तीनों राज्यों में कुल 14 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
नक्सल परिवार से ताल्लुक, तीन राज्यों में थी कुख्यात
बीजापुर की रहने वाली 23 वर्षीय सुनीता आयाम नक्सल परिवार से ताल्लुक रखती है। उसके पिता बिसरू आयाम भी सक्रिय नक्सली रह चुके हैं। सुनीता ने वर्ष 2022 में माओवादी संगठन से जुड़कर कम समय में खुद को ऊंचे पद तक पहुंचा लिया था। वह मलाजखंड-दर्रेकसा दलम की एरिया कमेटी मेंबर (ACM) रही और सीसीएम रामदेव की हथियारबंद सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करती थी।
हथियार चलाने में थी माहिर, छह महीने का प्रशिक्षण लिया था
सुनीता ने माड़ क्षेत्र में छह महीने का कठोर प्रशिक्षण लिया था और जल्द ही संगठन में हार्डकोर नक्सली के रूप में जानी जाने लगी। वह नक्सली जोन एमएमसी के दर्रेकसा क्षेत्र में सक्रिय थी और कई बार सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में शामिल रही।
चौरिया कैंप में अकेले पहुंचकर किया आत्मसमर्पण
शनिवार शाम को सुनीता अचानक बालाघाट जिले के लांजी थाना क्षेत्र के चौरिया स्थित हॉक फोर्स कैंप पहुंची। वहां उसने अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण की इच्छा जताई। यह देख पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। कुछ ही देर में अधिकारियों की मौजूदगी में सुनीता ने अपनी इंसास राइफल, तीन मैगजीन, बैग और वर्दी समेत अन्य सामग्री पुलिस को सौंप दी।
आईजी बोले – सरकार की नीति का असर
आईजी संजय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह आत्मसमर्पण प्रदेश की ‘बेस्ट ऑफ बेस्ट सरेंडर पॉलिसी’ का नतीजा है। उन्होंने कहा कि मार्च 2026 तक प्रदेश को नक्सल-मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है और सुनीता का यह कदम उसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
पुलिस ने कहा – सुरक्षित जीवन और पुनर्वास की गारंटी
बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि सुनीता का स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करना यह दर्शाता है कि पुलिस पर आमजन का भरोसा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सुनीता को पुनर्वास योजना के तहत आर्थिक सहायता और कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वह समाज की मुख्यधारा में लौट सके और सम्मानजनक जीवन जी सके।
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यह महिला नक्सली सुनीता आयाम है, जिस पर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ तीनों राज्यों में कुल 14 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
नक्सल परिवार से ताल्लुक, तीन राज्यों में थी कुख्यात
बीजापुर की रहने वाली 23 वर्षीय सुनीता आयाम नक्सल परिवार से ताल्लुक रखती है। उसके पिता बिसरू आयाम भी सक्रिय नक्सली रह चुके हैं। सुनीता ने वर्ष 2022 में माओवादी संगठन से जुड़कर कम समय में खुद को ऊंचे पद तक पहुंचा लिया था। वह मलाजखंड-दर्रेकसा दलम की एरिया कमेटी मेंबर (ACM) रही और सीसीएम रामदेव की हथियारबंद सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करती थी।
हथियार चलाने में थी माहिर, छह महीने का प्रशिक्षण लिया था
सुनीता ने माड़ क्षेत्र में छह महीने का कठोर प्रशिक्षण लिया था और जल्द ही संगठन में हार्डकोर नक्सली के रूप में जानी जाने लगी। वह नक्सली जोन एमएमसी के दर्रेकसा क्षेत्र में सक्रिय थी और कई बार सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में शामिल रही।
चौरिया कैंप में अकेले पहुंचकर किया आत्मसमर्पण
शनिवार शाम को सुनीता अचानक बालाघाट जिले के लांजी थाना क्षेत्र के चौरिया स्थित हॉक फोर्स कैंप पहुंची। वहां उसने अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण की इच्छा जताई। यह देख पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। कुछ ही देर में अधिकारियों की मौजूदगी में सुनीता ने अपनी इंसास राइफल, तीन मैगजीन, बैग और वर्दी समेत अन्य सामग्री पुलिस को सौंप दी।
आईजी बोले – सरकार की नीति का असर
आईजी संजय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह आत्मसमर्पण प्रदेश की ‘बेस्ट ऑफ बेस्ट सरेंडर पॉलिसी’ का नतीजा है। उन्होंने कहा कि मार्च 2026 तक प्रदेश को नक्सल-मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है और सुनीता का यह कदम उसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
पुलिस ने कहा – सुरक्षित जीवन और पुनर्वास की गारंटी
बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि सुनीता का स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करना यह दर्शाता है कि पुलिस पर आमजन का भरोसा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सुनीता को पुनर्वास योजना के तहत आर्थिक सहायता और कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वह समाज की मुख्यधारा में लौट सके और सम्मानजनक जीवन जी सके।
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