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मध्य प्रदेश लौटे सभी तीर्थयात्री, चार दिन तक नेपाल में भूखे-प्यासे फंसे थे लोग
Jagran desk
तीर्थयात्रा के लिए नेपाल गए कुल तीर्थयात्री वहां बाढ़ में बुरी तरह फंस गए थे और करीब 4 दिनों तक उन्हें भूखे-प्यासे दिन बिताने पड़े. हालांकि नेपाली सेना की मदद से सभी तीर्थयात्री भारत बार्डर पर सुरक्षित पहुंच गए और गोरखपुर रेलवे स्टेशन से आज अपने-अपने घरों तक रवाना किए गए.
नेपाल में आई बाढ़ की विभीषिका में फंसे रीवा, जबलपुर और डिंडोरी के सभी तीर्थयात्री आज मुस्कुराते चेहरे के साथ सुरक्षित अपने घर वापस लौट गए हैं. करीब 4 दिनों तक नेपाल की बाढ़ में भूखे-प्यासे दिन रहे यात्री गुरूवार सुबह अपने शहर की ओर रवाना किए गए. 

घर सुरक्षित पहुंचाए गए नेपाल ने रेस्क्यु करके लाए गए 17 तीर्थयात्री
भारत बार्डर से रिसीव करने गए अधिकारियों के मुताबिक सभी तीर्थयात्रियों को गोरखपुर रेलवे स्टेशन से अलग-अलग शहरों में रवाना किया गया. घरों तक सुरक्षित पहुंचाए गए कुल 17 तीर्थयात्रियों में डिंडोरी जिले के 7 तीर्थयात्री, रीवा जिले के 4 और जबलपुर जिले के 6 तीर्थयात्री शामिल हैं.
काठमांडु मे स्थित पशुपतिनाथ मंदिर का दर्शन करने गए थे तीर्थयात्री
गौरतलब है भारत बार्डर तक सुरक्षित पहुंचाए गए मध्य प्रदेश के सभी यात्री नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन के लिए गए थे, लेकिन वहां आई बाढ़ में बुरी तरह फंस गए थे और करीब चार दिन तक बाढ़ में भूखे-प्यासे जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे, लेकिन नेपाल सेना और स्थानीय प्रशासन की मदद से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था.
नेपाल में फंसे डाक्टर ने सुरक्षित बचने का भेजा था वीडियो संदेश
नेपाल की बाढ़ में परिवार के 6 सदस्यों के साथ फंसे जबलपुर के डॉक्टर राजेश बारिया ने बुधवार को भेजे एक वीडियो संदेश में सभी तीर्थयात्रियों की सलामती की सूचना भेजी थी. अपने संदेश में उन्होंने कहा था कि सभी भारती सुरक्षित बार्डर पहुंच जाएंगे. जबलपुर जिला प्रशासन ने भी आश्वस्त किया था कि जल्द सभी तीर्थयात्री अपने घर पहुंच जाएंगे.
नेपाली सेना ने राशन पहुंचाया, जिससे तीर्थयात्री जीवित रह सके
नेपाल की बाढ़ में चार दिन तक भूखे-प्यासे फंसे रहे डाक्टर राकेश बैहरया ने बताया कि प्राकृतिक आपदा में घिरे उनके परिवार को नेपाली सेना ने उन्हें बिस्किट और राशन का सामान पहुंचाया, जिससे उनका परिवार जीवित रह सका. उन्होंने बताया कि स्थिति बेहद विकट थी और उन दिनों को वे कभी नहीं भूल पाएंगे.

नेपाल में बाढ़ की विभीषिका में फंसे मध्य प्रदेश की तीर्थ यात्री (फाइल फोटो)
मध्य प्रदेश से 27 सितंबर को काठमांडू के लिए रवाना हुए थे तीर्थयात्री
डा. राकेश और उनका परिवार गत 27 सितंबर को काठमांडू के लिए रवाना हुआ था. यात्रा के दौरान सिंधोली के पास भारी बारिश और लैंडस्लाइडिंग के कारण उनकी गाड़ी फंस गई. इस विपरीत परिस्थिति में उनका परिवार 4 दिनों तक बिना भोजन और पानी के फंसा रहा था. डाक्टर बताते हैं कि उनके बच्चों को लूज मोशन हो गया और उनकी मां को बुखार चढ़ गया था, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई थी.
बाढ़ और लैंडस्लाइडिंग ने घर वापसी को चुनौतीपूर्ण बना दिया था
रिपोर्ट के मुताबिक जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना व अतिरिक्त कलेक्टर मीशा सिंह लगातार परिवार से संपर्क में रहे और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया. हालांकि बाढ़ और लैंडस्लाइडिंग से टूटी सड़कों से सभी तीर्थयात्रियों की घरवापसी की यात्रा को चुनौतीपूर्ण बना दिया था.
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Jagran desk
नेपाल में आई बाढ़ की विभीषिका में फंसे रीवा, जबलपुर और डिंडोरी के सभी तीर्थयात्री आज मुस्कुराते चेहरे के साथ सुरक्षित अपने घर वापस लौट गए हैं. करीब 4 दिनों तक नेपाल की बाढ़ में भूखे-प्यासे दिन रहे यात्री गुरूवार सुबह अपने शहर की ओर रवाना किए गए. 

घर सुरक्षित पहुंचाए गए नेपाल ने रेस्क्यु करके लाए गए 17 तीर्थयात्री
भारत बार्डर से रिसीव करने गए अधिकारियों के मुताबिक सभी तीर्थयात्रियों को गोरखपुर रेलवे स्टेशन से अलग-अलग शहरों में रवाना किया गया. घरों तक सुरक्षित पहुंचाए गए कुल 17 तीर्थयात्रियों में डिंडोरी जिले के 7 तीर्थयात्री, रीवा जिले के 4 और जबलपुर जिले के 6 तीर्थयात्री शामिल हैं.
काठमांडु मे स्थित पशुपतिनाथ मंदिर का दर्शन करने गए थे तीर्थयात्री
गौरतलब है भारत बार्डर तक सुरक्षित पहुंचाए गए मध्य प्रदेश के सभी यात्री नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन के लिए गए थे, लेकिन वहां आई बाढ़ में बुरी तरह फंस गए थे और करीब चार दिन तक बाढ़ में भूखे-प्यासे जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे, लेकिन नेपाल सेना और स्थानीय प्रशासन की मदद से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था.
नेपाल में फंसे डाक्टर ने सुरक्षित बचने का भेजा था वीडियो संदेश
नेपाल की बाढ़ में परिवार के 6 सदस्यों के साथ फंसे जबलपुर के डॉक्टर राजेश बारिया ने बुधवार को भेजे एक वीडियो संदेश में सभी तीर्थयात्रियों की सलामती की सूचना भेजी थी. अपने संदेश में उन्होंने कहा था कि सभी भारती सुरक्षित बार्डर पहुंच जाएंगे. जबलपुर जिला प्रशासन ने भी आश्वस्त किया था कि जल्द सभी तीर्थयात्री अपने घर पहुंच जाएंगे.
नेपाली सेना ने राशन पहुंचाया, जिससे तीर्थयात्री जीवित रह सके
नेपाल की बाढ़ में चार दिन तक भूखे-प्यासे फंसे रहे डाक्टर राकेश बैहरया ने बताया कि प्राकृतिक आपदा में घिरे उनके परिवार को नेपाली सेना ने उन्हें बिस्किट और राशन का सामान पहुंचाया, जिससे उनका परिवार जीवित रह सका. उन्होंने बताया कि स्थिति बेहद विकट थी और उन दिनों को वे कभी नहीं भूल पाएंगे.

नेपाल में बाढ़ की विभीषिका में फंसे मध्य प्रदेश की तीर्थ यात्री (फाइल फोटो)
मध्य प्रदेश से 27 सितंबर को काठमांडू के लिए रवाना हुए थे तीर्थयात्री
डा. राकेश और उनका परिवार गत 27 सितंबर को काठमांडू के लिए रवाना हुआ था. यात्रा के दौरान सिंधोली के पास भारी बारिश और लैंडस्लाइडिंग के कारण उनकी गाड़ी फंस गई. इस विपरीत परिस्थिति में उनका परिवार 4 दिनों तक बिना भोजन और पानी के फंसा रहा था. डाक्टर बताते हैं कि उनके बच्चों को लूज मोशन हो गया और उनकी मां को बुखार चढ़ गया था, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई थी.
बाढ़ और लैंडस्लाइडिंग ने घर वापसी को चुनौतीपूर्ण बना दिया था
रिपोर्ट के मुताबिक जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना व अतिरिक्त कलेक्टर मीशा सिंह लगातार परिवार से संपर्क में रहे और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया. हालांकि बाढ़ और लैंडस्लाइडिंग से टूटी सड़कों से सभी तीर्थयात्रियों की घरवापसी की यात्रा को चुनौतीपूर्ण बना दिया था.
