विन्ध्य की गजब परम्परा, नरक में जाने के डर से अंधेरे में नहलाए जाते हैं बच्चे

JAGRAN DESK

विन्ध्य क्षेत्र में नरक चौदस पर बच्चों को अंधेरे में नहलाने की परंपरा है. मान्यता है बच्चे साल भर हष्ट पुष्ट और निरोगी रहते हैं.

जब भी दीपावली का त्योहार आता है तो कुछ दिन पहले से ही लोग अपने घरों में इसकी तैयारी शुरू कर देते हैं. धनतेरस के दिन से ही दीपावली के त्योहार की शुरुआत भी हो जाती है. दीपावली के त्योहार में देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग परंपराएं भी होती हैं. कुछ ऐसी परंपराएं होती हैं, जो सबसे जुदा होती हैं. इन्हीं में से विन्ध्य क्षेत्र की एक परंपरा नरक चौदस के दिन की है. जिसे जानकर आप भी सोचने में मजबूर हो जाएंगे, कि आखिर ऐसा करने की परंपरा क्यों है?

नरक चौदस की अनोखी परंपरा
कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी, रूप चौदस, यम चतुर्दशी, छोटी दीपावली कई अलग-अलग नाम से जाना जाता है. और इस दिन अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग अनोखी परंपराएं भी हैं. इनमें से एक अनोखी परंपरा विन्ध्य क्षेत्र की है, जहां नरक चतुर्दशी के दिन माताएं अपने बच्चों को सूर्योदय से पहले घर के बाहर स्नान करवाती हैं. ताकि बच्चे निरोगी रहें.

विन्ध्य की अनोखी परंपरा
शहडोल जिले के पडनिया गांव के रहने वाले अनिल साहू बताते हैं कि, ''नरक चौदस में विंध्य क्षेत्र की ये सदियों पुरानी परंपरा चली आ रही है. इस परंपरा के तहत नरक चौदस के दिन गजब का उत्साह रहता है. बच्चे इसका साल भर इंतजार करते हैं. इस दिन सभी हिंदू लोग अपने घरों के बाहर स्नान करते हैं. इसके लिए माताएं बहुत तैयारी करती हैं. बच्चों को दातून कराने के लिए रात में ही चकौड़े का दातून लेकर आती हैं. चकौड़े का पौधा और चिड़चिडा का पौधा लेकर आती हैं. आंगन में चूल्हा तैयार किया जाता है, जिस पर पानी को गर्म किया जाता है. हल्के गुनगुने पानी से सुबह-सुबह सूर्योदय से पहले घर के गेट के बाहर लड़का हो या लड़की स्नान कराया जाता है.''

 
Vindhya unique tradition on Diwali
                                                     विन्ध्य क्षेत्र की अनोखी परंपरा 
 

अंधेरे में नहाते हैं बच्चे, आरती के बाद सूर्य देव को प्रणाम
नहलाने से पहले माताएं बच्चों के पूरे शरीर पर तिल के तेल से मालिश करती हैं. जिससे बच्चों को ठंड ना लगे. इसके बाद उन्हें चकौड़े के दातून से दातून कराया जाता है. जहां बच्चा बैठता है वहां चाकोड़ा और चिड़चिड़ा का पौधा रखा जाता है, उसके ऊपर पटा रखा जाता है और वहां बच्चा बैठता है. वहीं दातुन करेगा फिर माताएं हल्के गुनगुने पानी से बच्चे को स्नान कराती हैं. आरती उतारेंगी, टीका लगाएंगी और मीठा खिलाएंगी. फिर बच्चा अंदर आएगा और शरीर में तिल का तेल लगाएगा. कपड़े पहनने के बाद भगवान की पूजा करेगा. सूर्य देव को अर्घ देगा और सूर्य देव को प्रणाम करेगा.

साल भर हष्ट पुष्ट और निरोगी रहता है बच्चा
अनिल साहू, सुधा साहू और कुछ ग्रामीण बताते हैं कि, ''अलग-अलग क्षेत्र में इस परंपरा को निभाने की अलग-अलग मान्यताएं हैं. कुछ लोगों की मान्यता है कि सुबह जब बच्चा स्नान करता है तो साल भर के लिए उसके सारे पाप धुल जाते हैं. साल भर बच्चे के साथ सूर्य देव का आशीर्वाद बना रहता है. जिससे बच्चा साल भर हष्ट पुष्ट और स्वस्थ और निरोगी रहता है.''

स्नान से धुल जाते हैं सभी पाप, खुलते हैं तरक्की के द्वार
नरक चौदस की इस अनोखी परंपरा को लेकर जब पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री से बात की तो उन्होंने बताया कि, ''ये विंध्य क्षेत्र की अनोखी परंपरा है. जैसे-जैसे विन्ध्य क्षेत्र के लोग बाहर जाते जा रहे हैं, तो विन्ध्य क्षेत्र से बाहर भी ये परंपरा अब जा रही है. इस त्यौहार में प्रातः कालीन ब्रह्म मुहूर्त में सूर्योदय से पहले सभी लोग उठते हैं. 20 साल से ऊपर के लोग तालाब में, घर में और कुएं में स्नान करते हैं. फिर सूर्य देव को अर्घ देते हैं, प्रणाम करते हैं और घर आते हैं. वहीं 20 साल से कम उम्र के लोगों को उनकी माताएं घर पर ही बड़े विधि विधान से सूर्योदय से पहले स्नान कराती हैं.'' पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री कहते हैं, ''ऐसी मान्यता है कि नरक चौदस के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने से 84 लाख योनियों में भटकना नहीं पड़ता है. सारे पाप धुल जाते हैं, नरक की यातनाएं नहीं झेलनी पड़ती हैं और साल भर बच्चे की तरक्की होती है, सब कुछ अच्छा अच्छा होता है.''

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30 Oct 2024 By दैनिक जागरण

विन्ध्य की गजब परम्परा, नरक में जाने के डर से अंधेरे में नहलाए जाते हैं बच्चे

JAGRAN DESK

जब भी दीपावली का त्योहार आता है तो कुछ दिन पहले से ही लोग अपने घरों में इसकी तैयारी शुरू कर देते हैं. धनतेरस के दिन से ही दीपावली के त्योहार की शुरुआत भी हो जाती है. दीपावली के त्योहार में देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग परंपराएं भी होती हैं. कुछ ऐसी परंपराएं होती हैं, जो सबसे जुदा होती हैं. इन्हीं में से विन्ध्य क्षेत्र की एक परंपरा नरक चौदस के दिन की है. जिसे जानकर आप भी सोचने में मजबूर हो जाएंगे, कि आखिर ऐसा करने की परंपरा क्यों है?

नरक चौदस की अनोखी परंपरा
कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी, रूप चौदस, यम चतुर्दशी, छोटी दीपावली कई अलग-अलग नाम से जाना जाता है. और इस दिन अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग अनोखी परंपराएं भी हैं. इनमें से एक अनोखी परंपरा विन्ध्य क्षेत्र की है, जहां नरक चतुर्दशी के दिन माताएं अपने बच्चों को सूर्योदय से पहले घर के बाहर स्नान करवाती हैं. ताकि बच्चे निरोगी रहें.

विन्ध्य की अनोखी परंपरा
शहडोल जिले के पडनिया गांव के रहने वाले अनिल साहू बताते हैं कि, ''नरक चौदस में विंध्य क्षेत्र की ये सदियों पुरानी परंपरा चली आ रही है. इस परंपरा के तहत नरक चौदस के दिन गजब का उत्साह रहता है. बच्चे इसका साल भर इंतजार करते हैं. इस दिन सभी हिंदू लोग अपने घरों के बाहर स्नान करते हैं. इसके लिए माताएं बहुत तैयारी करती हैं. बच्चों को दातून कराने के लिए रात में ही चकौड़े का दातून लेकर आती हैं. चकौड़े का पौधा और चिड़चिडा का पौधा लेकर आती हैं. आंगन में चूल्हा तैयार किया जाता है, जिस पर पानी को गर्म किया जाता है. हल्के गुनगुने पानी से सुबह-सुबह सूर्योदय से पहले घर के गेट के बाहर लड़का हो या लड़की स्नान कराया जाता है.''

 
Vindhya unique tradition on Diwali
                                                     विन्ध्य क्षेत्र की अनोखी परंपरा 
 

अंधेरे में नहाते हैं बच्चे, आरती के बाद सूर्य देव को प्रणाम
नहलाने से पहले माताएं बच्चों के पूरे शरीर पर तिल के तेल से मालिश करती हैं. जिससे बच्चों को ठंड ना लगे. इसके बाद उन्हें चकौड़े के दातून से दातून कराया जाता है. जहां बच्चा बैठता है वहां चाकोड़ा और चिड़चिड़ा का पौधा रखा जाता है, उसके ऊपर पटा रखा जाता है और वहां बच्चा बैठता है. वहीं दातुन करेगा फिर माताएं हल्के गुनगुने पानी से बच्चे को स्नान कराती हैं. आरती उतारेंगी, टीका लगाएंगी और मीठा खिलाएंगी. फिर बच्चा अंदर आएगा और शरीर में तिल का तेल लगाएगा. कपड़े पहनने के बाद भगवान की पूजा करेगा. सूर्य देव को अर्घ देगा और सूर्य देव को प्रणाम करेगा.

साल भर हष्ट पुष्ट और निरोगी रहता है बच्चा
अनिल साहू, सुधा साहू और कुछ ग्रामीण बताते हैं कि, ''अलग-अलग क्षेत्र में इस परंपरा को निभाने की अलग-अलग मान्यताएं हैं. कुछ लोगों की मान्यता है कि सुबह जब बच्चा स्नान करता है तो साल भर के लिए उसके सारे पाप धुल जाते हैं. साल भर बच्चे के साथ सूर्य देव का आशीर्वाद बना रहता है. जिससे बच्चा साल भर हष्ट पुष्ट और स्वस्थ और निरोगी रहता है.''

स्नान से धुल जाते हैं सभी पाप, खुलते हैं तरक्की के द्वार
नरक चौदस की इस अनोखी परंपरा को लेकर जब पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री से बात की तो उन्होंने बताया कि, ''ये विंध्य क्षेत्र की अनोखी परंपरा है. जैसे-जैसे विन्ध्य क्षेत्र के लोग बाहर जाते जा रहे हैं, तो विन्ध्य क्षेत्र से बाहर भी ये परंपरा अब जा रही है. इस त्यौहार में प्रातः कालीन ब्रह्म मुहूर्त में सूर्योदय से पहले सभी लोग उठते हैं. 20 साल से ऊपर के लोग तालाब में, घर में और कुएं में स्नान करते हैं. फिर सूर्य देव को अर्घ देते हैं, प्रणाम करते हैं और घर आते हैं. वहीं 20 साल से कम उम्र के लोगों को उनकी माताएं घर पर ही बड़े विधि विधान से सूर्योदय से पहले स्नान कराती हैं.'' पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री कहते हैं, ''ऐसी मान्यता है कि नरक चौदस के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने से 84 लाख योनियों में भटकना नहीं पड़ता है. सारे पाप धुल जाते हैं, नरक की यातनाएं नहीं झेलनी पड़ती हैं और साल भर बच्चे की तरक्की होती है, सब कुछ अच्छा अच्छा होता है.''

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/amazing-tradition-of-vindhya-children-are-bathed-in-darkness-due/article-2373

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