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वैष्णव तिलक में सजे बाबा महाकाल – भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
Ujjain, MP
वैशाख मास की पावन शुक्ल पक्ष एकादशी के शुभ अवसर पर आज तड़के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के कपाट सुबह 4 बजे खोले गए।
विश्वविख्यात बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार आज विशेष रूप से वैष्णव तिलक से किया गया, जिसने भक्तों को एक दिव्य अनुभूति प्रदान की।
ऐसा हुआ दिव्य अभिषेक व श्रृंगार
मंदिर खुलते ही सबसे पहले महाकालेश्वर का जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद व फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की गई। वैष्णव तिलक धारण कर बाबा के मस्तक पर चंद्र और त्रिशूल अर्पित किए गए। इसके बाद चंदन, भांग, आभूषण व सुगंधित फूलों की मालाओं से महाकाल का श्रृंगार हुआ।
🔸 बाबा महाकाल को रजत निर्मित शेषनाग मुकुट, रजत की मुण्डमाला, रुद्राक्ष की माला, और फूलों की दिव्य माला से अलंकृत किया गया। उन्हें भस्म अर्पित की गई और फल-मिष्ठान से भोग लगाया गया।
भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धा का सागर
सुबह की भस्म आरती के दर्शन के लिए सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचे। हर ओर "जय बाबा महाकाल" के जयकारों की गूंज सुनाई दी। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान के समीप अपनी मनोकामनाएं निवेदित कीं और पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगा।
भक्ति से सराबोर रहा संपूर्ण मंदिर परिसर
पूरा मंदिर परिसर आज भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा। फूलों की महक, धूप की सुगंध और मंत्रोच्चारण की ध्वनि ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। महाकाल की भक्ति में लीन श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक अनुभव को अविस्मरणीय बताया।


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वैष्णव तिलक में सजे बाबा महाकाल – भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
Ujjain, MP
विश्वविख्यात बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार आज विशेष रूप से वैष्णव तिलक से किया गया, जिसने भक्तों को एक दिव्य अनुभूति प्रदान की।
ऐसा हुआ दिव्य अभिषेक व श्रृंगार
मंदिर खुलते ही सबसे पहले महाकालेश्वर का जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद व फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की गई। वैष्णव तिलक धारण कर बाबा के मस्तक पर चंद्र और त्रिशूल अर्पित किए गए। इसके बाद चंदन, भांग, आभूषण व सुगंधित फूलों की मालाओं से महाकाल का श्रृंगार हुआ।
🔸 बाबा महाकाल को रजत निर्मित शेषनाग मुकुट, रजत की मुण्डमाला, रुद्राक्ष की माला, और फूलों की दिव्य माला से अलंकृत किया गया। उन्हें भस्म अर्पित की गई और फल-मिष्ठान से भोग लगाया गया।
भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धा का सागर
सुबह की भस्म आरती के दर्शन के लिए सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचे। हर ओर "जय बाबा महाकाल" के जयकारों की गूंज सुनाई दी। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान के समीप अपनी मनोकामनाएं निवेदित कीं और पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगा।
भक्ति से सराबोर रहा संपूर्ण मंदिर परिसर
पूरा मंदिर परिसर आज भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा। फूलों की महक, धूप की सुगंध और मंत्रोच्चारण की ध्वनि ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। महाकाल की भक्ति में लीन श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक अनुभव को अविस्मरणीय बताया।


