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14 मई महाकाल भस्म आरती में चंद्र तिलक और बेलपत्र से हुआ बाबा का श्रृंगार
उज्जैन (म.प्र.)
उज्जैन महाकाल मंदिर में 14 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का चंदन, बेलपत्र और रजत आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार की सुबह ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर बाबा महाकाल की भस्म आरती बड़े श्रद्धा और वैदिक मंत्रों के बीच संपन्न हुई। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए और उसके बाद गर्भगृह में विशेष पूजन की प्रक्रिया शुरू हुई। सुबह से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरा वातावरण “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंजता रहा।
पुजारियों ने मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। पंचामृत, जो दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बना था, से अभिषेक किया गया। बाबा का दिव्य श्रृंगार भांग, चंदन और सुगंधित द्रव्यों से किया गया। उनके मस्तक पर चंद्र तिलक सजाया गया और बेलपत्र अर्पित किए गए। पूजा के बाद पुजारी ने पहले घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया। मंत्रों के बीच भगवान का ध्यान करते हुए विशेष आरती की गई।
भस्म अर्पण की प्रक्रिया में, कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म लगाई गई। फिर बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और विभिन्न पुष्प मालाएं अर्पित की गईं। चंदन और सुगंधित फूलों से किया गया अलंकरण श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहा। सुबह की भस्म आरती में देशभर से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। कई श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं करते नजर आए। मंदिर परिसर में भक्ति का माहौल लंबे समय तक बना रहा और श्रद्धालु लगातार बाबा महाकाल के जयकारे लगाते रहे।
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14 मई महाकाल भस्म आरती में चंद्र तिलक और बेलपत्र से हुआ बाबा का श्रृंगार
उज्जैन (म.प्र.)
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार की सुबह ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर बाबा महाकाल की भस्म आरती बड़े श्रद्धा और वैदिक मंत्रों के बीच संपन्न हुई। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए और उसके बाद गर्भगृह में विशेष पूजन की प्रक्रिया शुरू हुई। सुबह से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरा वातावरण “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंजता रहा।
पुजारियों ने मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। पंचामृत, जो दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बना था, से अभिषेक किया गया। बाबा का दिव्य श्रृंगार भांग, चंदन और सुगंधित द्रव्यों से किया गया। उनके मस्तक पर चंद्र तिलक सजाया गया और बेलपत्र अर्पित किए गए। पूजा के बाद पुजारी ने पहले घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया। मंत्रों के बीच भगवान का ध्यान करते हुए विशेष आरती की गई।
भस्म अर्पण की प्रक्रिया में, कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म लगाई गई। फिर बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और विभिन्न पुष्प मालाएं अर्पित की गईं। चंदन और सुगंधित फूलों से किया गया अलंकरण श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहा। सुबह की भस्म आरती में देशभर से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। कई श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं करते नजर आए। मंदिर परिसर में भक्ति का माहौल लंबे समय तक बना रहा और श्रद्धालु लगातार बाबा महाकाल के जयकारे लगाते रहे।
