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भोपाल से डबरा तक फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क, थाने पहुंचने से पहले मिल जाती थी आवेदन की खबर
भोपाल (म.प्र.)
विदेश मंत्रालय की 2023 की चेतावनी के बाद भी जारी रहा खेल; एक ही भोपाली पते से 40 संदिग्ध पासपोर्ट, मास्टरमाइंड के भी 4 पासपोर्ट
मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट तैयार कराने वाले कथित नेटवर्क की जांच में भोपाल से डबरा तक कड़ियां जुड़ती दिखाई दे रही हैं। जांच में सामने आया है कि एक ही पते से बड़ी संख्या में पासपोर्ट आवेदन किए गए थे। मामले में अहम जानकारी यह है कि विदेश मंत्रालय ने 2023 में मध्य प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने को लेकर पुलिस मुख्यालय को अलर्ट किया था। उस समय करीब 70 संदिग्ध फर्जी पासपोर्ट सामने आए थे, जिनकी संख्या बाद में 100 से ज्यादा होने की आशंका जताई गई।
एक पते से बने 40 पासपोर्ट
जांच में भोपाल के गोविंदपुरा इलाके के एक पते का इस्तेमाल करीब 40 पासपोर्ट तैयार कराने में किए जाने की बात सामने आई है। आवेदन संबंधित जिलों में पुलिस वेरिफिकेशन के लिए भेजे जाते थे, जहां डबरा में जांच के दौरान गड़बड़ी पकड़ में आई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि एक ही पते से इतने आवेदन आने के बावजूद दस्तावेज और पते का सत्यापन कैसे किया गया।
आवेदन से पहले थाने में पहुंच जाती थी सूचना
जांच में यह भी सामने आया है कि संदिग्ध पासपोर्ट आवेदन डबरा थाने पहुंचने से पहले ही वहां फोन कर दिए जाते थे। कथित तौर पर कहा जाता था कि आवेदन जरूरी है और इसे जल्दी निपटाना है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आवेदन की जानकारी पहले से किसे होती थी और कौन लोग इस प्रक्रिया में मदद कर रहे थे।
डबरा से खुला नेटवर्क
डबरा में हुए पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान फर्जीवाड़े की परतें खुलीं। जांच में दस्तावेजों और दिए गए पते को लेकर गड़बड़ियां सामने आईं। मामले में कथित मास्टरमाइंड रियाल चौधरी की भूमिका भी जांच के घेरे में है। जांच में उसके नाम से चार पासपोर्ट मिलने की बात सामने आई है, जिनमें फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का संदेह है। एसपी राजेश भदौरिया के अनुसार, रियाल से पूछताछ के बाद पांच पुलिस टीमें अलग-अलग जगहों पर भेजी गई हैं। टीमें नेटवर्क से जुड़े लोगों और उनके संपर्कों की जांच कर रही हैं।
पहले भी सामने आए मामले
फर्जी भारतीय दस्तावेजों के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान बनाने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। 2025 में भोपाल के कोलार इलाके में दो बांग्लादेशी भाइयों के फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट मामले का खुलासा हुआ था। वहीं, पश्चिम बंगाल में भी बड़ी संख्या में फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने का मामला सामने आया था। मौजूदा जांच में पुलिस फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों के साथ-साथ वेरिफिकेशन प्रक्रिया से जुड़े लोगों और स्थानीय बिचौलियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
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