ट्विशा केस में जांच तेज, जेल में मिलीं गिरिबाला सिंह; CBI को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

भोपाल,(म.प्र.)

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महिला आयोग ने भोपाल सेंट्रल जेल में की मुलाकात, मेडिकल और डिजिटल सबूतों की कड़ियां जोड़ने में जुटी CBI

भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। एक ओर जहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मेडिकल, डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को खंगाल रही है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश महिला आयोग की टीम ने भोपाल सेंट्रल जेल पहुंचकर मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह से मुलाकात की। जेल में हुई इस मुलाकात के दौरान गिरिबाला सिंह शांत नजर आईं और उन्होंने किसी तरह की परेशानी होने से इनकार किया।

महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जेल में महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर और अन्य सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसी दौरान गिरिबाला सिंह पुस्तकालय में देवदत्त पटनायक की चर्चित पुस्तक ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ती हुई मिलीं। बताया गया कि आयोग की टीम को देखते ही उन्होंने किताब बंद कर दी। बातचीत के दौरान आयोग ने उनके स्वास्थ्य, भोजन और जेल की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। गिरिबाला सिंह ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं है और जेल में सभी व्यवस्थाएं सामान्य हैं।

महिला आयोग ने भी अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि गिरिबाला सिंह को जेल में विशेष सुविधा या वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा हो। हालांकि इस मामले को लेकर पहले से ऐसे आरोप लगते रहे हैं, जिसके बाद जेल प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम बढ़ा दिए हैं।

उधर, ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच कर रही CBI को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिल गई है। जांच एजेंसी अब इस रिपोर्ट का मिलान पहले से उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड और फोरेंसिक तथ्यों से कर रही है। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी विशेष रूप से प्रेग्नेंसी, कथित अबॉर्शन, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी से जुड़े सबूतों की पड़ताल कर रही है।

CBI की जांच का एक अहम हिस्सा डिजिटल सबूत भी हैं। एजेंसी मोबाइल फोन, लैपटॉप, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, फोटो, वीडियो और डिलीट किए गए डेटा की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल जानकारी मामले की पूरी घटनाक्रम को समझने और विभिन्न दावों की पुष्टि करने में मदद कर सकती है।

इस बीच ट्विशा के परिवार की ओर से लगातार जांच में शुरुआती स्तर पर हुई कथित चूकों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। परिवार के वकील अंकुर पांडे का कहना है कि घटनास्थल से जब्त किए गए सबूतों और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उनका आरोप है कि जिस रस्सी या बेल्ट को मामले में अहम सबूत माना गया, उसकी जब्ती प्रक्रिया में कई कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

वकील के अनुसार, घटनास्थल की तस्वीरों में दो अलग-अलग स्थानों पर दो बेल्ट दिखाई दे रही थीं, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में केवल एक बेल्ट की जब्ती का उल्लेख किया गया। इसके अलावा जिस व्यक्ति ने उस बेल्ट या रस्सी की पहचान की, उसका नाम भी दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया। परिवार का दावा है कि ऐसी खामियां जांच को प्रभावित कर सकती हैं।

मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल उन दस्तावेजों को लेकर उठाया गया है जो कथित तौर पर केस डायरी का हिस्सा थे। ट्विशा के परिवार के वकील का आरोप है कि जांच से जुड़े कुछ दस्तावेज आरोपियों तक समय से पहले पहुंच गए थे, जिससे उन्हें कानूनी रणनीति बनाने में मदद मिली। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी जांच एजेंसी की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

CBI अब शुरुआती जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों से भी दोबारा पूछताछ की तैयारी कर रही है। विशेष रूप से उस पुलिस अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं जिसने घटनास्थल का निरीक्षण किया था और सबूतों की जब्ती की प्रक्रिया पूरी की थी। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि जांच के शुरुआती चरण में कहीं कोई लापरवाही या प्रक्रिया संबंधी त्रुटि तो नहीं हुई।

मामले में ट्विशा की मानसिक स्थिति को लेकर भी जांच जारी है। गिरिबाला सिंह की ओर से अदालत में कुछ मेडिकल दस्तावेज पेश किए गए थे, जिनमें दावा किया गया था कि ट्विशा मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। अब CBI इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है। इसी सिलसिले में मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी से भी पूछताछ की गई है।

जेल प्रशासन के लिए भी यह मामला संवेदनशील बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान जिन आरोपियों को सजा सुनाई थी, उनमें से कई वर्तमान में भोपाल सेंट्रल जेल में बंद हैं। इसी वजह से उनकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। जेल परिसर में निगरानी बढ़ाई गई है और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। पूरे मामले में CBI विभिन्न सबूतों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों को जोड़कर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है। दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच के अगले चरण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है 

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11 Jun 2026 By Vaishnavi.J

ट्विशा केस में जांच तेज, जेल में मिलीं गिरिबाला सिंह; CBI को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

भोपाल,(म.प्र.)

भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। एक ओर जहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मेडिकल, डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को खंगाल रही है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश महिला आयोग की टीम ने भोपाल सेंट्रल जेल पहुंचकर मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह से मुलाकात की। जेल में हुई इस मुलाकात के दौरान गिरिबाला सिंह शांत नजर आईं और उन्होंने किसी तरह की परेशानी होने से इनकार किया।

महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जेल में महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर और अन्य सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसी दौरान गिरिबाला सिंह पुस्तकालय में देवदत्त पटनायक की चर्चित पुस्तक ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ती हुई मिलीं। बताया गया कि आयोग की टीम को देखते ही उन्होंने किताब बंद कर दी। बातचीत के दौरान आयोग ने उनके स्वास्थ्य, भोजन और जेल की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। गिरिबाला सिंह ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं है और जेल में सभी व्यवस्थाएं सामान्य हैं।

महिला आयोग ने भी अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि गिरिबाला सिंह को जेल में विशेष सुविधा या वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा हो। हालांकि इस मामले को लेकर पहले से ऐसे आरोप लगते रहे हैं, जिसके बाद जेल प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम बढ़ा दिए हैं।

उधर, ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच कर रही CBI को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिल गई है। जांच एजेंसी अब इस रिपोर्ट का मिलान पहले से उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड और फोरेंसिक तथ्यों से कर रही है। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी विशेष रूप से प्रेग्नेंसी, कथित अबॉर्शन, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी से जुड़े सबूतों की पड़ताल कर रही है।

CBI की जांच का एक अहम हिस्सा डिजिटल सबूत भी हैं। एजेंसी मोबाइल फोन, लैपटॉप, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, फोटो, वीडियो और डिलीट किए गए डेटा की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल जानकारी मामले की पूरी घटनाक्रम को समझने और विभिन्न दावों की पुष्टि करने में मदद कर सकती है।

इस बीच ट्विशा के परिवार की ओर से लगातार जांच में शुरुआती स्तर पर हुई कथित चूकों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। परिवार के वकील अंकुर पांडे का कहना है कि घटनास्थल से जब्त किए गए सबूतों और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उनका आरोप है कि जिस रस्सी या बेल्ट को मामले में अहम सबूत माना गया, उसकी जब्ती प्रक्रिया में कई कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

वकील के अनुसार, घटनास्थल की तस्वीरों में दो अलग-अलग स्थानों पर दो बेल्ट दिखाई दे रही थीं, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में केवल एक बेल्ट की जब्ती का उल्लेख किया गया। इसके अलावा जिस व्यक्ति ने उस बेल्ट या रस्सी की पहचान की, उसका नाम भी दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया। परिवार का दावा है कि ऐसी खामियां जांच को प्रभावित कर सकती हैं।

मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल उन दस्तावेजों को लेकर उठाया गया है जो कथित तौर पर केस डायरी का हिस्सा थे। ट्विशा के परिवार के वकील का आरोप है कि जांच से जुड़े कुछ दस्तावेज आरोपियों तक समय से पहले पहुंच गए थे, जिससे उन्हें कानूनी रणनीति बनाने में मदद मिली। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी जांच एजेंसी की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

CBI अब शुरुआती जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों से भी दोबारा पूछताछ की तैयारी कर रही है। विशेष रूप से उस पुलिस अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं जिसने घटनास्थल का निरीक्षण किया था और सबूतों की जब्ती की प्रक्रिया पूरी की थी। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि जांच के शुरुआती चरण में कहीं कोई लापरवाही या प्रक्रिया संबंधी त्रुटि तो नहीं हुई।

मामले में ट्विशा की मानसिक स्थिति को लेकर भी जांच जारी है। गिरिबाला सिंह की ओर से अदालत में कुछ मेडिकल दस्तावेज पेश किए गए थे, जिनमें दावा किया गया था कि ट्विशा मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। अब CBI इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है। इसी सिलसिले में मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी से भी पूछताछ की गई है।

जेल प्रशासन के लिए भी यह मामला संवेदनशील बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान जिन आरोपियों को सजा सुनाई थी, उनमें से कई वर्तमान में भोपाल सेंट्रल जेल में बंद हैं। इसी वजह से उनकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। जेल परिसर में निगरानी बढ़ाई गई है और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। पूरे मामले में CBI विभिन्न सबूतों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों को जोड़कर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है। दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच के अगले चरण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है 

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