कोचिंग संस्थानों को निगम का 48 घंटे का अल्टीमेटम, शपथ पत्र नहीं दिया तो 10 जुलाई से होगी सीलिंग

भोपाल,(म.प्र.)

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फायर सेफ्टी नियमों के पालन को लेकर नगर निगम सख्त, 69 कोचिंग संस्थानों को 30 दिन में सभी सुरक्षा इंतजाम पूरे करने के निर्देश; लापरवाही पर कार्रवाई तय।

छात्रों की सुरक्षा को लेकर नगर निगम ने शहर के कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय अटल भवन में अपर आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में 70 से अधिक कोचिंग संचालकों और भवन स्वामियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि तय समय सीमा के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया तो 10 जुलाई से संस्थानों को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सीधे कार्रवाई होगी।

नगर निगम ने शहर के 69 कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अगले 48 घंटे के भीतर, यानी 9 जुलाई की शाम तक 200 रुपए के न्यायिक स्टाम्प पर शपथ पत्र प्रस्तुत करें। इस शपथ पत्र में यह लिखित आश्वासन देना होगा कि संबंधित संस्थान अगले 30 दिनों के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े सभी आवश्यक प्रबंध पूरे कर देंगे। इसके साथ ही कोचिंग संचालकों को 15 दिन के भीतर यह भी बताना होगा कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब तक क्या-क्या काम किए गए हैं और आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने साफ कहा कि यदि निर्धारित समय में शपथ पत्र जमा नहीं किया गया या सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमी पाई गई तो बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के दौरान कई कोचिंग संचालकों ने यह तर्क दिया कि जिस भवन में वे संस्थान चला रहे हैं, वह उनकी निजी संपत्ति नहीं है और भवन मालिकों की जिम्मेदारी है कि वे फायर सेफ्टी के इंतजाम करें। इस पर नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया कि छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल भवन स्वामी पर नहीं छोड़ी जा सकती। निगम के अधिकारियों ने कहा कि चाहे भवन किराए का हो या स्वयं का, कोचिंग संस्थान संचालकों को ही फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने और उसका खर्च वहन करना होगा। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैठक में कोचिंग संस्थानों के लिए लगभग 20 बिंदुओं वाली सुरक्षा गाइडलाइन का पालन अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए। इनमें सबसे प्रमुख निर्देश यह है कि किसी भी भवन में ऑटोमैटिक लॉक वाले दरवाजे नहीं लगाए जाएंगे। सभी भवनों में कम से कम दो आपातकालीन निकास द्वार होना अनिवार्य रहेगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में छात्र और कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकल सकें। इन निकास मार्गों के आसपास किसी भी प्रकार का ज्वलनशील पदार्थ, विद्युत उपकरण या अन्य अवरोधक सामग्री नहीं रखी जाएगी।

नगर निगम ने बेसमेंट के उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। गाइडलाइन के अनुसार बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोर के रूप में ही किया जा सकेगा। यदि किसी भवन का बेसमेंट 200 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल का है तो वहां स्वचालित स्प्रिंकलर सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा भवनों में लगाए गए फायर पंपों को इस तरह जोड़ा जाएगा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी वे जनरेटर की बायपास लाइन के माध्यम से लगातार काम करते रहें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जनरेटर को किसी भी स्थिति में निकास मार्ग या रिफ्यूज एरिया में नहीं रखा जाएगा।

सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने नियमित फायर ऑडिट और विद्युत ऑडिट को भी अनिवार्य किया है। प्रत्येक वर्ष भवन का फायर ऑडिट और इलेक्ट्रिकल ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट निगम को सौंपनी होगी। इसके साथ ही हर चार महीने में विद्यार्थियों और स्टाफ के लिए मॉक ड्रिल आयोजित करना भी जरूरी होगा। संस्थान के कर्मचारियों को अग्निशमन यंत्र चलाने का प्रशिक्षण देना होगा, जबकि सुरक्षा गार्ड को हाइड्रेंट सिस्टम के संचालन की जानकारी होना आवश्यक होगा। निगम का मानना है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सही उपयोग भी सभी संबंधित लोगों को आना चाहिए।

नगर निगम का कहना है कि हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में कोचिंग संस्थानों और शैक्षणिक भवनों में आग लगने जैसी घटनाओं ने सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में शहर के सभी कोचिंग संस्थानों में समय रहते आवश्यक सुधार कराना जरूरी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी संस्था को परेशान करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है। आने वाले दिनों में निरीक्षण अभियान और तेज किया जाएगा तथा जिन संस्थानों में नियमों का पालन नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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08 Jul 2026 By Vaishnavi.J

कोचिंग संस्थानों को निगम का 48 घंटे का अल्टीमेटम, शपथ पत्र नहीं दिया तो 10 जुलाई से होगी सीलिंग

भोपाल,(म.प्र.)

छात्रों की सुरक्षा को लेकर नगर निगम ने शहर के कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय अटल भवन में अपर आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में 70 से अधिक कोचिंग संचालकों और भवन स्वामियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि तय समय सीमा के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया तो 10 जुलाई से संस्थानों को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सीधे कार्रवाई होगी।

नगर निगम ने शहर के 69 कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अगले 48 घंटे के भीतर, यानी 9 जुलाई की शाम तक 200 रुपए के न्यायिक स्टाम्प पर शपथ पत्र प्रस्तुत करें। इस शपथ पत्र में यह लिखित आश्वासन देना होगा कि संबंधित संस्थान अगले 30 दिनों के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े सभी आवश्यक प्रबंध पूरे कर देंगे। इसके साथ ही कोचिंग संचालकों को 15 दिन के भीतर यह भी बताना होगा कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब तक क्या-क्या काम किए गए हैं और आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने साफ कहा कि यदि निर्धारित समय में शपथ पत्र जमा नहीं किया गया या सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमी पाई गई तो बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के दौरान कई कोचिंग संचालकों ने यह तर्क दिया कि जिस भवन में वे संस्थान चला रहे हैं, वह उनकी निजी संपत्ति नहीं है और भवन मालिकों की जिम्मेदारी है कि वे फायर सेफ्टी के इंतजाम करें। इस पर नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया कि छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल भवन स्वामी पर नहीं छोड़ी जा सकती। निगम के अधिकारियों ने कहा कि चाहे भवन किराए का हो या स्वयं का, कोचिंग संस्थान संचालकों को ही फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने और उसका खर्च वहन करना होगा। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैठक में कोचिंग संस्थानों के लिए लगभग 20 बिंदुओं वाली सुरक्षा गाइडलाइन का पालन अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए। इनमें सबसे प्रमुख निर्देश यह है कि किसी भी भवन में ऑटोमैटिक लॉक वाले दरवाजे नहीं लगाए जाएंगे। सभी भवनों में कम से कम दो आपातकालीन निकास द्वार होना अनिवार्य रहेगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में छात्र और कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकल सकें। इन निकास मार्गों के आसपास किसी भी प्रकार का ज्वलनशील पदार्थ, विद्युत उपकरण या अन्य अवरोधक सामग्री नहीं रखी जाएगी।

नगर निगम ने बेसमेंट के उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। गाइडलाइन के अनुसार बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोर के रूप में ही किया जा सकेगा। यदि किसी भवन का बेसमेंट 200 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल का है तो वहां स्वचालित स्प्रिंकलर सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा भवनों में लगाए गए फायर पंपों को इस तरह जोड़ा जाएगा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी वे जनरेटर की बायपास लाइन के माध्यम से लगातार काम करते रहें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जनरेटर को किसी भी स्थिति में निकास मार्ग या रिफ्यूज एरिया में नहीं रखा जाएगा।

सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने नियमित फायर ऑडिट और विद्युत ऑडिट को भी अनिवार्य किया है। प्रत्येक वर्ष भवन का फायर ऑडिट और इलेक्ट्रिकल ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट निगम को सौंपनी होगी। इसके साथ ही हर चार महीने में विद्यार्थियों और स्टाफ के लिए मॉक ड्रिल आयोजित करना भी जरूरी होगा। संस्थान के कर्मचारियों को अग्निशमन यंत्र चलाने का प्रशिक्षण देना होगा, जबकि सुरक्षा गार्ड को हाइड्रेंट सिस्टम के संचालन की जानकारी होना आवश्यक होगा। निगम का मानना है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सही उपयोग भी सभी संबंधित लोगों को आना चाहिए।

नगर निगम का कहना है कि हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में कोचिंग संस्थानों और शैक्षणिक भवनों में आग लगने जैसी घटनाओं ने सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में शहर के सभी कोचिंग संस्थानों में समय रहते आवश्यक सुधार कराना जरूरी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी संस्था को परेशान करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है। आने वाले दिनों में निरीक्षण अभियान और तेज किया जाएगा तथा जिन संस्थानों में नियमों का पालन नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a4dd98f78cd2/article-58148

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