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मानसून से पहले भोपाल निगम परिषद की बैठक, जलभराव और पानी के मुद्दे पर हंगामे के आसार
भोपाल,(म.प्र.)
विशेष बैठक में केवल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एजेंडा शामिल, जबकि कांग्रेस पार्षद शहर की सड़कों, जलभराव और पेयजल संकट पर चर्चा की मांग करेंगे।
भोपाल नगर निगम परिषद की विशेष बैठक मंगलवार को होने जा रही है, लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही इसके राजनीतिक और प्रशासनिक मायने चर्चा में आ गए हैं। नगर निगम की ओर से जारी एजेंडे में केवल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और उससे जुड़े नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन का विषय शामिल किया गया है। दूसरी तरफ विपक्षी कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि मानसून सिर पर है और ऐसे समय में शहर के सबसे बड़े और सीधे जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होना ज्यादा जरूरी है। इसी वजह से परिषद की बैठक के दौरान तीखी बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है।
भोपाल में पिछले कुछ दिनों से पेयजल आपूर्ति की समस्या लगातार सामने आ रही है। शहर के कई हिस्सों में नर्मदा और कोलार परियोजना की पाइप लाइनों में लीकेज की शिकायतें मिल रही हैं। कई इलाकों के लोगों को पानी की सप्लाई बाधित होने के कारण एक-दो दिन नहीं बल्कि कई-कई दिन तक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत पहले ही बड़ी समस्या बनी हुई है और मानसून आने से पहले इसका स्थायी समाधान तलाशना जरूरी है।
कांग्रेस पार्षदों का आरोप है कि परिषद की बैठक में ऐसे मुद्दों को एजेंडे से बाहर रखा गया है, जिनका सीधा संबंध आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी से है। उनका कहना है कि थोड़ी सी बारिश होते ही भोपाल के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन जाती है। कुछ दिन पहले हुई तेज बारिश के दौरान कई क्षेत्रों में नालों के चोक होने की शिकायतें सामने आई थीं। महामाई का बाग क्षेत्र में जल निकासी प्रभावित होने से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी थी। ऐसे में विपक्ष का तर्क है कि मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा की जानी चाहिए।
सिर्फ जलभराव ही नहीं, शहर की सड़कों की हालत भी परिषद की बैठक में उठने वाला प्रमुख मुद्दा बन सकती है। कई वार्डों में सड़कें उखड़ी हुई हैं और गड्ढों की समस्या लगातार बनी हुई है। बरसात शुरू होने के बाद ये परेशानी और बढ़ सकती है। पार्षदों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और रखरखाव का काम नहीं हुआ तो लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। यही वजह है कि विपक्ष मानसून पूर्व तैयारियों का पूरा ब्योरा परिषद के सामने रखने की मांग कर रहा है।
इस बैठक की एक और खास बात यह है कि नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी इसमें शामिल नहीं हो पाएंगी। पारिवारिक कारणों से उनके मुंबई में होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने नगर निगम अध्यक्ष को पत्र लिखकर बैठक में अनुपस्थित रहने की सूचना दी है और अपनी जगह वार्ड-16 के पार्षद मो. सरवर को प्रतिनिधि के रूप में नामित करने का अनुरोध किया था। अनुमति मिलने के बाद अब परिषद की बैठक में विपक्ष की ओर से मो. सरवर मुख्य भूमिका निभाएंगे। इसके साथ उन मुद्दों को भी उठाया जाना चाहिए जो सीधे जनता से जुड़े हुए हैं। उनके मुताबिक पानी, जलभराव और सड़कों की स्थिति फिलहाल शहर के सबसे महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि विपक्ष इन मामलों को मजबूती से परिषद के सामने रखेगा और नगर निगम प्रशासन से जवाब मांगेगा।
उधर नगर निगम प्रशासन का कहना है कि यह विशेष बैठक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के निर्देशों के तहत आयोजित की जा रही है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विभाग ने सभी नगरीय निकायों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विशेष अभियान चलाने और बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए थे। भोपाल नगर निगम में यह बैठक 9 जून को आयोजित की जा रही है, जिसमें कचरा प्रबंधन व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर चर्चा की जाएगी।
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मानसून से पहले भोपाल निगम परिषद की बैठक, जलभराव और पानी के मुद्दे पर हंगामे के आसार
भोपाल,(म.प्र.)
भोपाल नगर निगम परिषद की विशेष बैठक मंगलवार को होने जा रही है, लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही इसके राजनीतिक और प्रशासनिक मायने चर्चा में आ गए हैं। नगर निगम की ओर से जारी एजेंडे में केवल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और उससे जुड़े नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन का विषय शामिल किया गया है। दूसरी तरफ विपक्षी कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि मानसून सिर पर है और ऐसे समय में शहर के सबसे बड़े और सीधे जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होना ज्यादा जरूरी है। इसी वजह से परिषद की बैठक के दौरान तीखी बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है।
भोपाल में पिछले कुछ दिनों से पेयजल आपूर्ति की समस्या लगातार सामने आ रही है। शहर के कई हिस्सों में नर्मदा और कोलार परियोजना की पाइप लाइनों में लीकेज की शिकायतें मिल रही हैं। कई इलाकों के लोगों को पानी की सप्लाई बाधित होने के कारण एक-दो दिन नहीं बल्कि कई-कई दिन तक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत पहले ही बड़ी समस्या बनी हुई है और मानसून आने से पहले इसका स्थायी समाधान तलाशना जरूरी है।
कांग्रेस पार्षदों का आरोप है कि परिषद की बैठक में ऐसे मुद्दों को एजेंडे से बाहर रखा गया है, जिनका सीधा संबंध आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी से है। उनका कहना है कि थोड़ी सी बारिश होते ही भोपाल के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन जाती है। कुछ दिन पहले हुई तेज बारिश के दौरान कई क्षेत्रों में नालों के चोक होने की शिकायतें सामने आई थीं। महामाई का बाग क्षेत्र में जल निकासी प्रभावित होने से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी थी। ऐसे में विपक्ष का तर्क है कि मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा की जानी चाहिए।
सिर्फ जलभराव ही नहीं, शहर की सड़कों की हालत भी परिषद की बैठक में उठने वाला प्रमुख मुद्दा बन सकती है। कई वार्डों में सड़कें उखड़ी हुई हैं और गड्ढों की समस्या लगातार बनी हुई है। बरसात शुरू होने के बाद ये परेशानी और बढ़ सकती है। पार्षदों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और रखरखाव का काम नहीं हुआ तो लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। यही वजह है कि विपक्ष मानसून पूर्व तैयारियों का पूरा ब्योरा परिषद के सामने रखने की मांग कर रहा है।
इस बैठक की एक और खास बात यह है कि नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी इसमें शामिल नहीं हो पाएंगी। पारिवारिक कारणों से उनके मुंबई में होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने नगर निगम अध्यक्ष को पत्र लिखकर बैठक में अनुपस्थित रहने की सूचना दी है और अपनी जगह वार्ड-16 के पार्षद मो. सरवर को प्रतिनिधि के रूप में नामित करने का अनुरोध किया था। अनुमति मिलने के बाद अब परिषद की बैठक में विपक्ष की ओर से मो. सरवर मुख्य भूमिका निभाएंगे। इसके साथ उन मुद्दों को भी उठाया जाना चाहिए जो सीधे जनता से जुड़े हुए हैं। उनके मुताबिक पानी, जलभराव और सड़कों की स्थिति फिलहाल शहर के सबसे महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि विपक्ष इन मामलों को मजबूती से परिषद के सामने रखेगा और नगर निगम प्रशासन से जवाब मांगेगा।
उधर नगर निगम प्रशासन का कहना है कि यह विशेष बैठक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के निर्देशों के तहत आयोजित की जा रही है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विभाग ने सभी नगरीय निकायों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विशेष अभियान चलाने और बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए थे। भोपाल नगर निगम में यह बैठक 9 जून को आयोजित की जा रही है, जिसमें कचरा प्रबंधन व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर चर्चा की जाएगी।
