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भोपाल मेट्रो 24-25 जून को रहेगी बंद, सिग्नलिंग जांच के बाद बदलेगा शेड्यूल
Digital Desk
भोपाल मेट्रो 24 और 25 जून को बंद रहेगी। CMRS सिग्नलिंग सिस्टम का निरीक्षण करेगी, जिसके बाद नई टाइमिंग और फ्रीक्वेंसी तय हो सकती है।
भोपाल मेट्रो के यात्रियों को 24 और 25 जून को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। शहर में मेट्रो सेवा दो दिनों के लिए बंद रहेगी क्योंकि कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर स्थापित नए सिग्नलिंग सिस्टम का निरीक्षण और परीक्षण करेंगे। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, सुरक्षा और तकनीकी परीक्षण पूरा होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर संचालन संबंधी अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि सिस्टम को मंजूरी मिलती है तो जुलाई से मेट्रो का नया शेड्यूल और टाइमिंग लागू किए जाने की संभावना है।
वर्तमान में भोपाल मेट्रो सीमित क्षमता के साथ संचालित हो रही है। सुभाष नगर से एम्स तक लगभग 7 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर मेट्रो सेवा उपलब्ध है, लेकिन सिग्नलिंग सिस्टम के अभाव में ट्रेनें केवल एक ट्रैक पर संचालित की जा रही हैं। इसी वजह से यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और मेट्रो की फ्रीक्वेंसी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।
मेट्रो प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद 26 जून से सेवाएं फिर से शुरू कर दी जाएंगी। हालांकि यात्रियों को नई समय-सारिणी और परिचालन व्यवस्था के लिए जुलाई तक इंतजार करना पड़ सकता है।
क्यों अहम है सिग्नलिंग सिस्टम
विशेषज्ञों के अनुसार, सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। यही तकनीक ट्रेनों की गति, उनके बीच सुरक्षित दूरी और संचालन की समग्र दक्षता को नियंत्रित करती है। इसके माध्यम से मेट्रो नेटवर्क में दोनों ट्रैक का प्रभावी उपयोग संभव हो पाता है।
फिलहाल भोपाल मेट्रो में ट्रेनें डाउन ट्रैक पर ही दोनों दिशाओं में संचालित की जा रही हैं। यानी एक ही ट्रैक पर ट्रेन आगे बढ़ती है और उसी मार्ग से वापस लौटती है। इससे परिचालन क्षमता सीमित रहती है और यात्रियों को अधिक समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
यात्रियों को मिलेगा फायदा
मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, नए सिग्नलिंग सिस्टम के लागू होने के बाद दोनों ट्रैक पर एक साथ ट्रेन संचालन शुरू किया जा सकेगा। इससे ट्रेनों के बीच का अंतर कम होगा और फेरे बढ़ाए जा सकेंगे। वर्तमान में करीब 75 मिनट की फ्रीक्वेंसी को घटाकर अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
नई व्यवस्था लागू होने पर सुबह और शाम के व्यस्त समय में भी मेट्रो सेवाएं उपलब्ध कराने का रास्ता खुलेगा। इससे कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और नियमित यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं में आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जो देश के प्रमुख मेट्रो नेटवर्कों में उपयोग होने वाली प्रणालियों के अनुरूप है। अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक परिचालन सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ यात्रियों के लिए बेहतर और तेज़ सेवा सुनिश्चित करेगी।
फिलहाल यात्रियों को 24 और 25 जून को वैकल्पिक परिवहन साधनों का उपयोग करना होगा। मेट्रो प्रबंधन को उम्मीद है कि CMRS निरीक्षण के बाद मिलने वाली मंजूरी से परियोजना के अगले चरण को गति मिलेगी और राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सकेगी। आज की ताज़ा ख़बरें, भारत समाचार अपडेट और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह विकास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भोपाल मेट्रो के यात्रियों को 24 और 25 जून को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। शहर में मेट्रो सेवा दो दिनों के लिए बंद रहेगी क्योंकि कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर स्थापित नए सिग्नलिंग सिस्टम का निरीक्षण और परीक्षण करेंगे। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, सुरक्षा और तकनीकी परीक्षण पूरा होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर संचालन संबंधी अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि सिस्टम को मंजूरी मिलती है तो जुलाई से मेट्रो का नया शेड्यूल और टाइमिंग लागू किए जाने की संभावना है।
वर्तमान में भोपाल मेट्रो सीमित क्षमता के साथ संचालित हो रही है। सुभाष नगर से एम्स तक लगभग 7 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर मेट्रो सेवा उपलब्ध है, लेकिन सिग्नलिंग सिस्टम के अभाव में ट्रेनें केवल एक ट्रैक पर संचालित की जा रही हैं। इसी वजह से यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और मेट्रो की फ्रीक्वेंसी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।
मेट्रो प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद 26 जून से सेवाएं फिर से शुरू कर दी जाएंगी। हालांकि यात्रियों को नई समय-सारिणी और परिचालन व्यवस्था के लिए जुलाई तक इंतजार करना पड़ सकता है।
क्यों अहम है सिग्नलिंग सिस्टम
विशेषज्ञों के अनुसार, सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। यही तकनीक ट्रेनों की गति, उनके बीच सुरक्षित दूरी और संचालन की समग्र दक्षता को नियंत्रित करती है। इसके माध्यम से मेट्रो नेटवर्क में दोनों ट्रैक का प्रभावी उपयोग संभव हो पाता है।
फिलहाल भोपाल मेट्रो में ट्रेनें डाउन ट्रैक पर ही दोनों दिशाओं में संचालित की जा रही हैं। यानी एक ही ट्रैक पर ट्रेन आगे बढ़ती है और उसी मार्ग से वापस लौटती है। इससे परिचालन क्षमता सीमित रहती है और यात्रियों को अधिक समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
यात्रियों को मिलेगा फायदा
मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, नए सिग्नलिंग सिस्टम के लागू होने के बाद दोनों ट्रैक पर एक साथ ट्रेन संचालन शुरू किया जा सकेगा। इससे ट्रेनों के बीच का अंतर कम होगा और फेरे बढ़ाए जा सकेंगे। वर्तमान में करीब 75 मिनट की फ्रीक्वेंसी को घटाकर अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
नई व्यवस्था लागू होने पर सुबह और शाम के व्यस्त समय में भी मेट्रो सेवाएं उपलब्ध कराने का रास्ता खुलेगा। इससे कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और नियमित यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं में आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जो देश के प्रमुख मेट्रो नेटवर्कों में उपयोग होने वाली प्रणालियों के अनुरूप है। अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक परिचालन सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ यात्रियों के लिए बेहतर और तेज़ सेवा सुनिश्चित करेगी।
फिलहाल यात्रियों को 24 और 25 जून को वैकल्पिक परिवहन साधनों का उपयोग करना होगा। मेट्रो प्रबंधन को उम्मीद है कि CMRS निरीक्षण के बाद मिलने वाली मंजूरी से परियोजना के अगले चरण को गति मिलेगी और राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सकेगी। आज की ताज़ा ख़बरें, भारत समाचार अपडेट और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह विकास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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भोपाल मेट्रो 24-25 जून को रहेगी बंद, सिग्नलिंग जांच के बाद बदलेगा शेड्यूल
Digital Desk
भोपाल मेट्रो के यात्रियों को 24 और 25 जून को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। शहर में मेट्रो सेवा दो दिनों के लिए बंद रहेगी क्योंकि कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर स्थापित नए सिग्नलिंग सिस्टम का निरीक्षण और परीक्षण करेंगे। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, सुरक्षा और तकनीकी परीक्षण पूरा होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर संचालन संबंधी अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि सिस्टम को मंजूरी मिलती है तो जुलाई से मेट्रो का नया शेड्यूल और टाइमिंग लागू किए जाने की संभावना है।
वर्तमान में भोपाल मेट्रो सीमित क्षमता के साथ संचालित हो रही है। सुभाष नगर से एम्स तक लगभग 7 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर मेट्रो सेवा उपलब्ध है, लेकिन सिग्नलिंग सिस्टम के अभाव में ट्रेनें केवल एक ट्रैक पर संचालित की जा रही हैं। इसी वजह से यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और मेट्रो की फ्रीक्वेंसी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।
मेट्रो प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद 26 जून से सेवाएं फिर से शुरू कर दी जाएंगी। हालांकि यात्रियों को नई समय-सारिणी और परिचालन व्यवस्था के लिए जुलाई तक इंतजार करना पड़ सकता है।
क्यों अहम है सिग्नलिंग सिस्टम
विशेषज्ञों के अनुसार, सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। यही तकनीक ट्रेनों की गति, उनके बीच सुरक्षित दूरी और संचालन की समग्र दक्षता को नियंत्रित करती है। इसके माध्यम से मेट्रो नेटवर्क में दोनों ट्रैक का प्रभावी उपयोग संभव हो पाता है।
फिलहाल भोपाल मेट्रो में ट्रेनें डाउन ट्रैक पर ही दोनों दिशाओं में संचालित की जा रही हैं। यानी एक ही ट्रैक पर ट्रेन आगे बढ़ती है और उसी मार्ग से वापस लौटती है। इससे परिचालन क्षमता सीमित रहती है और यात्रियों को अधिक समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
यात्रियों को मिलेगा फायदा
मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, नए सिग्नलिंग सिस्टम के लागू होने के बाद दोनों ट्रैक पर एक साथ ट्रेन संचालन शुरू किया जा सकेगा। इससे ट्रेनों के बीच का अंतर कम होगा और फेरे बढ़ाए जा सकेंगे। वर्तमान में करीब 75 मिनट की फ्रीक्वेंसी को घटाकर अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
नई व्यवस्था लागू होने पर सुबह और शाम के व्यस्त समय में भी मेट्रो सेवाएं उपलब्ध कराने का रास्ता खुलेगा। इससे कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और नियमित यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं में आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जो देश के प्रमुख मेट्रो नेटवर्कों में उपयोग होने वाली प्रणालियों के अनुरूप है। अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक परिचालन सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ यात्रियों के लिए बेहतर और तेज़ सेवा सुनिश्चित करेगी।
फिलहाल यात्रियों को 24 और 25 जून को वैकल्पिक परिवहन साधनों का उपयोग करना होगा। मेट्रो प्रबंधन को उम्मीद है कि CMRS निरीक्षण के बाद मिलने वाली मंजूरी से परियोजना के अगले चरण को गति मिलेगी और राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सकेगी। आज की ताज़ा ख़बरें, भारत समाचार अपडेट और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह विकास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भोपाल मेट्रो के यात्रियों को 24 और 25 जून को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। शहर में मेट्रो सेवा दो दिनों के लिए बंद रहेगी क्योंकि कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर स्थापित नए सिग्नलिंग सिस्टम का निरीक्षण और परीक्षण करेंगे। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, सुरक्षा और तकनीकी परीक्षण पूरा होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर संचालन संबंधी अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि सिस्टम को मंजूरी मिलती है तो जुलाई से मेट्रो का नया शेड्यूल और टाइमिंग लागू किए जाने की संभावना है।
वर्तमान में भोपाल मेट्रो सीमित क्षमता के साथ संचालित हो रही है। सुभाष नगर से एम्स तक लगभग 7 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर मेट्रो सेवा उपलब्ध है, लेकिन सिग्नलिंग सिस्टम के अभाव में ट्रेनें केवल एक ट्रैक पर संचालित की जा रही हैं। इसी वजह से यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और मेट्रो की फ्रीक्वेंसी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।
मेट्रो प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद 26 जून से सेवाएं फिर से शुरू कर दी जाएंगी। हालांकि यात्रियों को नई समय-सारिणी और परिचालन व्यवस्था के लिए जुलाई तक इंतजार करना पड़ सकता है।
क्यों अहम है सिग्नलिंग सिस्टम
विशेषज्ञों के अनुसार, सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। यही तकनीक ट्रेनों की गति, उनके बीच सुरक्षित दूरी और संचालन की समग्र दक्षता को नियंत्रित करती है। इसके माध्यम से मेट्रो नेटवर्क में दोनों ट्रैक का प्रभावी उपयोग संभव हो पाता है।
फिलहाल भोपाल मेट्रो में ट्रेनें डाउन ट्रैक पर ही दोनों दिशाओं में संचालित की जा रही हैं। यानी एक ही ट्रैक पर ट्रेन आगे बढ़ती है और उसी मार्ग से वापस लौटती है। इससे परिचालन क्षमता सीमित रहती है और यात्रियों को अधिक समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
यात्रियों को मिलेगा फायदा
मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, नए सिग्नलिंग सिस्टम के लागू होने के बाद दोनों ट्रैक पर एक साथ ट्रेन संचालन शुरू किया जा सकेगा। इससे ट्रेनों के बीच का अंतर कम होगा और फेरे बढ़ाए जा सकेंगे। वर्तमान में करीब 75 मिनट की फ्रीक्वेंसी को घटाकर अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
नई व्यवस्था लागू होने पर सुबह और शाम के व्यस्त समय में भी मेट्रो सेवाएं उपलब्ध कराने का रास्ता खुलेगा। इससे कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और नियमित यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं में आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जो देश के प्रमुख मेट्रो नेटवर्कों में उपयोग होने वाली प्रणालियों के अनुरूप है। अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक परिचालन सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ यात्रियों के लिए बेहतर और तेज़ सेवा सुनिश्चित करेगी।
फिलहाल यात्रियों को 24 और 25 जून को वैकल्पिक परिवहन साधनों का उपयोग करना होगा। मेट्रो प्रबंधन को उम्मीद है कि CMRS निरीक्षण के बाद मिलने वाली मंजूरी से परियोजना के अगले चरण को गति मिलेगी और राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सकेगी। आज की ताज़ा ख़बरें, भारत समाचार अपडेट और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह विकास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
