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मोहन यादव का बड़ा फैसला: वन्यजीव प्रबंधन में नए कदम तेज हुए
भोपाल
आंध्रप्रदेश से बाघ-गौर के आदान-प्रदान, मानव-वन्यजीव संघर्ष राज्य आपदा घोषित करने की तैयारी
गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने वन विभाग की गतिविधियों और आने वाले समय की योजनाओं को लेकर कई बड़े और अहम फैसले लिए। बैठक में वन्यजीव संरक्षण से लेकर पर्यटन और मानव-वन्यजीव संघर्ष तक कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी दौरान आंध्रप्रदेश और अन्य राज्यों के साथ वन्यजीव आदान-प्रदान को लेकर भी महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। बैठक में बताया गया कि Andhra Pradesh की ओर से मध्यप्रदेश से बाघ और गौर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर बाघ और गौर भेजने की कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया कि बदले में आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डॉग्स और अन्य वन्य प्रजातियों को प्राप्त करने की दिशा में भी काम किया जाए। इसी तरह राजस्थान से सोन चिरैया प्राप्त करने पर सहमति बनी है, जिसे घाटीगांव और गांधीसागर जैसे वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। यह पूरा आदान-प्रदान वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
वन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने वन पर्यटन को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जंगल क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाएं और मजबूत की जाएं। होम-स्टे मॉडल को बढ़ावा देने की बात भी सामने आई, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके और पर्यटक सीधे वन जीवन के अनुभव से जुड़ सकें। इसके अलावा सफारी वाहनों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए, जिससे पर्यटन गतिविधियों में तेजी आए। बैठक में मानव और वन्यजीव संघर्ष को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि इस समस्या को राज्य आपदा घोषित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इससे प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियां मिलकर एक समन्वित प्रणाली के तहत ऐसे मामलों को संभाल सकेंगी। यह निर्णय आने वाले समय में ग्रामीण और वन क्षेत्रों में होने वाले संघर्षों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वन विभाग ने बैठक में बताया कि प्रदेश में टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर अब एक राज्य स्तरीय टास्क फोर्स गठित की जाएगी, जिसका उद्देश्य वनों में संगठित अपराधों पर सख्त नियंत्रण रखना होगा। इसके साथ ही वन मुख्यालय में कमांड और कंट्रोल रूम स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है, जिससे निगरानी और प्रतिक्रिया प्रणाली और मजबूत होगी। खनिज परिवहन से जुड़े अनुज्ञा शुल्क में वृद्धि के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली है, जिससे विभागीय संसाधनों में बढ़ोतरी की उम्मीद है। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि राज्य में चीतों की संख्या वर्तमान में 52 हो चुकी है, जिनमें से 32 का जन्म कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हुआ है। सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को तीसरे चीता घर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मंदसौर के गांधीसागर अभ्यारण्य में भी जल्द ही नए चीतों को छोड़े जाने की तैयारी है। वन विभाग का दावा है कि बाघ, तेंदुआ, चीता, गिद्ध और घड़ियाल जैसे वन्यजीवों के संरक्षण में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। इसी बीच, प्रदेश के डिंडोरी और अनूपपुर जिलों में साल बोरर नामक वन रोग फैलने की जानकारी भी सामने आई है, जो लगभग तीन दशक बाद दोबारा दिखाई दिया है। इसके नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण और वन ग्रामों के राजस्व ग्राम में परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी तेजी से काम चल रहा है। सरकार का फोकस अब संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर भी है, ताकि वन क्षेत्र विकास और रोजगार दोनों का केंद्र बन सके।
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मोहन यादव का बड़ा फैसला: वन्यजीव प्रबंधन में नए कदम तेज हुए
भोपाल
गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने वन विभाग की गतिविधियों और आने वाले समय की योजनाओं को लेकर कई बड़े और अहम फैसले लिए। बैठक में वन्यजीव संरक्षण से लेकर पर्यटन और मानव-वन्यजीव संघर्ष तक कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी दौरान आंध्रप्रदेश और अन्य राज्यों के साथ वन्यजीव आदान-प्रदान को लेकर भी महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। बैठक में बताया गया कि Andhra Pradesh की ओर से मध्यप्रदेश से बाघ और गौर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर बाघ और गौर भेजने की कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया कि बदले में आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डॉग्स और अन्य वन्य प्रजातियों को प्राप्त करने की दिशा में भी काम किया जाए। इसी तरह राजस्थान से सोन चिरैया प्राप्त करने पर सहमति बनी है, जिसे घाटीगांव और गांधीसागर जैसे वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। यह पूरा आदान-प्रदान वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
वन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने वन पर्यटन को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जंगल क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाएं और मजबूत की जाएं। होम-स्टे मॉडल को बढ़ावा देने की बात भी सामने आई, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके और पर्यटक सीधे वन जीवन के अनुभव से जुड़ सकें। इसके अलावा सफारी वाहनों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए, जिससे पर्यटन गतिविधियों में तेजी आए। बैठक में मानव और वन्यजीव संघर्ष को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि इस समस्या को राज्य आपदा घोषित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इससे प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियां मिलकर एक समन्वित प्रणाली के तहत ऐसे मामलों को संभाल सकेंगी। यह निर्णय आने वाले समय में ग्रामीण और वन क्षेत्रों में होने वाले संघर्षों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वन विभाग ने बैठक में बताया कि प्रदेश में टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर अब एक राज्य स्तरीय टास्क फोर्स गठित की जाएगी, जिसका उद्देश्य वनों में संगठित अपराधों पर सख्त नियंत्रण रखना होगा। इसके साथ ही वन मुख्यालय में कमांड और कंट्रोल रूम स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है, जिससे निगरानी और प्रतिक्रिया प्रणाली और मजबूत होगी। खनिज परिवहन से जुड़े अनुज्ञा शुल्क में वृद्धि के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली है, जिससे विभागीय संसाधनों में बढ़ोतरी की उम्मीद है। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि राज्य में चीतों की संख्या वर्तमान में 52 हो चुकी है, जिनमें से 32 का जन्म कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हुआ है। सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को तीसरे चीता घर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मंदसौर के गांधीसागर अभ्यारण्य में भी जल्द ही नए चीतों को छोड़े जाने की तैयारी है। वन विभाग का दावा है कि बाघ, तेंदुआ, चीता, गिद्ध और घड़ियाल जैसे वन्यजीवों के संरक्षण में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। इसी बीच, प्रदेश के डिंडोरी और अनूपपुर जिलों में साल बोरर नामक वन रोग फैलने की जानकारी भी सामने आई है, जो लगभग तीन दशक बाद दोबारा दिखाई दिया है। इसके नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण और वन ग्रामों के राजस्व ग्राम में परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी तेजी से काम चल रहा है। सरकार का फोकस अब संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर भी है, ताकि वन क्षेत्र विकास और रोजगार दोनों का केंद्र बन सके।
