- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- भोपाल
- वाकणकर जयंती पर बड़ा निर्णय, भोपाल संस्थान बना इंक्यूबेशन सेंटर
वाकणकर जयंती पर बड़ा निर्णय, भोपाल संस्थान बना इंक्यूबेशन सेंटर
Bhopal, MP
भोपाल में 4 मई को पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर की जयंती पर एक सादगी भरा लेकिन अहम कार्यक्रम हुआ, जहां पुरातत्व शोध से जुड़े अधिकारियों ने उन्हें याद किया और उनके काम को आगे बढ़ाने की बात कही। कार्यक्रम डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान में आयोजित हुआ, जहां सुबह से ही हलचल थी। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी एकत्र हुए, वाकणकर जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए और उनके योगदान को याद किया गया। माहौल औपचारिक जरूर था, लेकिन बीच-बीच में यह भी महसूस हो रहा था कि उनके काम को लेकर एक तरह की जिम्मेदारी भी मौजूद है।
इस दौरान एक अहम फैसला भी सामने आया। बताया गया कि संस्थान को ‘ज्ञानभारतम् अभियान’ के तहत इंक्यूबेशन सेंटर घोषित किया गया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इसका मकसद प्रदेश की पुरानी पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करना है। अधिकारियों का कहना है कि मध्यप्रदेश में बिखरी हुई पांडुलिपियों का बड़ा हिस्सा अब तक व्यवस्थित तरीके से संरक्षित नहीं हो पाया है, ऐसे में डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू करना जरूरी माना गया। यह काम धीरे-धीरे किया जाएगा और अलग-अलग जिलों से सामग्री जुटाई जाएगी। बताया जा रहा है कि तकनीकी टीम भी इसके लिए तैयार की जा रही है।
इसी क्रम में वाकणकर जी के जीवन और कार्यों पर आधारित एक पुस्तक तैयार की जा रही है, जिसका नाम “मालव माटी के अन्वेषकः पद्म श्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर” रखा गया है। जानकारी के अनुसार इस पुस्तक की सामग्री डॉ. के.सी पाण्डेय द्वारा तैयार की गई है और इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराने की तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सिर्फ एक पुस्तक प्रकाशित करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी तक वाकणकर जी के काम को पहुंचाना भी है।
कार्यक्रम के दौरान यह भी तय किया गया कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पुरातत्वविदों और इतिहासकारों के विचारों को एकत्र किया जाएगा और उन्हें साझा किया जाएगा। साथ ही वाकणकर जी से जुड़ी सामग्री, दस्तावेज और शोध को भी संकलित करने की योजना है। अधिकारियों के अनुसार यह एक लंबी प्रक्रिया होगी, लेकिन इसे लगातार जारी रखने की बात कही गई है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
वाकणकर जयंती पर बड़ा निर्णय, भोपाल संस्थान बना इंक्यूबेशन सेंटर
Bhopal, MP
भोपाल में 4 मई को पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर की जयंती पर एक सादगी भरा लेकिन अहम कार्यक्रम हुआ, जहां पुरातत्व शोध से जुड़े अधिकारियों ने उन्हें याद किया और उनके काम को आगे बढ़ाने की बात कही। कार्यक्रम डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान में आयोजित हुआ, जहां सुबह से ही हलचल थी। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी एकत्र हुए, वाकणकर जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए और उनके योगदान को याद किया गया। माहौल औपचारिक जरूर था, लेकिन बीच-बीच में यह भी महसूस हो रहा था कि उनके काम को लेकर एक तरह की जिम्मेदारी भी मौजूद है।
इस दौरान एक अहम फैसला भी सामने आया। बताया गया कि संस्थान को ‘ज्ञानभारतम् अभियान’ के तहत इंक्यूबेशन सेंटर घोषित किया गया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इसका मकसद प्रदेश की पुरानी पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करना है। अधिकारियों का कहना है कि मध्यप्रदेश में बिखरी हुई पांडुलिपियों का बड़ा हिस्सा अब तक व्यवस्थित तरीके से संरक्षित नहीं हो पाया है, ऐसे में डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू करना जरूरी माना गया। यह काम धीरे-धीरे किया जाएगा और अलग-अलग जिलों से सामग्री जुटाई जाएगी। बताया जा रहा है कि तकनीकी टीम भी इसके लिए तैयार की जा रही है।
इसी क्रम में वाकणकर जी के जीवन और कार्यों पर आधारित एक पुस्तक तैयार की जा रही है, जिसका नाम “मालव माटी के अन्वेषकः पद्म श्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर” रखा गया है। जानकारी के अनुसार इस पुस्तक की सामग्री डॉ. के.सी पाण्डेय द्वारा तैयार की गई है और इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराने की तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सिर्फ एक पुस्तक प्रकाशित करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी तक वाकणकर जी के काम को पहुंचाना भी है।
कार्यक्रम के दौरान यह भी तय किया गया कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पुरातत्वविदों और इतिहासकारों के विचारों को एकत्र किया जाएगा और उन्हें साझा किया जाएगा। साथ ही वाकणकर जी से जुड़ी सामग्री, दस्तावेज और शोध को भी संकलित करने की योजना है। अधिकारियों के अनुसार यह एक लंबी प्रक्रिया होगी, लेकिन इसे लगातार जारी रखने की बात कही गई है।
