मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नरेशचंद्र सिंह की जयंती पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि

Bhopal, MP

विधानसभा भवन में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल; आदिवासी समुदाय के पहले मुख्यमंत्री रहे नरेशचंद्र सिंह के योगदान को किया याद।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. नरेशचंद्र सिंह की जयंती पर विधानसभा भवन पहुंचकर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान नरेशचंद्र सिंह के राजनीतिक योगदान, जनजातीय नेतृत्व और प्रशासनिक कार्यों को विशेष रूप से याद किया गया।

कौन थे नरेशचंद्र सिंह?

स्व. नरेशचंद्र सिंह मध्यप्रदेश के 6वें मुख्यमंत्री रहे और प्रदेश के इतिहास में पहले तथा अब तक के एकमात्र जनजातीय (राज गोंड) मुख्यमंत्री थे। उनका मुख्यमंत्री कार्यकाल 13 मार्च 1969 से 25 मार्च 1969 तक रहा, जो राजनीतिक अस्थिरता और संविद सरकार की परिस्थितियों के कारण मात्र 13 दिनों का था।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में क्या कहा सीएम ने?

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि नरेशचंद्र सिंह ने जनजातीय समाज के उत्थान, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने कहा कि अल्प अवधि के बावजूद नरेशचंद्र सिंह का नेतृत्व मध्यप्रदेश की राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
इस अवसर पर विधायक भगवान दास सबनानी, विधानसभा के प्रमुख सचिव सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

शासक से जनसेवक तक—एक प्रेरक यात्रा

नरेशचंद्र सिंह का जन्म 21 नवंबर 1908 को हुआ था। वे सारंगढ़ रियासत के राजवंश से थे और राजा के रूप में अपने राज्य का शासन संभालते थे। 1948 में सारंगढ़ रियासत का भारत संघ में विलय होने तक वे इसके शासक रहे। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और 1951 के पहले आम चुनाव में मध्यप्रदेश विधानसभा का चुनाव जीतकर विधायक बने।

जनजाति कल्याण के पहले मंत्री

नरेशचंद्र सिंह प्रदेश के पहले जनजाति कल्याण मंत्री रहे। इसके अलावा उन्होंने बिजली विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) का दायित्व भी संभाला। 1952 से 1969 तक वे लगातार मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। उनकी कार्यशैली और जनहित में लिए गए निर्णय आज भी राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण उदाहरण माने जाते हैं।

प्रदेश की राजनीतिक विरासत में विशेष स्थान

स्व. नरेशचंद्र सिंह न केवल मध्यप्रदेश के जनजातीय समाज की आवाज थे, बल्कि प्रशासनिक और सामाजिक सुधारों के अग्रदूत भी रहे। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी निष्ठा, सरलता और सेवा भावना भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

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www.dainikjagranmpcg.com
21 Nov 2025 By दैनिक जागरण

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नरेशचंद्र सिंह की जयंती पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. नरेशचंद्र सिंह की जयंती पर विधानसभा भवन पहुंचकर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान नरेशचंद्र सिंह के राजनीतिक योगदान, जनजातीय नेतृत्व और प्रशासनिक कार्यों को विशेष रूप से याद किया गया।

कौन थे नरेशचंद्र सिंह?

स्व. नरेशचंद्र सिंह मध्यप्रदेश के 6वें मुख्यमंत्री रहे और प्रदेश के इतिहास में पहले तथा अब तक के एकमात्र जनजातीय (राज गोंड) मुख्यमंत्री थे। उनका मुख्यमंत्री कार्यकाल 13 मार्च 1969 से 25 मार्च 1969 तक रहा, जो राजनीतिक अस्थिरता और संविद सरकार की परिस्थितियों के कारण मात्र 13 दिनों का था।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में क्या कहा सीएम ने?

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि नरेशचंद्र सिंह ने जनजातीय समाज के उत्थान, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने कहा कि अल्प अवधि के बावजूद नरेशचंद्र सिंह का नेतृत्व मध्यप्रदेश की राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
इस अवसर पर विधायक भगवान दास सबनानी, विधानसभा के प्रमुख सचिव सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

शासक से जनसेवक तक—एक प्रेरक यात्रा

नरेशचंद्र सिंह का जन्म 21 नवंबर 1908 को हुआ था। वे सारंगढ़ रियासत के राजवंश से थे और राजा के रूप में अपने राज्य का शासन संभालते थे। 1948 में सारंगढ़ रियासत का भारत संघ में विलय होने तक वे इसके शासक रहे। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और 1951 के पहले आम चुनाव में मध्यप्रदेश विधानसभा का चुनाव जीतकर विधायक बने।

जनजाति कल्याण के पहले मंत्री

नरेशचंद्र सिंह प्रदेश के पहले जनजाति कल्याण मंत्री रहे। इसके अलावा उन्होंने बिजली विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) का दायित्व भी संभाला। 1952 से 1969 तक वे लगातार मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। उनकी कार्यशैली और जनहित में लिए गए निर्णय आज भी राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण उदाहरण माने जाते हैं।

प्रदेश की राजनीतिक विरासत में विशेष स्थान

स्व. नरेशचंद्र सिंह न केवल मध्यप्रदेश के जनजातीय समाज की आवाज थे, बल्कि प्रशासनिक और सामाजिक सुधारों के अग्रदूत भी रहे। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी निष्ठा, सरलता और सेवा भावना भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

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