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भोपाल में मुहर्रम पर निकले मातमी जुलूस, करबला की याद में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब
भोपाल,(म.प्र.)
पुराने शहर से करबला तक निकले ताजिए और मातमी जुलूस, सुरक्षा के बीच ट्रैफिक डायवर्जन लागू, शाम तक कई मार्गों पर यातायात प्रभावित रहने की संभावना।
भोपाल में मुहर्रम के मौके पर शनिवार को अकीदत और गम का माहौल देखने को मिला। शहर के अलग-अलग इलाकों से मातमी जुलूस निकाले गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। करबला की शहादत की याद में आयोजित इन जुलूसों में ताजिए, बुर्राक, सवारियां और इस्लामी परचम आकर्षण का केंद्र रहे। कई स्थानों पर लोग काले लिबास में नजर आए और इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मातम किया। जुलूसों के दौरान धार्मिक अनुशासन बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए। पुराने शहर के प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा, जबकि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया। सुबह से ही फतेहगढ़, पीर गेट, मोती मस्जिद, शाहजहांनाबाद, भारत टॉकीज और आसपास के इलाकों में लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी थी। पहला बड़ा मातमी जुलूस फतेहगढ़ क्षेत्र से रवाना हुआ, जो विभिन्न मार्गों से होकर वीआईपी रोड स्थित करबला पहुंचा। इसके अलावा शहर के अलग-अलग हिस्सों से निकले जुलूस भी पीर गेट क्षेत्र में एकत्रित होने के बाद करबला की ओर बढ़े। जुलूसों के साथ जगह-जगह ताजियों की सलामी दी गई और अकीदतमंदों ने पूरी श्रद्धा के साथ धार्मिक परंपराओं का पालन किया। कई स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ भी जुलूस निकाला गया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
रास्ते में प्रमुख चौराहों पर उलेमाओं की तकरीरें भी आयोजित की गईं। इन तकरीरों में करबला की जंग, इमाम हुसैन की कुर्बानी और इंसाफ, सब्र तथा इंसानियत के संदेश पर विस्तार से चर्चा की गई। बाहर से आए धार्मिक विद्वानों ने भी अपने संबोधन में करबला की घटना को मानवता के लिए प्रेरणा बताया। अकीदतमंद बड़ी तादाद में इन तकरीरों को सुनने पहुंचे। पूरे माहौल में धार्मिक अनुशासन और श्रद्धा साफ दिखाई दी। मुहर्रम के अवसर पर शुक्रवार रात भी शहर के विभिन्न इलाकों में ताजियों और सवारियों की गश्त निकाली गई थी। इस दौरान प्रमुख दरगाहों और इमामबाड़ों पर सलामी की रस्म अदा की गई। हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में लोगों ने इन धार्मिक आयोजनों में भाग लिया। मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि मुहर्रम केवल मातम का अवसर नहीं बल्कि सत्य, न्याय और बलिदान की याद को जीवित रखने का भी दिन है।
जुलूसों को देखते हुए भोपाल यातायात पुलिस ने पुराने शहर के कई मार्गों पर विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया। भारत टॉकीज से करबला तक जाने वाले मार्ग पर भारी और व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई गई। भारत टॉकीज, अल्पना तिराहा, नादरा बस स्टैंड, भोपाल टॉकीज, शाहजहांनाबाद, रॉयल मार्केट, कोहेफिजा तिराहा और करबला क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे आवश्यक होने पर ही इन मार्गों का उपयोग करें और वैकल्पिक रास्तों का सहारा लें। राजाभोज विमानतल जाने वाले यात्रियों के लिए भी प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग तय किए हैं। एयरपोर्ट जाने वाले वाहन भारत माता चौराहा, भदभदा, नीलबड़, नाथूबरखेड़ा रोड, मुगालिया छाप, खजूरी सड़क और मुबारकपुर मार्ग का उपयोग कर सकते हैं। वहीं रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए प्रभात चौराहा, 80 फीट रोड और बजरिया मार्ग को उपयुक्त बताया गया है। प्रशासन ने लोगों से यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करने और अनावश्यक भीड़ से बचने की अपील की है।
मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना माना जाता है और इसकी दसवीं तारीख को आशूरा के रूप में याद किया जाता है। इसी दिन करबला की ऐतिहासिक जंग में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने शहादत दी थी। माना जाता है कि उन्होंने अन्याय और अत्याचार के सामने झुकने के बजाय सत्य और इंसाफ का रास्ता चुना। यही कारण है कि हर वर्ष मुहर्रम के दौरान दुनिया भर में शिया समुदाय सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हुए मातमी जुलूस निकालते हैं और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। करबला की यह परंपरा इराक के पवित्र शहर करबला से जुड़ी हुई है, जहां वर्ष 680 ईस्वी में यह ऐतिहासिक घटना हुई थी। समय के साथ यह परंपरा भारत सहित दुनिया के कई देशों तक पहुंची। भारत में भी मुहर्रम के जुलूसों का लंबा इतिहास रहा है और आज यह धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द का भी प्रतीक माना जाता है। भोपाल में भी हर साल बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल होकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं। प्रशासन ने पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा, ट्रैफिक और निगरानी के व्यापक इंतजाम किए हैं।
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भोपाल में मुहर्रम पर निकले मातमी जुलूस, करबला की याद में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब
भोपाल,(म.प्र.)
भोपाल में मुहर्रम के मौके पर शनिवार को अकीदत और गम का माहौल देखने को मिला। शहर के अलग-अलग इलाकों से मातमी जुलूस निकाले गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। करबला की शहादत की याद में आयोजित इन जुलूसों में ताजिए, बुर्राक, सवारियां और इस्लामी परचम आकर्षण का केंद्र रहे। कई स्थानों पर लोग काले लिबास में नजर आए और इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मातम किया। जुलूसों के दौरान धार्मिक अनुशासन बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए। पुराने शहर के प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा, जबकि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया। सुबह से ही फतेहगढ़, पीर गेट, मोती मस्जिद, शाहजहांनाबाद, भारत टॉकीज और आसपास के इलाकों में लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी थी। पहला बड़ा मातमी जुलूस फतेहगढ़ क्षेत्र से रवाना हुआ, जो विभिन्न मार्गों से होकर वीआईपी रोड स्थित करबला पहुंचा। इसके अलावा शहर के अलग-अलग हिस्सों से निकले जुलूस भी पीर गेट क्षेत्र में एकत्रित होने के बाद करबला की ओर बढ़े। जुलूसों के साथ जगह-जगह ताजियों की सलामी दी गई और अकीदतमंदों ने पूरी श्रद्धा के साथ धार्मिक परंपराओं का पालन किया। कई स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ भी जुलूस निकाला गया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
रास्ते में प्रमुख चौराहों पर उलेमाओं की तकरीरें भी आयोजित की गईं। इन तकरीरों में करबला की जंग, इमाम हुसैन की कुर्बानी और इंसाफ, सब्र तथा इंसानियत के संदेश पर विस्तार से चर्चा की गई। बाहर से आए धार्मिक विद्वानों ने भी अपने संबोधन में करबला की घटना को मानवता के लिए प्रेरणा बताया। अकीदतमंद बड़ी तादाद में इन तकरीरों को सुनने पहुंचे। पूरे माहौल में धार्मिक अनुशासन और श्रद्धा साफ दिखाई दी। मुहर्रम के अवसर पर शुक्रवार रात भी शहर के विभिन्न इलाकों में ताजियों और सवारियों की गश्त निकाली गई थी। इस दौरान प्रमुख दरगाहों और इमामबाड़ों पर सलामी की रस्म अदा की गई। हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में लोगों ने इन धार्मिक आयोजनों में भाग लिया। मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि मुहर्रम केवल मातम का अवसर नहीं बल्कि सत्य, न्याय और बलिदान की याद को जीवित रखने का भी दिन है।
जुलूसों को देखते हुए भोपाल यातायात पुलिस ने पुराने शहर के कई मार्गों पर विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया। भारत टॉकीज से करबला तक जाने वाले मार्ग पर भारी और व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई गई। भारत टॉकीज, अल्पना तिराहा, नादरा बस स्टैंड, भोपाल टॉकीज, शाहजहांनाबाद, रॉयल मार्केट, कोहेफिजा तिराहा और करबला क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे आवश्यक होने पर ही इन मार्गों का उपयोग करें और वैकल्पिक रास्तों का सहारा लें। राजाभोज विमानतल जाने वाले यात्रियों के लिए भी प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग तय किए हैं। एयरपोर्ट जाने वाले वाहन भारत माता चौराहा, भदभदा, नीलबड़, नाथूबरखेड़ा रोड, मुगालिया छाप, खजूरी सड़क और मुबारकपुर मार्ग का उपयोग कर सकते हैं। वहीं रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए प्रभात चौराहा, 80 फीट रोड और बजरिया मार्ग को उपयुक्त बताया गया है। प्रशासन ने लोगों से यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करने और अनावश्यक भीड़ से बचने की अपील की है।
मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना माना जाता है और इसकी दसवीं तारीख को आशूरा के रूप में याद किया जाता है। इसी दिन करबला की ऐतिहासिक जंग में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने शहादत दी थी। माना जाता है कि उन्होंने अन्याय और अत्याचार के सामने झुकने के बजाय सत्य और इंसाफ का रास्ता चुना। यही कारण है कि हर वर्ष मुहर्रम के दौरान दुनिया भर में शिया समुदाय सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हुए मातमी जुलूस निकालते हैं और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। करबला की यह परंपरा इराक के पवित्र शहर करबला से जुड़ी हुई है, जहां वर्ष 680 ईस्वी में यह ऐतिहासिक घटना हुई थी। समय के साथ यह परंपरा भारत सहित दुनिया के कई देशों तक पहुंची। भारत में भी मुहर्रम के जुलूसों का लंबा इतिहास रहा है और आज यह धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द का भी प्रतीक माना जाता है। भोपाल में भी हर साल बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल होकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं। प्रशासन ने पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा, ट्रैफिक और निगरानी के व्यापक इंतजाम किए हैं।
