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भोपाल के भारत भवन में आज से ‘सदानीरा समागम’, जल संरक्षण पर राष्ट्रीय मंथन
भोपाल,(म.प्र.)
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे शुभारंभ, जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सात दिवसीय सांस्कृतिक और वैचारिक आयोजन शुरू
भोपाल के भारत भवन में बुधवार से ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक उत्सव ‘सदानीरा समागम’ का शुभारंभ होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस सात दिवसीय आयोजन का उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम में जल संरक्षण, भारतीय ज्ञान परंपरा, पंचमहाभूत और सतत विकास जैसे विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर विमर्श होगा।
यह आयोजन वीर भारत न्यास द्वारा किया जा रहा है और 2 जून तक चलेगा। समागम में देश-विदेश के विद्वान, पर्यावरण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, कलाकार और शोधकर्ता शामिल होंगे। कार्यक्रम को मध्यप्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों और कई राष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त है। उद्घाटन समारोह में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग, राज्य मंत्री कृष्णा गौर और धर्मेंद्र सिंह लोधी भी मौजूद रहेंगे। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय परंपरा और आधुनिक विज्ञान के माध्यम से जल संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरण करना है।
सदानीरा समागम के तहत विभिन्न वैचारिक सत्रों में जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि और आकाश जैसे पंचमहाभूतों पर आधारित भारतीय दर्शन और आधुनिक पर्यावरणीय चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञ भूगर्भीय जल स्रोतों, नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली पर अपने विचार साझा करेंगे। आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि बदलते पर्यावरणीय संकट और जल की कमी को देखते हुए यह कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय संवाद का मंच बनेगा। कार्यक्रम में वैज्ञानिक और शिक्षाविद जल संरक्षण के व्यावहारिक मॉडल और सामुदायिक भागीदारी पर भी चर्चा करेंगे।
देशभर के विशेषज्ञ शामिल
वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी के अनुसार इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, आईआईएम बोधगया और कई अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। विभिन्न कॉर्पोरेट घरानों के सीएसआर प्रमुख भी पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान जल संकट और सतत विकास को लेकर कई शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही जल संरक्षण से जुड़े स्थानीय और पारंपरिक मॉडल पर भी चर्चा होगी। विशेषज्ञ यह बताएंगे कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल संसाधनों का संतुलित उपयोग किस तरह किया जा सकता है। आयोजकों के मुताबिक समागम में युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया गया है ताकि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाया जा सके।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण
सदानीरा समागम केवल वैचारिक मंच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें प्रतिदिन सांस्कृतिक और रचनात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। शाम के सत्रों में नृत्य-नाटिकाएं, लोकगायन, रंगमंचीय प्रस्तुतियां और संगीत कार्यक्रम होंगे।
भारतीय नौसेना बैंड की सिम्फनी, ‘गोवर्धन लीला’ और ‘गंगा यात्रा’ जैसी प्रस्तुतियां कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहेंगी। आयोजकों का मानना है कि संस्कृति और कला के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश अधिक प्रभावी ढंग से समाज तक पहुंचाया जा सकता है। इसके अलावा ‘जल, जंगल, जीवन’ विषय पर राष्ट्रीय जनजातीय चित्रांकन कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी। पारंपरिक चित्र शैलियों में जल संरक्षण पर आधारित रचनात्मक कार्यशालाओं में देशभर के कलाकार हिस्सा लेंगे।
विशेष प्रदर्शनियां भी लगेंगी
भारत भवन परिसर में चार विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। इनमें जलचर जीवन, मध्यप्रदेश के जल गंगा संवर्धन अभियान, लघु चित्रों में जल और भूगर्भीय जल स्रोतों से जुड़ी जानकारियां प्रदर्शित की जाएंगी। इन प्रदर्शनियों के आयोजन में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, बरकतुल्ला विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय का सहयोग रहेगा। आयोजन स्थल पर आने वाले लोग जल संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक और सांस्कृतिक पहलुओं को करीब से समझ सकेंगे।
कार्यक्रम में जल और संस्कृति पर आधारित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा। इनमें ‘अंतर्जली यात्रा’, ‘पुरोवाक्’, प्रेमशंकर शुक्ल की ‘आत्मा की घाटी में पानी का संगीत’ और राजेश्वर त्रिवेदी की ‘जल, संस्कृति और स्थापत्य’ प्रमुख हैं। इस आयोजन को सफल बनाने में भारत भवन, मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय, जनसंपर्क विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान, यूनाइटेड कॉन्शसनेस, सेज, एलएनसीटी, सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी, केंद्रीय भूजल बोर्ड और नर्मदा समग्र सहित कई संस्थाएं सहयोग कर रही हैं।
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भोपाल के भारत भवन में आज से ‘सदानीरा समागम’, जल संरक्षण पर राष्ट्रीय मंथन
भोपाल,(म.प्र.)
भोपाल के भारत भवन में बुधवार से ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक उत्सव ‘सदानीरा समागम’ का शुभारंभ होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस सात दिवसीय आयोजन का उद्घाटन करेंगे। कार्यक्रम में जल संरक्षण, भारतीय ज्ञान परंपरा, पंचमहाभूत और सतत विकास जैसे विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर विमर्श होगा।
यह आयोजन वीर भारत न्यास द्वारा किया जा रहा है और 2 जून तक चलेगा। समागम में देश-विदेश के विद्वान, पर्यावरण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, कलाकार और शोधकर्ता शामिल होंगे। कार्यक्रम को मध्यप्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों और कई राष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त है। उद्घाटन समारोह में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग, राज्य मंत्री कृष्णा गौर और धर्मेंद्र सिंह लोधी भी मौजूद रहेंगे। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय परंपरा और आधुनिक विज्ञान के माध्यम से जल संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरण करना है।
सदानीरा समागम के तहत विभिन्न वैचारिक सत्रों में जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि और आकाश जैसे पंचमहाभूतों पर आधारित भारतीय दर्शन और आधुनिक पर्यावरणीय चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञ भूगर्भीय जल स्रोतों, नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली पर अपने विचार साझा करेंगे। आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि बदलते पर्यावरणीय संकट और जल की कमी को देखते हुए यह कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय संवाद का मंच बनेगा। कार्यक्रम में वैज्ञानिक और शिक्षाविद जल संरक्षण के व्यावहारिक मॉडल और सामुदायिक भागीदारी पर भी चर्चा करेंगे।
देशभर के विशेषज्ञ शामिल
वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी के अनुसार इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, आईआईएम बोधगया और कई अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। विभिन्न कॉर्पोरेट घरानों के सीएसआर प्रमुख भी पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान जल संकट और सतत विकास को लेकर कई शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही जल संरक्षण से जुड़े स्थानीय और पारंपरिक मॉडल पर भी चर्चा होगी। विशेषज्ञ यह बताएंगे कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल संसाधनों का संतुलित उपयोग किस तरह किया जा सकता है। आयोजकों के मुताबिक समागम में युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया गया है ताकि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाया जा सके।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण
सदानीरा समागम केवल वैचारिक मंच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें प्रतिदिन सांस्कृतिक और रचनात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। शाम के सत्रों में नृत्य-नाटिकाएं, लोकगायन, रंगमंचीय प्रस्तुतियां और संगीत कार्यक्रम होंगे।
भारतीय नौसेना बैंड की सिम्फनी, ‘गोवर्धन लीला’ और ‘गंगा यात्रा’ जैसी प्रस्तुतियां कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहेंगी। आयोजकों का मानना है कि संस्कृति और कला के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश अधिक प्रभावी ढंग से समाज तक पहुंचाया जा सकता है। इसके अलावा ‘जल, जंगल, जीवन’ विषय पर राष्ट्रीय जनजातीय चित्रांकन कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी। पारंपरिक चित्र शैलियों में जल संरक्षण पर आधारित रचनात्मक कार्यशालाओं में देशभर के कलाकार हिस्सा लेंगे।
विशेष प्रदर्शनियां भी लगेंगी
भारत भवन परिसर में चार विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। इनमें जलचर जीवन, मध्यप्रदेश के जल गंगा संवर्धन अभियान, लघु चित्रों में जल और भूगर्भीय जल स्रोतों से जुड़ी जानकारियां प्रदर्शित की जाएंगी। इन प्रदर्शनियों के आयोजन में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, बरकतुल्ला विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय का सहयोग रहेगा। आयोजन स्थल पर आने वाले लोग जल संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक और सांस्कृतिक पहलुओं को करीब से समझ सकेंगे।
कार्यक्रम में जल और संस्कृति पर आधारित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा। इनमें ‘अंतर्जली यात्रा’, ‘पुरोवाक्’, प्रेमशंकर शुक्ल की ‘आत्मा की घाटी में पानी का संगीत’ और राजेश्वर त्रिवेदी की ‘जल, संस्कृति और स्थापत्य’ प्रमुख हैं। इस आयोजन को सफल बनाने में भारत भवन, मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय, जनसंपर्क विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान, यूनाइटेड कॉन्शसनेस, सेज, एलएनसीटी, सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी, केंद्रीय भूजल बोर्ड और नर्मदा समग्र सहित कई संस्थाएं सहयोग कर रही हैं।
