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MP में पेट्रोल 116 के पार, डीजल 100 रुपये पहुंचा, 11 दिन में हुई चौथी बढ़ोतरी
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल फिर महंगा हुआ। भोपाल समेत कई शहरों में पेट्रोल 116 रुपए और डीजल 100 रुपए के करीब पहुंचा।
मध्य प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने फिर से आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रविवार सुबह जो नए रेट जारी हुए, उनके मुताबिक कई शहरों में डीजल 100 रुपए प्रति लीटर के पार चला गया है, जबकि पेट्रोल 115 से 116 रुपए के बीच बिक रहा है। भोपाल की बात करें तो यहां पेट्रोल 114.65 रुपए और डीजल 99.74 रुपए प्रति लीटर हो गया है। तेल कंपनियों ने 11 दिनों में चौथी बार कीमतें बढ़ाई हैं। इस बार पेट्रोल में करीब 2.61 रुपए और डीजल में 2.71 रुपए प्रति लीटर का इजाफा देखने को मिला है। इन लगातार बढ़ते दामों से ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और आम जनता में नाराजगी भी साफ नजर आ रही है।
प्रदेश के बड़े शहरों में उज्जैन अब सबसे महंगा शहर बन गया है, जहां पेट्रोल 115.03 रुपए और डीजल 100.11 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। इंदौर में पेट्रोल 114.54 और डीजल 99.57 रूपए पर पहुंच गया है। जबलपुर और ग्वालियर में भी दामों में तेजी देखने को मिली है। पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही लोग बढ़े हुए रेट को लेकर बातें करते दिखे। कुछ का कहना था कि पिछले डेढ़ हफ्ते में अचानक खर्च बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक, 15 मई से अब तक चार बार रेट बढ़ चुके हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें करीब 8 रुपए प्रति लीटर बढ़ गई हैं।
डीजल के 100 रुपए के करीब पहुंचने का असर रोजमर्रा की चीजों पर भी दिख सकता है। ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों का कहना है कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रही तो उन्हें मालभाड़ा बढ़ाना पड़ सकता है। इससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल, राशन और अन्य सामग्रियों की कीमतें बढ़ सकती हैं। खेती-किसानी पर भी इसका असर होगा, क्योंकि ट्रैक्टर और डीजल पंप चलाने का खर्च बढ़ जाएगा। इसके अलावा, बस और ऑटो किराए में बढ़ोतरी की भी संभावना जताई जा रही है। भोपाल और इंदौर में कुछ निजी स्कूल संचालकों ने यह भी कहा है कि अगर डीजल महंगा रहा तो स्कूल बस फीस पर असर पड़ सकता है।
अधिकारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी इसकी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। हाल ही में क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, लेकिन अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखी गई थीं, जिससे उन पर दबाव बढ़ा है। सूत्रों के अनुसार सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री में भारी नुकसान झेल रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों ने भी चेतावनी दी है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में कीमतों में और बदलाव हो सकता है।
असल में, उपभोक्ताओं तक पहुंचते-पहुंचते पेट्रोल-डीजल की कीमत कई स्तरों पर गुजरती है। कच्चे तेल की बेस कीमत के अलावा रिफाइनिंग खर्च, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार का वैट भी इसमें शामिल होता है। मध्य प्रदेश में वैट दरें ज्यादा होने की वजह से यहां ईंधन कई राज्यों की तुलना में महंगा पड़ता है। यही कारण है कि सीमावर्ती इलाकों में लोग उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से पेट्रोल भरवाने जाते भी नजर आते हैं।
राजनीतिक बयानबाजी भी अब तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महंगाई का बोझ लगातार जनता पर डाला जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पहले ही चेतावनी दी गई थी कि कीमतें बढ़ सकती हैं, लेकिन समय रहते इस पर कोई कदम नहीं उठाए गए। फिलहाल बढ़ते पेट्रोल-डीजल रेट ने आम आदमी के महीने का बजट जरूर बिगाड़ दिया है और आने वाले दिनों में महंगाई का असर और बढ़ सकता है।
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MP में पेट्रोल 116 के पार, डीजल 100 रुपये पहुंचा, 11 दिन में हुई चौथी बढ़ोतरी
भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने फिर से आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रविवार सुबह जो नए रेट जारी हुए, उनके मुताबिक कई शहरों में डीजल 100 रुपए प्रति लीटर के पार चला गया है, जबकि पेट्रोल 115 से 116 रुपए के बीच बिक रहा है। भोपाल की बात करें तो यहां पेट्रोल 114.65 रुपए और डीजल 99.74 रुपए प्रति लीटर हो गया है। तेल कंपनियों ने 11 दिनों में चौथी बार कीमतें बढ़ाई हैं। इस बार पेट्रोल में करीब 2.61 रुपए और डीजल में 2.71 रुपए प्रति लीटर का इजाफा देखने को मिला है। इन लगातार बढ़ते दामों से ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और आम जनता में नाराजगी भी साफ नजर आ रही है।
प्रदेश के बड़े शहरों में उज्जैन अब सबसे महंगा शहर बन गया है, जहां पेट्रोल 115.03 रुपए और डीजल 100.11 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। इंदौर में पेट्रोल 114.54 और डीजल 99.57 रूपए पर पहुंच गया है। जबलपुर और ग्वालियर में भी दामों में तेजी देखने को मिली है। पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही लोग बढ़े हुए रेट को लेकर बातें करते दिखे। कुछ का कहना था कि पिछले डेढ़ हफ्ते में अचानक खर्च बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक, 15 मई से अब तक चार बार रेट बढ़ चुके हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें करीब 8 रुपए प्रति लीटर बढ़ गई हैं।
डीजल के 100 रुपए के करीब पहुंचने का असर रोजमर्रा की चीजों पर भी दिख सकता है। ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों का कहना है कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रही तो उन्हें मालभाड़ा बढ़ाना पड़ सकता है। इससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल, राशन और अन्य सामग्रियों की कीमतें बढ़ सकती हैं। खेती-किसानी पर भी इसका असर होगा, क्योंकि ट्रैक्टर और डीजल पंप चलाने का खर्च बढ़ जाएगा। इसके अलावा, बस और ऑटो किराए में बढ़ोतरी की भी संभावना जताई जा रही है। भोपाल और इंदौर में कुछ निजी स्कूल संचालकों ने यह भी कहा है कि अगर डीजल महंगा रहा तो स्कूल बस फीस पर असर पड़ सकता है।
अधिकारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी इसकी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। हाल ही में क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, लेकिन अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखी गई थीं, जिससे उन पर दबाव बढ़ा है। सूत्रों के अनुसार सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री में भारी नुकसान झेल रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों ने भी चेतावनी दी है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में कीमतों में और बदलाव हो सकता है।
असल में, उपभोक्ताओं तक पहुंचते-पहुंचते पेट्रोल-डीजल की कीमत कई स्तरों पर गुजरती है। कच्चे तेल की बेस कीमत के अलावा रिफाइनिंग खर्च, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार का वैट भी इसमें शामिल होता है। मध्य प्रदेश में वैट दरें ज्यादा होने की वजह से यहां ईंधन कई राज्यों की तुलना में महंगा पड़ता है। यही कारण है कि सीमावर्ती इलाकों में लोग उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से पेट्रोल भरवाने जाते भी नजर आते हैं।
राजनीतिक बयानबाजी भी अब तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महंगाई का बोझ लगातार जनता पर डाला जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पहले ही चेतावनी दी गई थी कि कीमतें बढ़ सकती हैं, लेकिन समय रहते इस पर कोई कदम नहीं उठाए गए। फिलहाल बढ़ते पेट्रोल-डीजल रेट ने आम आदमी के महीने का बजट जरूर बिगाड़ दिया है और आने वाले दिनों में महंगाई का असर और बढ़ सकता है।
