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जयपुर से बैतूल पहुंचते ही पकड़ा गया कफ सिरप तस्करी का आरोपी, STF की पूछताछ शुरू
भोपाल,(म.प्र.)
भोपाल में 49,920 ऑनरेक्स कफ सिरप बरामदगी मामले में फरार चल रहे 30 हजार के इनामी आरोपी अर्जुन मालवीय उर्फ निखिल को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया, पांच दिन की रिमांड पर पूछताछ जारी।
भोपाल में सामने आए बड़े कफ सिरप तस्करी मामले में मध्यप्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को बड़ी सफलता मिली है। 49,920 ऑनरेक्स कफ सिरप की बरामदगी के बाद से फरार चल रहे 30 हजार रुपए के इनामी आरोपी अर्जुन मालवीय उर्फ निखिल को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी लंबे समय से जांच एजेंसियों की पकड़ से दूर था और गिरफ्तारी से बचने के लिए राजस्थान के जयपुर में छिपकर रह रहा था। हालांकि, जैसे ही वह अपने एक परिचित से मिलने बैतूल पहुंचा, एसटीएफ की टीम ने उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
एसपी एसटीएफ भोपाल राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार गांधी नगर क्षेत्र में संचालित अवैध कफ सिरप फैक्ट्री के खुलासे के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ाया गया था। इसी दौरान अर्जुन मालवीय का नाम सामने आया। जांच एजेंसियों को उसके नेटवर्क और गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिली थीं। इसके बाद एसटीएफ ने उसकी तलाश तेज कर दी और उसकी लोकेशन, मोबाइल संपर्कों तथा संभावित ठिकानों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग स्थानों पर रह रहा था ताकि पुलिस तक उसकी पहुंच न हो सके।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी ने भोपाल के बागसेवनिया इलाके स्थित सुरेंद्र पैलेस में अर्जुन ट्रेडर्स के नाम से ड्रग लाइसेंस हासिल किया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी लाइसेंस का उपयोग ऑनरेक्स कफ सिरप की खरीद और बिक्री से जुड़े दस्तावेज तैयार करने के लिए किया जा रहा था। कागजों में पूरा कारोबार वैध दिखाया जा रहा था, जबकि वास्तविक गतिविधियां संदेह के घेरे में थीं। एसटीएफ ने जब लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड और व्यापारिक गतिविधियों की जांच की तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।
अधिकारियों के अनुसार जिस दुकान के नाम पर लाइसेंस लिया गया था, वहां वास्तविक व्यापारिक गतिविधियां लगभग नहीं के बराबर थीं। जांच के दौरान टीम को दुकान में ऑनरेक्स कफ सिरप की एक भी बोतल नहीं मिली। बताया जा रहा है कि करीब दस महीने पहले केवल लाइसेंस प्राप्त करने की औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए दुकान खोली गई थी। इसके बाद उसका इस्तेमाल मुख्य रूप से दस्तावेजी रिकॉर्ड तैयार करने के लिए किया जाता रहा। एसटीएफ को आशंका है कि यह पूरा तंत्र अवैध सप्लाई को वैध कारोबार का रूप देने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।
कफ सिरप तस्करी का यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि ऑनरेक्स जैसी दवाओं का दुरुपयोग नशे के रूप में किए जाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बरामद की गई बड़ी खेप किन-किन क्षेत्रों में भेजी जानी थी और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक आरोपी से पूछताछ के दौरान कई नाम और स्थान सामने आने की संभावना है, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ की टीम आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि अर्जुन मालवीय से मिलने वाली जानकारी पूरे नेटवर्क की परतें खोल सकती है। जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि कफ सिरप की सप्लाई कहां से हो रही थी, किन माध्यमों से इसका परिवहन किया जा रहा था और किन लोगों को इसका लाभ मिल रहा था। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि लाइसेंस जारी कराने की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई थी।
पांच दिन की रिमांड के दौरान आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है। एसटीएफ को उम्मीद है कि इस कार्रवाई से कफ सिरप तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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जयपुर से बैतूल पहुंचते ही पकड़ा गया कफ सिरप तस्करी का आरोपी, STF की पूछताछ शुरू
भोपाल,(म.प्र.)
भोपाल में सामने आए बड़े कफ सिरप तस्करी मामले में मध्यप्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को बड़ी सफलता मिली है। 49,920 ऑनरेक्स कफ सिरप की बरामदगी के बाद से फरार चल रहे 30 हजार रुपए के इनामी आरोपी अर्जुन मालवीय उर्फ निखिल को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी लंबे समय से जांच एजेंसियों की पकड़ से दूर था और गिरफ्तारी से बचने के लिए राजस्थान के जयपुर में छिपकर रह रहा था। हालांकि, जैसे ही वह अपने एक परिचित से मिलने बैतूल पहुंचा, एसटीएफ की टीम ने उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
एसपी एसटीएफ भोपाल राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार गांधी नगर क्षेत्र में संचालित अवैध कफ सिरप फैक्ट्री के खुलासे के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ाया गया था। इसी दौरान अर्जुन मालवीय का नाम सामने आया। जांच एजेंसियों को उसके नेटवर्क और गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिली थीं। इसके बाद एसटीएफ ने उसकी तलाश तेज कर दी और उसकी लोकेशन, मोबाइल संपर्कों तथा संभावित ठिकानों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग स्थानों पर रह रहा था ताकि पुलिस तक उसकी पहुंच न हो सके।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी ने भोपाल के बागसेवनिया इलाके स्थित सुरेंद्र पैलेस में अर्जुन ट्रेडर्स के नाम से ड्रग लाइसेंस हासिल किया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी लाइसेंस का उपयोग ऑनरेक्स कफ सिरप की खरीद और बिक्री से जुड़े दस्तावेज तैयार करने के लिए किया जा रहा था। कागजों में पूरा कारोबार वैध दिखाया जा रहा था, जबकि वास्तविक गतिविधियां संदेह के घेरे में थीं। एसटीएफ ने जब लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड और व्यापारिक गतिविधियों की जांच की तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।
अधिकारियों के अनुसार जिस दुकान के नाम पर लाइसेंस लिया गया था, वहां वास्तविक व्यापारिक गतिविधियां लगभग नहीं के बराबर थीं। जांच के दौरान टीम को दुकान में ऑनरेक्स कफ सिरप की एक भी बोतल नहीं मिली। बताया जा रहा है कि करीब दस महीने पहले केवल लाइसेंस प्राप्त करने की औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए दुकान खोली गई थी। इसके बाद उसका इस्तेमाल मुख्य रूप से दस्तावेजी रिकॉर्ड तैयार करने के लिए किया जाता रहा। एसटीएफ को आशंका है कि यह पूरा तंत्र अवैध सप्लाई को वैध कारोबार का रूप देने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।
कफ सिरप तस्करी का यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि ऑनरेक्स जैसी दवाओं का दुरुपयोग नशे के रूप में किए जाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बरामद की गई बड़ी खेप किन-किन क्षेत्रों में भेजी जानी थी और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक आरोपी से पूछताछ के दौरान कई नाम और स्थान सामने आने की संभावना है, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ की टीम आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि अर्जुन मालवीय से मिलने वाली जानकारी पूरे नेटवर्क की परतें खोल सकती है। जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि कफ सिरप की सप्लाई कहां से हो रही थी, किन माध्यमों से इसका परिवहन किया जा रहा था और किन लोगों को इसका लाभ मिल रहा था। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि लाइसेंस जारी कराने की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई थी।
पांच दिन की रिमांड के दौरान आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है। एसटीएफ को उम्मीद है कि इस कार्रवाई से कफ सिरप तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
