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MP में TET पर बड़ा अपडेट, किन शिक्षकों के लिए जरूरी होगी परीक्षा, जल्द आएगा आदेश
भोपाल (म.प्र.)
MP TET को लेकर नए नियम जल्द, शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता और छूट पर विभाग करेगा बड़ा फैसला
मध्यप्रदेश में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग जल्द ही नए निर्देश जारी करने की तैयारी में है, जिनमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य होगा और किन्हें इससे छूट दी जा सकती है। यह निर्णय प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों पर सीधा असर डाल सकता है।
नए आदेश की तैयारी तेज
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नए आदेश में TET की अनिवार्यता और छूट से जुड़े सभी पहलुओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए। विभाग का उद्देश्य है कि शिक्षकों के बीच किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे और नियम पारदर्शी तरीके से लागू किए जा सकें।
कानूनी राय के बाद होगा अगला कदम
इस मामले में शासकीय अधिवक्ता से विधिक राय लेने की प्रक्रिया जारी है। जैसे ही यह राय प्राप्त होगी, राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने पर निर्णय लेगी। इससे पहले ही विभाग आंतरिक स्तर पर अपनी तैयारी मजबूत कर रहा है।
बैठक में लिए गए अहम फैसले
सोमवार को लोक शिक्षण आयुक्त की अध्यक्षता में विभिन्न कर्मचारी संगठनों और अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिए गए। तय किया गया कि जिन शिक्षकों के वेतनवृद्धि और समयमान वेतनमान से जुड़े मामले लंबित हैं, उन्हें जल्द निपटाया जाएगा और संबंधित आदेश जारी किए जाएंगे।
प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की तैयारी
यदि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश यथावत रहते हैं और TET अनिवार्य रहता है, तो परीक्षा देने वाले शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह प्रशिक्षण तहसील और विकासखंड स्तर पर आयोजित होगा, जिसमें सिलेबस आधारित मार्गदर्शन भी दिया जाएगा ताकि शिक्षक परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकें।
डीपीआई स्तर पर समाधान बैठक
लंबित समस्याओं के समाधान के लिए डीपीआई स्तर पर एक परामर्शदात्री बैठक आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया है। इस बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा, जिससे उनके सुझावों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जा सकें।
कुछ संगठनों ने जताई नाराजगी
हालांकि इस बैठक से शिक्षक संगठनों का एक वर्ग संतुष्ट नहीं दिखा। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि बैठक अचानक बुलाई गई थी, जिससे सभी संगठनों की उपस्थिति संभव नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी निर्णय को वे तभी स्वीकार करेंगे जब चर्चा अधिकृत प्रतिनिधिमंडल के साथ की जाएगी।
इसी तरह आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि बैठक में जिन संगठनों को शामिल किया गया, वे TET से सीधे प्रभावित नहीं हैं, जबकि प्रभावित संगठनों को नजरअंदाज किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर
इस पूरे मामले की जड़ में सर्वोच्च न्यायालय का सितंबर 2025 का आदेश है, जिसमें कहा गया था कि शिक्षण सेवा में बने रहने या पदोन्नति पाने के लिए सभी शिक्षकों को TET पास करना जरूरी होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से अधिक समय शेष है, उन्हें TET अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण करना होगा, अन्यथा उन्हें सेवा छोड़नी पड़ सकती है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का विकल्प चुनना होगा।
TET परीक्षा का महत्व
TET एक पात्रता परीक्षा है जो यह सुनिश्चित करती है कि कोई अभ्यर्थी कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने के लिए योग्य है या नहीं। इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया था और शिक्षकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इसे अनिवार्य बनाया गया।
पूरा विवाद क्या है
शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता को लेकर RTE कानून के तहत NCTE ने 2010 में TET को अनिवार्य किया था। इसके बाद शिक्षकों को इसे पास करने के लिए समय भी दिया गया। हालांकि कई मामलों में यह मुद्दा अदालत तक पहुंचा और अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग फैसले सामने आए। अब सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य सरकार को नियमों को फिर से स्पष्ट करना पड़ रहा है।
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MP में TET पर बड़ा अपडेट, किन शिक्षकों के लिए जरूरी होगी परीक्षा, जल्द आएगा आदेश
भोपाल (म.प्र.)
मध्यप्रदेश में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग जल्द ही नए निर्देश जारी करने की तैयारी में है, जिनमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य होगा और किन्हें इससे छूट दी जा सकती है। यह निर्णय प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों पर सीधा असर डाल सकता है।
नए आदेश की तैयारी तेज
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नए आदेश में TET की अनिवार्यता और छूट से जुड़े सभी पहलुओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए। विभाग का उद्देश्य है कि शिक्षकों के बीच किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे और नियम पारदर्शी तरीके से लागू किए जा सकें।
कानूनी राय के बाद होगा अगला कदम
इस मामले में शासकीय अधिवक्ता से विधिक राय लेने की प्रक्रिया जारी है। जैसे ही यह राय प्राप्त होगी, राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने पर निर्णय लेगी। इससे पहले ही विभाग आंतरिक स्तर पर अपनी तैयारी मजबूत कर रहा है।
बैठक में लिए गए अहम फैसले
सोमवार को लोक शिक्षण आयुक्त की अध्यक्षता में विभिन्न कर्मचारी संगठनों और अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिए गए। तय किया गया कि जिन शिक्षकों के वेतनवृद्धि और समयमान वेतनमान से जुड़े मामले लंबित हैं, उन्हें जल्द निपटाया जाएगा और संबंधित आदेश जारी किए जाएंगे।
प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की तैयारी
यदि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश यथावत रहते हैं और TET अनिवार्य रहता है, तो परीक्षा देने वाले शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह प्रशिक्षण तहसील और विकासखंड स्तर पर आयोजित होगा, जिसमें सिलेबस आधारित मार्गदर्शन भी दिया जाएगा ताकि शिक्षक परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकें।
डीपीआई स्तर पर समाधान बैठक
लंबित समस्याओं के समाधान के लिए डीपीआई स्तर पर एक परामर्शदात्री बैठक आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया है। इस बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा, जिससे उनके सुझावों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जा सकें।
कुछ संगठनों ने जताई नाराजगी
हालांकि इस बैठक से शिक्षक संगठनों का एक वर्ग संतुष्ट नहीं दिखा। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि बैठक अचानक बुलाई गई थी, जिससे सभी संगठनों की उपस्थिति संभव नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी निर्णय को वे तभी स्वीकार करेंगे जब चर्चा अधिकृत प्रतिनिधिमंडल के साथ की जाएगी।
इसी तरह आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि बैठक में जिन संगठनों को शामिल किया गया, वे TET से सीधे प्रभावित नहीं हैं, जबकि प्रभावित संगठनों को नजरअंदाज किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर
इस पूरे मामले की जड़ में सर्वोच्च न्यायालय का सितंबर 2025 का आदेश है, जिसमें कहा गया था कि शिक्षण सेवा में बने रहने या पदोन्नति पाने के लिए सभी शिक्षकों को TET पास करना जरूरी होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से अधिक समय शेष है, उन्हें TET अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण करना होगा, अन्यथा उन्हें सेवा छोड़नी पड़ सकती है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का विकल्प चुनना होगा।
TET परीक्षा का महत्व
TET एक पात्रता परीक्षा है जो यह सुनिश्चित करती है कि कोई अभ्यर्थी कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने के लिए योग्य है या नहीं। इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया था और शिक्षकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इसे अनिवार्य बनाया गया।
पूरा विवाद क्या है
शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता को लेकर RTE कानून के तहत NCTE ने 2010 में TET को अनिवार्य किया था। इसके बाद शिक्षकों को इसे पास करने के लिए समय भी दिया गया। हालांकि कई मामलों में यह मुद्दा अदालत तक पहुंचा और अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग फैसले सामने आए। अब सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य सरकार को नियमों को फिर से स्पष्ट करना पड़ रहा है।
