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आबकारी अफसर पर कांग्रेस को मदद का आरोप, भाजपा विधायक ने सीएम को लिखा पत्र
Jagran Desk
मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों अफसरशाही बनाम जनप्रतिनिधि का मुद्दा फिर चर्चा में है। सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता और भाजपा विधायक गोपाल भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त राकेश कुर्मी को हटाने की मांग की है।
पत्र में गंभीर आरोप
विधायक गोपाल भार्गव द्वारा लिखा गया यह पत्र अब सार्वजनिक हो चुका है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान आबकारी अधिकारी राकेश कुर्मी ने कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति पटेल की हरसंभव मदद की। पत्र के मुताबिक, अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए चुनाव के दौरान शराब और पैसों की सप्लाई कर कांग्रेस उम्मीदवार को सहयोग किया।
अफसरशाही बनाम राजनीति की बहस
भार्गव ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि चुनाव जैसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी सरकारी अधिकारी की राजनीतिक दल या उम्मीदवार को इस तरह से मदद करना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि ऐसे अधिकारी को तत्काल पद से हटाकर कार्रवाई की जाए।
इस पत्र के सामने आने के बाद सियासी हलकों में चर्चा है कि प्रदेश में अफसरशाही इतनी मजबूत हो चुकी है कि खुद सत्ता पक्ष के विधायक भी सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखने पर मजबूर हो रहे हैं।
विपक्ष को मिला मुद्दा
पत्र का खुलासा होने के बाद कांग्रेस ने भी इस मामले को तूल देने की कोशिश की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब भाजपा के विधायक ही अफसरों पर सवाल उठा रहे हैं तो यह साफ संकेत है कि प्रशासन पर भाजपा सरकार का नियंत्रण कमजोर हो गया है।
बड़ा राजनीतिक संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि गोपाल भार्गव जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता का इस तरह का कदम दो संकेत देता है। पहला, भाजपा के भीतर भी अफसरशाही को लेकर असंतोष गहरा रहा है। दूसरा, यह घटना सरकार और संगठन के बीच तालमेल की कमी को भी उजागर करती है।
आगे की कार्रवाई पर निगाहें
अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर हैं कि वे विधायक के पत्र पर क्या निर्णय लेते हैं। यदि राकेश कुर्मी पर कार्रवाई होती है तो यह सत्ता पक्ष के भीतर उठ रही आवाज़ों को शांत कर सकता है, लेकिन यदि मामला लंबा खिंचता है तो यह भाजपा के लिए अंदरूनी असंतोष का बड़ा कारण भी बन सकता है।
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Jagran Desk
मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों अफसरशाही बनाम जनप्रतिनिधि का मुद्दा फिर चर्चा में है। सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता और भाजपा विधायक गोपाल भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त राकेश कुर्मी को हटाने की मांग की है।
पत्र में गंभीर आरोप
विधायक गोपाल भार्गव द्वारा लिखा गया यह पत्र अब सार्वजनिक हो चुका है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान आबकारी अधिकारी राकेश कुर्मी ने कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति पटेल की हरसंभव मदद की। पत्र के मुताबिक, अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए चुनाव के दौरान शराब और पैसों की सप्लाई कर कांग्रेस उम्मीदवार को सहयोग किया।
अफसरशाही बनाम राजनीति की बहस
भार्गव ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि चुनाव जैसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी सरकारी अधिकारी की राजनीतिक दल या उम्मीदवार को इस तरह से मदद करना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि ऐसे अधिकारी को तत्काल पद से हटाकर कार्रवाई की जाए।
इस पत्र के सामने आने के बाद सियासी हलकों में चर्चा है कि प्रदेश में अफसरशाही इतनी मजबूत हो चुकी है कि खुद सत्ता पक्ष के विधायक भी सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखने पर मजबूर हो रहे हैं।
विपक्ष को मिला मुद्दा
पत्र का खुलासा होने के बाद कांग्रेस ने भी इस मामले को तूल देने की कोशिश की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब भाजपा के विधायक ही अफसरों पर सवाल उठा रहे हैं तो यह साफ संकेत है कि प्रशासन पर भाजपा सरकार का नियंत्रण कमजोर हो गया है।
बड़ा राजनीतिक संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि गोपाल भार्गव जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता का इस तरह का कदम दो संकेत देता है। पहला, भाजपा के भीतर भी अफसरशाही को लेकर असंतोष गहरा रहा है। दूसरा, यह घटना सरकार और संगठन के बीच तालमेल की कमी को भी उजागर करती है।
आगे की कार्रवाई पर निगाहें
अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर हैं कि वे विधायक के पत्र पर क्या निर्णय लेते हैं। यदि राकेश कुर्मी पर कार्रवाई होती है तो यह सत्ता पक्ष के भीतर उठ रही आवाज़ों को शांत कर सकता है, लेकिन यदि मामला लंबा खिंचता है तो यह भाजपा के लिए अंदरूनी असंतोष का बड़ा कारण भी बन सकता है।
