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ब्राह्मण बेटा दलित युवती के साथ लिव इन में, गांव में मां-बाप का सामाजिक बहिष्कार
Damoh, MP
दमोह में सामाजिक बहिष्कार से जुड़ा एक मामला सामने आया है. बुजुर्ग दंपति ने जनसुनवाई में कलेक्टर को अपनी पीड़ा सुनाई.
पटेरा थाना इलाके में छुआछूत और सामाजिक बहिष्कार से जुड़ा मामला सामना आया है. दरअसल यहां एक ब्राह्मण बुजुर्ग दंपति ने कलेक्टर दफ्तर में पेश होकर अपनी परेशानी कलेक्टर को सुनाई है. जिसमें उन्होंने बताया है कि उन्हें अपने गांव में परिवार और समाज के लोगों ने बहिष्कृत कर दिया है. इसकी वजह ये है कि उनका बेटा गांव के बाहर मजदूरी करता है. बेटे पर आरोप है कि जहां वो मजदूरी करता है,वहां वो एक दलित युवती के साथ रहता है. इस वजह से ना तो उन्हें सार्वजनिक कुएं से पानी भरने दिया जाता है और ना ही गांव के किसी सामाजिक कार्यक्रम में बुलाया जाता है. कलेक्टर ने पुलिस को मामले के जांच के आदेश दिए हैं.
क्या है मामला
मंगलवार को दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर की जनसुनवाई में गांव के बुजुर्ग दंपति ने कलेक्टर को अपनी पीड़ा सुनाई. उनका कहना है कि "गांव में हमारे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है और हमसे छुआछूत वाला व्यवहार किया जा रहा है. ना तो हमें सार्वजनिक कुएं और नल से पानी भरने दिया जा रहा है और ना ही गांव में होने वाले किसी भी सामाजिक या सार्वजनिक कार्यक्रम में हमें शामिल होने दिया जा रहा है. यहां तक कि हमारे परिवार के लोगों ने ही हमारा बहिष्कार कर दिया है. हम पानी भरने जाते हैं, तो हमारे बर्तन और मटके फोड़ दिए जाते हैं. हमें गांव का कोई व्यक्ति किसी कार्यक्रम में बुलाता है, तो उसे धमकी दी जाती है कि अगर हमें निमंत्रण दोगे, तो बहिष्कार कर देंगे."
आखिर क्यों झेलना पड रहा है बहिष्कार
बुजुर्ग दंपति ने जिला कलेक्टर को अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया है कि "उनके साथ ये इसलिए हो रहा है कि उनका छोटा बेटा गांव से बाहर मजदूरी करता है. परिवार के ही लोगों ने बेटे पर आरोप लगाया कि वह जहां मजदूरी करता है, वहां एक दलित युवती के साथ रहता है. जबकि यह अनर्गल आरोप है वहां मेरा बेटा किसी दलित युवती के साथ नहीं रहता है. इस मामले को लेकर गांव में दो बार पंचायत भी बुलायी गई और एक बार तो उस लड़की को भी बुलाया गया. जिस पर युवक के साथ लिव इन में रहने के आरोप है. लेकिन लड़की ने गांव के पंचों के सामने ऐसा कुछ भी होने से इंकार कर दिया. इसके बाद भी हमारा सामाजिक बहिष्कार जारी है. परिवार और गांव के लोग मानने को तैयार नहीं है."
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
बुजुर्ग दंपत्ति ने कलेक्टर सुधीर कोचर को जब अपनी परेशानी बताई उन्होंने जनसुनवाई में मौजूद पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को मामले की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
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ब्राह्मण बेटा दलित युवती के साथ लिव इन में, गांव में मां-बाप का सामाजिक बहिष्कार
Damoh, MP
पटेरा थाना इलाके में छुआछूत और सामाजिक बहिष्कार से जुड़ा मामला सामना आया है. दरअसल यहां एक ब्राह्मण बुजुर्ग दंपति ने कलेक्टर दफ्तर में पेश होकर अपनी परेशानी कलेक्टर को सुनाई है. जिसमें उन्होंने बताया है कि उन्हें अपने गांव में परिवार और समाज के लोगों ने बहिष्कृत कर दिया है. इसकी वजह ये है कि उनका बेटा गांव के बाहर मजदूरी करता है. बेटे पर आरोप है कि जहां वो मजदूरी करता है,वहां वो एक दलित युवती के साथ रहता है. इस वजह से ना तो उन्हें सार्वजनिक कुएं से पानी भरने दिया जाता है और ना ही गांव के किसी सामाजिक कार्यक्रम में बुलाया जाता है. कलेक्टर ने पुलिस को मामले के जांच के आदेश दिए हैं.
क्या है मामला
मंगलवार को दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर की जनसुनवाई में गांव के बुजुर्ग दंपति ने कलेक्टर को अपनी पीड़ा सुनाई. उनका कहना है कि "गांव में हमारे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है और हमसे छुआछूत वाला व्यवहार किया जा रहा है. ना तो हमें सार्वजनिक कुएं और नल से पानी भरने दिया जा रहा है और ना ही गांव में होने वाले किसी भी सामाजिक या सार्वजनिक कार्यक्रम में हमें शामिल होने दिया जा रहा है. यहां तक कि हमारे परिवार के लोगों ने ही हमारा बहिष्कार कर दिया है. हम पानी भरने जाते हैं, तो हमारे बर्तन और मटके फोड़ दिए जाते हैं. हमें गांव का कोई व्यक्ति किसी कार्यक्रम में बुलाता है, तो उसे धमकी दी जाती है कि अगर हमें निमंत्रण दोगे, तो बहिष्कार कर देंगे."
आखिर क्यों झेलना पड रहा है बहिष्कार
बुजुर्ग दंपति ने जिला कलेक्टर को अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया है कि "उनके साथ ये इसलिए हो रहा है कि उनका छोटा बेटा गांव से बाहर मजदूरी करता है. परिवार के ही लोगों ने बेटे पर आरोप लगाया कि वह जहां मजदूरी करता है, वहां एक दलित युवती के साथ रहता है. जबकि यह अनर्गल आरोप है वहां मेरा बेटा किसी दलित युवती के साथ नहीं रहता है. इस मामले को लेकर गांव में दो बार पंचायत भी बुलायी गई और एक बार तो उस लड़की को भी बुलाया गया. जिस पर युवक के साथ लिव इन में रहने के आरोप है. लेकिन लड़की ने गांव के पंचों के सामने ऐसा कुछ भी होने से इंकार कर दिया. इसके बाद भी हमारा सामाजिक बहिष्कार जारी है. परिवार और गांव के लोग मानने को तैयार नहीं है."
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
बुजुर्ग दंपत्ति ने कलेक्टर सुधीर कोचर को जब अपनी परेशानी बताई उन्होंने जनसुनवाई में मौजूद पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को मामले की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
