मध्यप्रदेश में स्कूली विद्यार्थियों को समय रहते करियर की सही दिशा देने के उद्देश्य से 31 जनवरी तक प्रदेशव्यापी करियर मेला और करियर काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस पहल के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक के करीब 21 लाख विद्यार्थियों को शिक्षा, रोजगार और कौशल आधारित करियर विकल्पों की जानकारी दी जा रही है। कार्यक्रम का संचालन समग्र शिक्षा अभियान, लोक शिक्षण संचालनालय, यूनिसेफ और मध्यप्रदेश ओपन बोर्ड के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है।
यह पहली बार है जब राज्य में इतने बड़े पैमाने पर स्कूल स्तर पर करियर मार्गदर्शन की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, सरकारी सेवाओं, निजी क्षेत्र और स्किल ट्रेनिंग से जुड़े विकल्पों की तथ्यात्मक और व्यावहारिक जानकारी देना है, ताकि वे भविष्य को लेकर सोच-समझकर निर्णय ले सकें।
शिक्षा विभाग के अनुसार, करियर मेला केवल औपचारिक गतिविधि नहीं है, बल्कि इसे छात्रों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसमें अकादमिक कोर्स के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा, स्टार्टअप, स्वरोजगार और जीवन कौशल पर भी चर्चा हो रही है। विभाग का मानना है कि करियर को लेकर भ्रम की स्थिति अक्सर जानकारी के अभाव में पैदा होती है, जिसे इस पहल से काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
कार्यक्रम तीन स्तरों पर संचालित किया जा रहा है। स्कूल परिसरों में करियर मेला लगाया जा रहा है, वहीं मध्यप्रदेश ओपन बोर्ड के माध्यम से यूट्यूब लाइव, वेबिनार और डिजिटल सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। इन सत्रों को टीवी, प्रोजेक्टर, मोबाइल और टैबलेट के जरिए छात्रों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा, ब्लॉक स्तर पर नियुक्त करियर काउंसलर स्कूलों में जाकर सीधे विद्यार्थियों से संवाद कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी समान अवसर मिल सके।
कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए प्रत्येक सरकारी हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल को 5 हजार रुपए का बजट आवंटित किया गया है। हर विद्यालय में एक नोडल शिक्षक और एक तकनीकी नोडल शिक्षक की जिम्मेदारी तय की गई है। ये शिक्षक गतिविधियों का समन्वय, तकनीकी व्यवस्था और दैनिक रिपोर्टिंग संभाल रहे हैं। कार्यक्रम से जुड़ी फोटो, वीडियो और विवरण ‘विमर्श पोर्टल’ पर अपलोड किए जा रहे हैं, जिससे निगरानी और पारदर्शिता बनी रहे।
करियर मेले को चार दिवसीय गतिविधियों में विभाजित किया गया है। पहले दिन कौशल और व्यावसायिक विकल्पों पर चर्चा हो रही है। दूसरे दिन सरकारी सेवाओं और उच्च शिक्षा के अवसरों की जानकारी दी जा रही है। तीसरे दिन यूनिसेफ के सहयोग से करियर कार्ड्स के जरिए लाइव कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं, जबकि अंतिम दिन छात्रों से फीडबैक लेकर कार्यक्रम का मूल्यांकन किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि आने वाले समय में इस मॉडल को और व्यापक बनाने पर विचार किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को स्कूल स्तर से ही स्पष्ट और व्यावहारिक करियर रोडमैप मिल सके।
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