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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किए भगवान विष्णु वराह के दर्शन, प्रदेशवासियों की समृद्धि की कामना
Jabalpur
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर जिले के मझौली में स्थित ऐतिहासिक विष्णु वराह मंदिर पहुंचकर भगवान वराह के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इस मौके पर उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
जबलपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित मझौली का यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि स्थापत्य कला के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का मूल निर्माण कार्य 11वीं शताब्दी में कल्चुरी राजवंश के शासनकाल में हुआ था। कालांतर में यह मंदिर ध्वस्त हो गया था, जिसे 18वीं शताब्दी में फिर से पुनर्निर्मित किया गया।
विशेष बात यह है कि मंदिर में स्थापित भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा विश्व की सबसे विशाल और एकमात्र ऐसी प्रतिमा मानी जाती है जिसकी आज भी नियमित पूजा की जाती है। यह प्रतिमा मंदिर के गर्भगृह में स्थापित है और श्रद्धालुओं के बीच इसकी अत्यंत मान्यता है।
धार्मिक और पौराणिक महत्व के साथ-साथ यह मंदिर मध्यप्रदेश के राज्य संरक्षित स्मारकों में भी शामिल है। मंदिर की मूर्तिकला, शिल्पकला और स्थापत्य की भव्यता इसे दर्शनीय बनाती है। मुख्यमंत्री के इस दौरे को धार्मिक आस्था के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किए भगवान विष्णु वराह के दर्शन, प्रदेशवासियों की समृद्धि की कामना
Jabalpur
जबलपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित मझौली का यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि स्थापत्य कला के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का मूल निर्माण कार्य 11वीं शताब्दी में कल्चुरी राजवंश के शासनकाल में हुआ था। कालांतर में यह मंदिर ध्वस्त हो गया था, जिसे 18वीं शताब्दी में फिर से पुनर्निर्मित किया गया।
विशेष बात यह है कि मंदिर में स्थापित भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा विश्व की सबसे विशाल और एकमात्र ऐसी प्रतिमा मानी जाती है जिसकी आज भी नियमित पूजा की जाती है। यह प्रतिमा मंदिर के गर्भगृह में स्थापित है और श्रद्धालुओं के बीच इसकी अत्यंत मान्यता है।
धार्मिक और पौराणिक महत्व के साथ-साथ यह मंदिर मध्यप्रदेश के राज्य संरक्षित स्मारकों में भी शामिल है। मंदिर की मूर्तिकला, शिल्पकला और स्थापत्य की भव्यता इसे दर्शनीय बनाती है। मुख्यमंत्री के इस दौरे को धार्मिक आस्था के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
