पद्मश्री से सम्मानित विभूतियों को CM ने दी बधाई, जानिए कौन हैं ये गौरव!

JAGRAN DESK

मध्य प्रदेश की मिट्टी में समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतर कार्य करने वाली पांच विभूतियों को पद्मश्री से सम्मानित किया गया. प्रदेश और देशभर से सम्मानित विभूतियों को बधाइयां मिल रही हैं. सीएम डॉ. मोहन यादव ने भी बधाई दी है. जानें क्या कहा..

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पद्मश्री से सम्मानित होने वाली मध्यप्रदेश की 5 विभूतियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने कहा है कि भेरूसिंह चौहान (कला),  बीके जैन (चिकित्सा),  हरचंदन सिंह भट्टी (कला), जगदीश जोशिला (साहित्य एवं शिक्षा) और सैली होल्कर (व्यापार एवं उद्योग) ने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर प्रदेश के नाम को गौरवान्वित किया है.

'कड़ी मेहनत का सम्मान हुआ है'

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि यह अत्यन्त गर्व का क्षण है. मध्यप्रदेश की विभूतियों का पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जाना, उनकी कड़ी मेहनत और अपने कार्यक्षेत्र में की गई सेवा का सच्चा सम्मान है. मुख्यमंत्री ने सम्मानित होने वाली सभी विभूतियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह सम्मान न केवल इन व्यक्तियों की उपलब्धियों को रेखांकित करता है, बल्कि समाज को प्रेरणा भी प्रदान करता है. उन्होंने विश्वास जताया कि देश और प्रदेश के विकास में इन विभूतियों का योगदान आगे भी महत्त्वपूर्ण साबित होगा.

'भोपाल के कलाकार ने बढ़ाया मान'

कला के क्षेत्र में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार भारत भवन के रूपांकर विभाग के निदेशक और भोपाल के आर्ट डिजाइनर हरचंदन सिंह भट्टी को दिया गया है. वह लंबे समय से विभिन्न प्रकार की डिजाइन तैयार कर रहे हैं. हरचंदन सिंह भट्टी ने भारत भवन के अलावा जनजातीय संग्रहालय के आदिवासी परिवेश को भी डिजाइन किया है.

हरचंदन सिंह कहते हैं, "मैं बचपन से चित्रकार बनना चाहता था, लेकिन चित्रकार नहीं बन पाया. लेकिन डिज़ाइनर जरूर बन गया. मैं इन दोनों कामों को एक-दूसरे का पर्याय मानता हूं. क्योंकि कलाकार का जीवन हमेशा कला से जुड़ा होता है, और यही जुड़ाव सुखद अनुभूति देता है." हरचंदन आगे कहते हैं, "मुझे इस सम्मान की जानकारी अपने मित्रों और शासन स्तर से मिली.

उज्जैन के त्रिवेणी म्यूजियम को संवारा

इन्होंने जनजातीय संग्रहालय स्वरूप महत्वपूर्ण योगदान दिया. भारत भवन सर्विस में 1981 से जुड़े रहे, फिलहाल यहां रूपांकर विभाग के निदेशक हैं. उज्जैन के त्रिवेणी म्यूजियम को संवारा है. खजुराहो के आदिवासी म्यूजियम साल 2000 में पहली बार 2022-23 में नया स्वरूप दिया.

लोक गायन शैली की विरासत

भैरू सिंह चौहान बचपन से ही पारंपरिक मालवी लोक शैली में भजन गायन से जुड़े रहे. वे भक्ति संगीत की मंडलियों में भजन गाया करते थे. संत कबीर, गोरक्षनाथ, संत दादु, संत मीराबाई, पलटुदास और अन्य संतों की वाणियों को गाया करते थे. उन्हें ये कला विरासत में मिली है. इनके पिता माधु सिंह चौहान भी लोक गायन किया करते थे.

सैली ने महिलाओं को दिया रोजगार

महेश्वर की शालिनी देवी (सैली) होलकर रेशम और सूती महेश्वरी साड़ियां बनाने के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने महेश्वर के पास गुड़ी मुड़ी के नाम से बुनकर परिवारों को बसाया है. यहां की महेश्वरी साड़ी देश-विदेश में पहुंचती है. महेश्वर के साहित्यकार हरीश दुबे बताते हैं कि 1978 में बाजार मंदी के दौर से गुजर रहा था, तब उन्होंने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए महेश्वरी साड़ी व सूती कपड़ों के उत्पादन के लिए रेवा सोसायटी स्थापित की और लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया.

2003 में उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए वूमनवीव चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की. मध्य प्रदेश के महेश्वर और डिंडौरी की महिलाओं को अर्ध-स्वचालित चरखों पर खादी काटने की पहल की. इसके बाद, 2009 में उन्होंने वूमनवीव के गैर-बुनाई पृष्ठभूमि की महिलाओं के लिए गुड़ी मुडी परियोजना शुरू की, जो बिना आजीविका के परिवारों को स्थानीय कपास से सूत कातने के माध्यम से आर्थिक स्वतंत्र बना रही है. फिलहाल यहां 250 से ज्यादा महिला बुनकर और 110 हथकरघे है.

निमाड़ के गौरव

निमाड़ के उपन्यासकार जगदीश जोशीला (76) गोगांवा पांच दशक से हिंदी साहित्य व लोकभाषा निमाड़ी में सृजन कर रहे हैं. उन्होंने साहित्य की हर विधा में कलम चलाई है। उनकी 60 से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके उपन्यास देवीश्री अहिल्याबाई, जननायक टंट्या मामा, संत सिंगाजी, राणा बख्तावर सिंह, आदि शंकराचार्य समेत कई ऐतिहासिक उपन्यास चर्चित रहे हैं.

डॉ. बीके जैन ने समाज सेवा से कमाया नाम

डॉ. बीके कुमार जैन सतना जिले के चित्रकूट के सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के निदेशक हैं. वे जनरल मेडिसिन / इंटरनल मेडिसिन के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखते हैं. सतना शहर के मूल निवासी हैं. उन्हें यह सम्मान सतना शहर के गौरव दिवस के अवसर पर मिला है. कलेक्टर अनुराग वर्मा ने डॉ. जैन को बधाई दी है.

'जीवन भर की तपस्या का फल मिला है'

इन्होंने शासकीय वेंकट क्रमांक एक विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की. सतना जिले में ये दूसरा पद्मश्री पुरस्कार है. इनसे पूर्व बाबूलाल दाहिया को जैव विविधता एवं अनाज के देसी बीजों के संरक्षण संवर्धन के लिए 2019 में पद्मश्री मिल चुका है. डॉ. बीके जैन के बेटे डॉ. इलेश जैन ने कहा कि चिकित्सा सेवा में जीवन भर की तपस्या का फल मिला है. ईश्वर की कृपा है. इससे हमारे मानव सेवा के संकल्प को और ऊर्जा मिलेगी.

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26 Jan 2025 By दैनिक जागरण

पद्मश्री से सम्मानित विभूतियों को CM ने दी बधाई, जानिए कौन हैं ये गौरव!

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पद्मश्री से सम्मानित होने वाली मध्यप्रदेश की 5 विभूतियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने कहा है कि भेरूसिंह चौहान (कला),  बीके जैन (चिकित्सा),  हरचंदन सिंह भट्टी (कला), जगदीश जोशिला (साहित्य एवं शिक्षा) और सैली होल्कर (व्यापार एवं उद्योग) ने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर प्रदेश के नाम को गौरवान्वित किया है.

'कड़ी मेहनत का सम्मान हुआ है'

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि यह अत्यन्त गर्व का क्षण है. मध्यप्रदेश की विभूतियों का पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जाना, उनकी कड़ी मेहनत और अपने कार्यक्षेत्र में की गई सेवा का सच्चा सम्मान है. मुख्यमंत्री ने सम्मानित होने वाली सभी विभूतियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह सम्मान न केवल इन व्यक्तियों की उपलब्धियों को रेखांकित करता है, बल्कि समाज को प्रेरणा भी प्रदान करता है. उन्होंने विश्वास जताया कि देश और प्रदेश के विकास में इन विभूतियों का योगदान आगे भी महत्त्वपूर्ण साबित होगा.

'भोपाल के कलाकार ने बढ़ाया मान'

कला के क्षेत्र में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार भारत भवन के रूपांकर विभाग के निदेशक और भोपाल के आर्ट डिजाइनर हरचंदन सिंह भट्टी को दिया गया है. वह लंबे समय से विभिन्न प्रकार की डिजाइन तैयार कर रहे हैं. हरचंदन सिंह भट्टी ने भारत भवन के अलावा जनजातीय संग्रहालय के आदिवासी परिवेश को भी डिजाइन किया है.

हरचंदन सिंह कहते हैं, "मैं बचपन से चित्रकार बनना चाहता था, लेकिन चित्रकार नहीं बन पाया. लेकिन डिज़ाइनर जरूर बन गया. मैं इन दोनों कामों को एक-दूसरे का पर्याय मानता हूं. क्योंकि कलाकार का जीवन हमेशा कला से जुड़ा होता है, और यही जुड़ाव सुखद अनुभूति देता है." हरचंदन आगे कहते हैं, "मुझे इस सम्मान की जानकारी अपने मित्रों और शासन स्तर से मिली.

उज्जैन के त्रिवेणी म्यूजियम को संवारा

इन्होंने जनजातीय संग्रहालय स्वरूप महत्वपूर्ण योगदान दिया. भारत भवन सर्विस में 1981 से जुड़े रहे, फिलहाल यहां रूपांकर विभाग के निदेशक हैं. उज्जैन के त्रिवेणी म्यूजियम को संवारा है. खजुराहो के आदिवासी म्यूजियम साल 2000 में पहली बार 2022-23 में नया स्वरूप दिया.

लोक गायन शैली की विरासत

भैरू सिंह चौहान बचपन से ही पारंपरिक मालवी लोक शैली में भजन गायन से जुड़े रहे. वे भक्ति संगीत की मंडलियों में भजन गाया करते थे. संत कबीर, गोरक्षनाथ, संत दादु, संत मीराबाई, पलटुदास और अन्य संतों की वाणियों को गाया करते थे. उन्हें ये कला विरासत में मिली है. इनके पिता माधु सिंह चौहान भी लोक गायन किया करते थे.

सैली ने महिलाओं को दिया रोजगार

महेश्वर की शालिनी देवी (सैली) होलकर रेशम और सूती महेश्वरी साड़ियां बनाने के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने महेश्वर के पास गुड़ी मुड़ी के नाम से बुनकर परिवारों को बसाया है. यहां की महेश्वरी साड़ी देश-विदेश में पहुंचती है. महेश्वर के साहित्यकार हरीश दुबे बताते हैं कि 1978 में बाजार मंदी के दौर से गुजर रहा था, तब उन्होंने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए महेश्वरी साड़ी व सूती कपड़ों के उत्पादन के लिए रेवा सोसायटी स्थापित की और लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया.

2003 में उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए वूमनवीव चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की. मध्य प्रदेश के महेश्वर और डिंडौरी की महिलाओं को अर्ध-स्वचालित चरखों पर खादी काटने की पहल की. इसके बाद, 2009 में उन्होंने वूमनवीव के गैर-बुनाई पृष्ठभूमि की महिलाओं के लिए गुड़ी मुडी परियोजना शुरू की, जो बिना आजीविका के परिवारों को स्थानीय कपास से सूत कातने के माध्यम से आर्थिक स्वतंत्र बना रही है. फिलहाल यहां 250 से ज्यादा महिला बुनकर और 110 हथकरघे है.

निमाड़ के गौरव

निमाड़ के उपन्यासकार जगदीश जोशीला (76) गोगांवा पांच दशक से हिंदी साहित्य व लोकभाषा निमाड़ी में सृजन कर रहे हैं. उन्होंने साहित्य की हर विधा में कलम चलाई है। उनकी 60 से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके उपन्यास देवीश्री अहिल्याबाई, जननायक टंट्या मामा, संत सिंगाजी, राणा बख्तावर सिंह, आदि शंकराचार्य समेत कई ऐतिहासिक उपन्यास चर्चित रहे हैं.

डॉ. बीके जैन ने समाज सेवा से कमाया नाम

डॉ. बीके कुमार जैन सतना जिले के चित्रकूट के सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के निदेशक हैं. वे जनरल मेडिसिन / इंटरनल मेडिसिन के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखते हैं. सतना शहर के मूल निवासी हैं. उन्हें यह सम्मान सतना शहर के गौरव दिवस के अवसर पर मिला है. कलेक्टर अनुराग वर्मा ने डॉ. जैन को बधाई दी है.

'जीवन भर की तपस्या का फल मिला है'

इन्होंने शासकीय वेंकट क्रमांक एक विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की. सतना जिले में ये दूसरा पद्मश्री पुरस्कार है. इनसे पूर्व बाबूलाल दाहिया को जैव विविधता एवं अनाज के देसी बीजों के संरक्षण संवर्धन के लिए 2019 में पद्मश्री मिल चुका है. डॉ. बीके जैन के बेटे डॉ. इलेश जैन ने कहा कि चिकित्सा सेवा में जीवन भर की तपस्या का फल मिला है. ईश्वर की कृपा है. इससे हमारे मानव सेवा के संकल्प को और ऊर्जा मिलेगी.

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-congratulates-padma-shri-who-are-these-5-pride/article-8515

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