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सीएम मोहन यादव: महर्षि सांदीपनि आश्रम में की पूजा, बोले – श्रीकृष्ण को मिली 'जगद्गुरु' की उपाधि
Ujjain, MP
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महर्षि सांदीपनि आश्रम, उज्जैन पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और भगवान श्रीकृष्ण के गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि महर्षि सांदीपनि द्वारा दी गई शिक्षा ही वह नींव थी, जिसने श्रीकृष्ण को 'जगद्गुरु' की उपाधि दिलाई और भारत को ज्ञान की दिशा में अग्रणी बनाया।
सांदीपनि आश्रम में हुई विशेष पूजा, सीएम ने किया कुंडेश्वर महादेव व काल भैरव मंदिर में दर्शन
मुख्यमंत्री ने महर्षि सांदीपनि आश्रम में उपस्थित होकर गुरु के चरणों में नमन किया और पंडित राजेश जोशी के मार्गदर्शन में पूजन संपन्न कराया। इसके पश्चात वे श्री कुंडेश्वर महादेव मंदिर और श्री काल भैरव मंदिर भी पहुंचे, जहां उन्होंने प्रदेश की शांति, समृद्धि और सांस्कृतिक उत्थान की कामना की।
सीएम ने कहा कि, “यह वही भूमि है, जहां करीब 5000 वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने शिक्षा प्राप्त की थी। यहां महर्षि ने मात्र कुछ ही दिनों में 14 विद्याओं और 64 कलाओं का ज्ञान प्रदान किया। यह आश्रम आज भी भारतीय शिक्षा परंपरा का गौरव बना हुआ है।”
‘संपूर्ण विद्यार्थी विकास का प्रतीक है सांदीपनि आश्रम’
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि सांदीपनि आश्रम सिर्फ शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि एक ऐसा आदर्श स्थल है, जहां से विद्यार्थी के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास की परंपरा शुरू हुई। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि, “जो राष्ट्र अपनी गुरु परंपरा और विरासत को नहीं भूलता, वही समृद्धि की राह पर आगे बढ़ता है।”
विद्यार्थियों ने की स्लेट पूजन, परंपराओं का निर्वहन
गुरु पूर्णिमा के इस अवसर पर आश्रम में विशेष पूजन और पंचामृत अभिषेक किया गया। विद्यार्थियों द्वारा स्लेट पूजन की परंपरा भी निभाई गई। यह परंपरा बताती है कि शिक्षा के आरंभ में गुरु की कृपा सर्वोपरि होती है।
‘विरासत से विकास’ की ओर बढ़ता भारत
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी प्राचीन परंपराओं और विरासत को साथ लेकर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत पुनः ‘विश्वगुरु’ की भूमिका में लौटेगा।
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सीएम मोहन यादव: महर्षि सांदीपनि आश्रम में की पूजा, बोले – श्रीकृष्ण को मिली 'जगद्गुरु' की उपाधि
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उन्होंने कहा कि महर्षि सांदीपनि द्वारा दी गई शिक्षा ही वह नींव थी, जिसने श्रीकृष्ण को 'जगद्गुरु' की उपाधि दिलाई और भारत को ज्ञान की दिशा में अग्रणी बनाया।
सांदीपनि आश्रम में हुई विशेष पूजा, सीएम ने किया कुंडेश्वर महादेव व काल भैरव मंदिर में दर्शन
मुख्यमंत्री ने महर्षि सांदीपनि आश्रम में उपस्थित होकर गुरु के चरणों में नमन किया और पंडित राजेश जोशी के मार्गदर्शन में पूजन संपन्न कराया। इसके पश्चात वे श्री कुंडेश्वर महादेव मंदिर और श्री काल भैरव मंदिर भी पहुंचे, जहां उन्होंने प्रदेश की शांति, समृद्धि और सांस्कृतिक उत्थान की कामना की।
सीएम ने कहा कि, “यह वही भूमि है, जहां करीब 5000 वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने शिक्षा प्राप्त की थी। यहां महर्षि ने मात्र कुछ ही दिनों में 14 विद्याओं और 64 कलाओं का ज्ञान प्रदान किया। यह आश्रम आज भी भारतीय शिक्षा परंपरा का गौरव बना हुआ है।”
‘संपूर्ण विद्यार्थी विकास का प्रतीक है सांदीपनि आश्रम’
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि सांदीपनि आश्रम सिर्फ शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि एक ऐसा आदर्श स्थल है, जहां से विद्यार्थी के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास की परंपरा शुरू हुई। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि, “जो राष्ट्र अपनी गुरु परंपरा और विरासत को नहीं भूलता, वही समृद्धि की राह पर आगे बढ़ता है।”
विद्यार्थियों ने की स्लेट पूजन, परंपराओं का निर्वहन
गुरु पूर्णिमा के इस अवसर पर आश्रम में विशेष पूजन और पंचामृत अभिषेक किया गया। विद्यार्थियों द्वारा स्लेट पूजन की परंपरा भी निभाई गई। यह परंपरा बताती है कि शिक्षा के आरंभ में गुरु की कृपा सर्वोपरि होती है।
‘विरासत से विकास’ की ओर बढ़ता भारत
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी प्राचीन परंपराओं और विरासत को साथ लेकर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत पुनः ‘विश्वगुरु’ की भूमिका में लौटेगा।
