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एमपी में ठंड ने दी दस्तक: पहाड़ों की बर्फबारी से गिरा तापमान, 40 जिलों से लौटा मानसून
BHOPAL, MP
मध्यप्रदेश में मानसून पूरी तरह से लौटा नहीं है, लेकिन गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है। पहाड़ों पर हुई बर्फबारी का असर अब मैदानों में भी नजर आने लगा है।
उत्तर से आ रही ठंडी हवाओं ने राज्य के कई हिस्सों में तापमान गिरा दिया है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और नर्मदापुरम सहित कई शहरों में पारा 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है।
राज्य में गुरुवार-शुक्रवार की रात सबसे ठंडा शहर राजगढ़ रहा, जहां न्यूनतम तापमान 14.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं इंदौर में 15.5 डिग्री, भोपाल में 18 डिग्री, उज्जैन में 18.5 डिग्री, ग्वालियर में 18.9 डिग्री और जबलपुर में 21 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। धार, बैतूल, गुना और शिवपुरी में भी पारा 17 डिग्री के आसपास रहा।
पहाड़ों की बर्फबारी से बदली हवा का रुख
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार हो रही बर्फबारी के चलते हवा का रुख उत्तरी दिशा की ओर से ठंडा हो गया है। इसी वजह से मध्यप्रदेश में तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में सुबह-शाम की ठंडक और बढ़ सकती है।
40 से ज्यादा जिलों से लौट चुका है मानसून
राज्य में मानसून की वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। शुक्रवार तक भोपाल, इंदौर, धार, बुरहानपुर, खंडवा, सीहोर, सागर, रायसेन, हरदा, विदिशा, नर्मदापुरम और बैतूल समेत 40 से अधिक जिलों से मानसून विदा हो चुका है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सिंगरौली, सीधी, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट और छिंदवाड़ा जिलों से भी अगले 2 दिन में मानसून की पूरी तरह से विदाई हो जाएगी।
पूर्वी जिलों में अभी बनी रहेगी बारिश की संभावना
मौसम विभाग ने बताया कि पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में अभी हल्की बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है। आने वाले तीन दिनों तक बालाघाट, मंडला, सिवनी और उमरिया जिलों में बादल छाए रहेंगे। शेष जिलों में मौसम साफ रहेगा।
इस सीजन में गुना रहा सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला
मानसूनी सीजन के दौरान इस साल गुना जिले में सबसे ज्यादा 65.6 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं, मंडला और रायसेन में 62 इंच से अधिक और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से अधिक बारिश हुई।
सबसे कम बारिश वाले जिलों में शाजापुर (28.9 इंच), खरगोन (29.6 इंच), खंडवा (32 इंच), बड़वानी (33.5 इंच) और धार (33.6 इंच) शामिल हैं।
इंदौर संभाग की स्थिति में हुआ सुधार
मानसून की शुरुआत में इंदौर और उज्जैन संभाग में बारिश की स्थिति कमजोर थी, लेकिन सितंबर में तेज बारिश ने संतुलन बना दिया। इंदौर में अब सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया है, हालांकि उज्जैन में अभी भी औसत से कम वर्षा हुई है।
ग्वालियर-चंबल में जमकर बरसा मानसून
ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में इस बार मानसून सक्रिय रहा। यहां के सभी जिलों में औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई। कई जगह बाढ़ जैसी स्थिति भी बनी, खासकर छतरपुर, मंडला और उमरिया जिलों में।
अक्टूबर में मौसम का पुराना रिकॉर्ड
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भोपाल में अक्टूबर का औसत अधिकतम तापमान 32.7°C और न्यूनतम 19.1°C रहता है। वर्ष 2012 में तापमान रिकॉर्ड 38°C तक पहुंच गया था।
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इंदौर में 22 अक्टूबर 1999 को रात का तापमान 6.2°C दर्ज हुआ था, जो अब तक का सबसे ठंडा रिकॉर्ड है।
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ग्वालियर में 27 अक्टूबर 1994 को 40.1°C तक तापमान पहुंचा था।
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जबलपुर में 30 अक्टूबर 1952 को न्यूनतम तापमान 10.5°C रहा था।
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उज्जैन में 29 अक्टूबर 1983 को न्यूनतम 8.1°C और 2002 में दिन का तापमान 39°C दर्ज हुआ था।
अब गुलाबी ठंड का इंतजार
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले सप्ताह में मध्यप्रदेश में न्यूनतम तापमान में और गिरावट आएगी। उत्तर भारत से आने वाली ठंडी हवाएं लगातार सक्रिय हैं। इससे सुबह और देर शाम सर्दी का अहसास और बढ़ जाएगा।
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एमपी में ठंड ने दी दस्तक: पहाड़ों की बर्फबारी से गिरा तापमान, 40 जिलों से लौटा मानसून
BHOPAL, MP
उत्तर से आ रही ठंडी हवाओं ने राज्य के कई हिस्सों में तापमान गिरा दिया है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और नर्मदापुरम सहित कई शहरों में पारा 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है।
राज्य में गुरुवार-शुक्रवार की रात सबसे ठंडा शहर राजगढ़ रहा, जहां न्यूनतम तापमान 14.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं इंदौर में 15.5 डिग्री, भोपाल में 18 डिग्री, उज्जैन में 18.5 डिग्री, ग्वालियर में 18.9 डिग्री और जबलपुर में 21 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। धार, बैतूल, गुना और शिवपुरी में भी पारा 17 डिग्री के आसपास रहा।
पहाड़ों की बर्फबारी से बदली हवा का रुख
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार हो रही बर्फबारी के चलते हवा का रुख उत्तरी दिशा की ओर से ठंडा हो गया है। इसी वजह से मध्यप्रदेश में तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में सुबह-शाम की ठंडक और बढ़ सकती है।
40 से ज्यादा जिलों से लौट चुका है मानसून
राज्य में मानसून की वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। शुक्रवार तक भोपाल, इंदौर, धार, बुरहानपुर, खंडवा, सीहोर, सागर, रायसेन, हरदा, विदिशा, नर्मदापुरम और बैतूल समेत 40 से अधिक जिलों से मानसून विदा हो चुका है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सिंगरौली, सीधी, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट और छिंदवाड़ा जिलों से भी अगले 2 दिन में मानसून की पूरी तरह से विदाई हो जाएगी।
पूर्वी जिलों में अभी बनी रहेगी बारिश की संभावना
मौसम विभाग ने बताया कि पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में अभी हल्की बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है। आने वाले तीन दिनों तक बालाघाट, मंडला, सिवनी और उमरिया जिलों में बादल छाए रहेंगे। शेष जिलों में मौसम साफ रहेगा।
इस सीजन में गुना रहा सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला
मानसूनी सीजन के दौरान इस साल गुना जिले में सबसे ज्यादा 65.6 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं, मंडला और रायसेन में 62 इंच से अधिक और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से अधिक बारिश हुई।
सबसे कम बारिश वाले जिलों में शाजापुर (28.9 इंच), खरगोन (29.6 इंच), खंडवा (32 इंच), बड़वानी (33.5 इंच) और धार (33.6 इंच) शामिल हैं।
इंदौर संभाग की स्थिति में हुआ सुधार
मानसून की शुरुआत में इंदौर और उज्जैन संभाग में बारिश की स्थिति कमजोर थी, लेकिन सितंबर में तेज बारिश ने संतुलन बना दिया। इंदौर में अब सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया है, हालांकि उज्जैन में अभी भी औसत से कम वर्षा हुई है।
ग्वालियर-चंबल में जमकर बरसा मानसून
ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में इस बार मानसून सक्रिय रहा। यहां के सभी जिलों में औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई। कई जगह बाढ़ जैसी स्थिति भी बनी, खासकर छतरपुर, मंडला और उमरिया जिलों में।
अक्टूबर में मौसम का पुराना रिकॉर्ड
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भोपाल में अक्टूबर का औसत अधिकतम तापमान 32.7°C और न्यूनतम 19.1°C रहता है। वर्ष 2012 में तापमान रिकॉर्ड 38°C तक पहुंच गया था।
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इंदौर में 22 अक्टूबर 1999 को रात का तापमान 6.2°C दर्ज हुआ था, जो अब तक का सबसे ठंडा रिकॉर्ड है।
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ग्वालियर में 27 अक्टूबर 1994 को 40.1°C तक तापमान पहुंचा था।
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जबलपुर में 30 अक्टूबर 1952 को न्यूनतम तापमान 10.5°C रहा था।
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उज्जैन में 29 अक्टूबर 1983 को न्यूनतम 8.1°C और 2002 में दिन का तापमान 39°C दर्ज हुआ था।
अब गुलाबी ठंड का इंतजार
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले सप्ताह में मध्यप्रदेश में न्यूनतम तापमान में और गिरावट आएगी। उत्तर भारत से आने वाली ठंडी हवाएं लगातार सक्रिय हैं। इससे सुबह और देर शाम सर्दी का अहसास और बढ़ जाएगा।
