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आदिवासी छात्रावास निरीक्षण में कलेक्टर का आपा खोना बना विवाद, बयान पर मचा हंगामा
विदिशा (म.प्र.)
विदिशा के उदयपुर छात्रावास में बच्चों की अनुपस्थिति पर अधीक्षक को धमकी, देर रात कलेक्टर ने वीडियो जारी कर जताया खेद
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में प्रशासनिक मर्यादा से जुड़ा एक मामला सामने आया है। गंजबासौदा तहसील के उदयपुर स्थित आदिवासी छात्रावास के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर अंशुल गुप्ता द्वारा छात्रावास अधीक्षक से अभद्र भाषा में बात करने का वीडियो सामने आने के बाद विवाद गहरा गया है। घटना बुधवार की है, जब निरीक्षण के दौरान छात्र छात्रावास में मौजूद नहीं मिले। बातचीत के दौरान कलेक्टर ने अधीक्षक को धमकी भरे शब्द कहे, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं।
घटना उस समय हुई जब कलेक्टर अंशुल गुप्ता उदयपुर स्थित आदिवासी आश्रम शाला और छात्रावास के औचक निरीक्षण पर पहुंचे। यहां कक्षा पहली से पांचवीं तक के छात्र छात्रावास में नजर नहीं आए। कलेक्टर ने जब इसकी वजह पूछी तो छात्रावास अधीक्षक चैन सिंह चिढ़ार ने बताया कि दो दिन की छुट्टी घोषित की गई है। इस पर कलेक्टर ने कहा कि छुट्टी स्कूलों के लिए थी, छात्रावास के लिए नहीं। जवाब में अधीक्षक ने आवासीय विद्यालयों में स्कूल और छात्रावास के अवकाश नियम समान होने की बात कही।
इसी बातचीत के दौरान कलेक्टर का गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने मर्यादा लांघते हुए अधीक्षक से आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। मौके पर मौजूद कर्मचारियों के अनुसार, फटकार के बाद अधीक्षक असहज होकर अन्य कर्मचारियों के पीछे खड़े हो गए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद प्रशासनिक भाषा और व्यवहार को लेकर बहस शुरू हो गई।
मामले ने तूल पकड़ने के बाद देर रात कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने एक वीडियो संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान वे भावनात्मक रूप से आहत थे और उसी स्थिति में उनके शब्दों की मर्यादा नहीं रह सकी। उन्होंने अपने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य व्यवस्था में सुधार था, न कि किसी कर्मचारी को अपमानित करना।
इस घटना को लेकर प्रशासनिक हलकों और कर्मचारी संगठनों में भी चर्चा है। कुछ अधिकारियों का मानना है कि निरीक्षण के दौरान सख्ती जरूरी होती है, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखना उतना ही आवश्यक है। वहीं सामाजिक संगठनों ने आदिवासी क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार की मांग की है।
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में किसी विभागीय जांच या कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
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आदिवासी छात्रावास निरीक्षण में कलेक्टर का आपा खोना बना विवाद, बयान पर मचा हंगामा
विदिशा (म.प्र.)
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में प्रशासनिक मर्यादा से जुड़ा एक मामला सामने आया है। गंजबासौदा तहसील के उदयपुर स्थित आदिवासी छात्रावास के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर अंशुल गुप्ता द्वारा छात्रावास अधीक्षक से अभद्र भाषा में बात करने का वीडियो सामने आने के बाद विवाद गहरा गया है। घटना बुधवार की है, जब निरीक्षण के दौरान छात्र छात्रावास में मौजूद नहीं मिले। बातचीत के दौरान कलेक्टर ने अधीक्षक को धमकी भरे शब्द कहे, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं।
घटना उस समय हुई जब कलेक्टर अंशुल गुप्ता उदयपुर स्थित आदिवासी आश्रम शाला और छात्रावास के औचक निरीक्षण पर पहुंचे। यहां कक्षा पहली से पांचवीं तक के छात्र छात्रावास में नजर नहीं आए। कलेक्टर ने जब इसकी वजह पूछी तो छात्रावास अधीक्षक चैन सिंह चिढ़ार ने बताया कि दो दिन की छुट्टी घोषित की गई है। इस पर कलेक्टर ने कहा कि छुट्टी स्कूलों के लिए थी, छात्रावास के लिए नहीं। जवाब में अधीक्षक ने आवासीय विद्यालयों में स्कूल और छात्रावास के अवकाश नियम समान होने की बात कही।
इसी बातचीत के दौरान कलेक्टर का गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने मर्यादा लांघते हुए अधीक्षक से आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। मौके पर मौजूद कर्मचारियों के अनुसार, फटकार के बाद अधीक्षक असहज होकर अन्य कर्मचारियों के पीछे खड़े हो गए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद प्रशासनिक भाषा और व्यवहार को लेकर बहस शुरू हो गई।
मामले ने तूल पकड़ने के बाद देर रात कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने एक वीडियो संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान वे भावनात्मक रूप से आहत थे और उसी स्थिति में उनके शब्दों की मर्यादा नहीं रह सकी। उन्होंने अपने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य व्यवस्था में सुधार था, न कि किसी कर्मचारी को अपमानित करना।
इस घटना को लेकर प्रशासनिक हलकों और कर्मचारी संगठनों में भी चर्चा है। कुछ अधिकारियों का मानना है कि निरीक्षण के दौरान सख्ती जरूरी होती है, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखना उतना ही आवश्यक है। वहीं सामाजिक संगठनों ने आदिवासी क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार की मांग की है।
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में किसी विभागीय जांच या कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
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