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एमपी में युवा विधायकों का संगम, लोकतंत्र को मजबूत करने पर बड़ी चर्चा
मध्य प्रदेश
भोपाल में दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन की शुरुआत हुई, जिसमें एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के 45 वर्ष से कम आयु के जनप्रतिनिधि शामिल हैं।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन की शुरुआत सोमवार, 30 मार्च से हो गई है। यह आयोजन राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र-6) के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के 45 वर्ष से कम आयु के विधायक भाग ले रहे हैं। इस सम्मेलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त बनाना और युवा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को नए दृष्टिकोण से समझना है।
युवा नेतृत्व की भागीदारी पर विशेष फोकस
इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश के 37, राजस्थान के 13 और छत्तीसगढ़ के 13 युवा विधायक शामिल हो रहे हैं। आयोजन का मुख्य फोकस यह है कि युवा जनप्रतिनिधि लोकतंत्र को मजबूत करने में कैसे प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही, नागरिकों की भागीदारी को बढ़ाने के उपायों पर भी गहन चर्चा की जा रही है।
पहले दिन लोकतंत्र और नागरिक सहभागिता पर चर्चा
सम्मेलन के पहले दिन लोकतंत्र को मजबूत करने में युवा विधायकों की भूमिका और नागरिक सहभागिता को बढ़ाने के विषय पर मंथन किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी उपस्थित रहे। इस दौरान विशेषज्ञों ने युवाओं की राजनीतिक जिम्मेदारियों और उनकी सक्रिय भागीदारी पर अपने विचार रखे।
तैयारियों का लिया गया जायजा
सम्मेलन से पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कार्यक्रम की तैयारियों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह आयोजन लोकतंत्र की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण कदम है और इससे युवा विधायकों को अपनी भूमिका बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा।
पांच सत्रों में होगा विचार-विमर्श
दो दिवसीय इस सम्मेलन में कुल पांच सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। पहले दिन तीन और दूसरे दिन दो सत्र होंगे। इन सत्रों में विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विचार रखे जाएंगे। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु भी युवा विधायकों को संबोधित करेंगे।
दूसरे दिन विकसित भारत 2047 पर होगी चर्चा
सम्मेलन के दूसरे दिन 31 मार्च को ‘विकसित भारत 2047: युवा विधायकों के दायित्व और चुनौतियां’ विषय पर चर्चा की जाएगी। इस दौरान देश के भविष्य को लेकर युवाओं की भूमिका, नीति निर्माण और चुनौतियों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। एमआईटी पुणे के चेयरमैन डॉ. राहुल वी. कराड भी अपने विचार साझा करेंगे।
समापन समारोह में प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी
सम्मेलन के समापन समारोह में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस आयोजन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के शामिल होने की भी संभावना जताई गई है।
युवा विधायकों के लिए सीख का मंच
विधानसभा सचिवालय के अनुसार, इस सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी विधायक 45 वर्ष से कम आयु के हैं। यह मंच उन्हें न केवल अपने अनुभव साझा करने का अवसर देगा, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में नई सोच विकसित करने में भी सहायक होगा।
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एमपी में युवा विधायकों का संगम, लोकतंत्र को मजबूत करने पर बड़ी चर्चा
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन की शुरुआत सोमवार, 30 मार्च से हो गई है। यह आयोजन राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र-6) के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के 45 वर्ष से कम आयु के विधायक भाग ले रहे हैं। इस सम्मेलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त बनाना और युवा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को नए दृष्टिकोण से समझना है।
युवा नेतृत्व की भागीदारी पर विशेष फोकस
इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश के 37, राजस्थान के 13 और छत्तीसगढ़ के 13 युवा विधायक शामिल हो रहे हैं। आयोजन का मुख्य फोकस यह है कि युवा जनप्रतिनिधि लोकतंत्र को मजबूत करने में कैसे प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही, नागरिकों की भागीदारी को बढ़ाने के उपायों पर भी गहन चर्चा की जा रही है।
पहले दिन लोकतंत्र और नागरिक सहभागिता पर चर्चा
सम्मेलन के पहले दिन लोकतंत्र को मजबूत करने में युवा विधायकों की भूमिका और नागरिक सहभागिता को बढ़ाने के विषय पर मंथन किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी उपस्थित रहे। इस दौरान विशेषज्ञों ने युवाओं की राजनीतिक जिम्मेदारियों और उनकी सक्रिय भागीदारी पर अपने विचार रखे।
तैयारियों का लिया गया जायजा
सम्मेलन से पहले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कार्यक्रम की तैयारियों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह आयोजन लोकतंत्र की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण कदम है और इससे युवा विधायकों को अपनी भूमिका बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा।
पांच सत्रों में होगा विचार-विमर्श
दो दिवसीय इस सम्मेलन में कुल पांच सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। पहले दिन तीन और दूसरे दिन दो सत्र होंगे। इन सत्रों में विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विचार रखे जाएंगे। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु भी युवा विधायकों को संबोधित करेंगे।
दूसरे दिन विकसित भारत 2047 पर होगी चर्चा
सम्मेलन के दूसरे दिन 31 मार्च को ‘विकसित भारत 2047: युवा विधायकों के दायित्व और चुनौतियां’ विषय पर चर्चा की जाएगी। इस दौरान देश के भविष्य को लेकर युवाओं की भूमिका, नीति निर्माण और चुनौतियों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। एमआईटी पुणे के चेयरमैन डॉ. राहुल वी. कराड भी अपने विचार साझा करेंगे।
समापन समारोह में प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी
सम्मेलन के समापन समारोह में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस आयोजन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के शामिल होने की भी संभावना जताई गई है।
युवा विधायकों के लिए सीख का मंच
विधानसभा सचिवालय के अनुसार, इस सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी विधायक 45 वर्ष से कम आयु के हैं। यह मंच उन्हें न केवल अपने अनुभव साझा करने का अवसर देगा, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में नई सोच विकसित करने में भी सहायक होगा।
