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भागीरथपुरा त्रासदी पर कांग्रेस का सरकार से सवाल, मृतकों की स्मृति में स्मारक के लिए जमीन की मांग
इंदौर (म.प्र.)
दूषित पेयजल से 20 से अधिक लोगों की मौत के बाद इंदौर में कांग्रेस ने कहा— यह हादसा नहीं, प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई नागरिकों की मौतों के मामले ने एक बार फिर शहरी प्रशासन और बुनियादी सुविधाओं की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना में 20 से अधिक लोगों की जान जाने के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार और नगर निगम से मृतकों की स्मृति में स्मारक निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की विफलता का परिणाम है।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अमित चौरसिया ने इस संबंध में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि भागीरथपुरा में स्मारक के लिए उपयुक्त स्थान पर लगभग 10×10 फीट भूमि आवंटित की जाए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि भूमि सरकार या नगर निगम उपलब्ध कराए, जबकि स्मारक का निर्माण पार्टी अपने संसाधनों से कराएगी।
कांग्रेस का आरोप है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में लंबे समय से नर्मदा जल की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। स्थानीय नागरिकों ने कई बार दूषित पानी की आपूर्ति की जानकारी प्रशासन को दी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालात तब बदले, जब मानव मल-मूत्र से दूषित पानी के सेवन से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े और कई की जान चली गई। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता, तो यह जनहानि रोकी जा सकती थी।
अमित चौरसिया ने कहा कि प्रस्तावित स्मारक केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि शासन और प्रशासन के लिए स्थायी चेतावनी भी बनेगा। उनका कहना है कि किसी भी शहर का विकास तब तक अर्थहीन है, जब तक नागरिकों को सुरक्षित पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध न हो। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद नगर निगम द्वारा तेजी से विकास और सुधार कार्य शुरू किए गए, जो यह दर्शाते हैं कि पहले लापरवाही हुई और बाद में संवेदनशीलता दिखाई गई।
कांग्रेस ने इस पूरे मामले को राजनीतिक विवाद से ऊपर बताते हुए इसे नैतिक जिम्मेदारी और जवाबदेही से जुड़ा प्रश्न बताया है। पार्टी का कहना है कि स्मारक आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाएगा कि तथाकथित विकास की कीमत निर्दोष नागरिकों की जान नहीं हो सकती। साथ ही यह प्रशासन को भविष्य में ऐसी चूक से बचने का संदेश भी देगा।
फिलहाल, इस मांग पर नगर निगम या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, यह मुद्दा पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में उभरता जा रहा है और शहरी पेयजल व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जवाबदेही पर व्यापक बहस को जन्म दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और भागीरथपुरा के पीड़ित परिवारों को किस तरह का भरोसा दिलाया जाता है।
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भागीरथपुरा त्रासदी पर कांग्रेस का सरकार से सवाल, मृतकों की स्मृति में स्मारक के लिए जमीन की मांग
इंदौर (म.प्र.)
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई नागरिकों की मौतों के मामले ने एक बार फिर शहरी प्रशासन और बुनियादी सुविधाओं की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना में 20 से अधिक लोगों की जान जाने के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार और नगर निगम से मृतकों की स्मृति में स्मारक निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की विफलता का परिणाम है।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अमित चौरसिया ने इस संबंध में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि भागीरथपुरा में स्मारक के लिए उपयुक्त स्थान पर लगभग 10×10 फीट भूमि आवंटित की जाए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि भूमि सरकार या नगर निगम उपलब्ध कराए, जबकि स्मारक का निर्माण पार्टी अपने संसाधनों से कराएगी।
कांग्रेस का आरोप है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में लंबे समय से नर्मदा जल की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। स्थानीय नागरिकों ने कई बार दूषित पानी की आपूर्ति की जानकारी प्रशासन को दी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालात तब बदले, जब मानव मल-मूत्र से दूषित पानी के सेवन से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े और कई की जान चली गई। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता, तो यह जनहानि रोकी जा सकती थी।
अमित चौरसिया ने कहा कि प्रस्तावित स्मारक केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि शासन और प्रशासन के लिए स्थायी चेतावनी भी बनेगा। उनका कहना है कि किसी भी शहर का विकास तब तक अर्थहीन है, जब तक नागरिकों को सुरक्षित पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध न हो। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद नगर निगम द्वारा तेजी से विकास और सुधार कार्य शुरू किए गए, जो यह दर्शाते हैं कि पहले लापरवाही हुई और बाद में संवेदनशीलता दिखाई गई।
कांग्रेस ने इस पूरे मामले को राजनीतिक विवाद से ऊपर बताते हुए इसे नैतिक जिम्मेदारी और जवाबदेही से जुड़ा प्रश्न बताया है। पार्टी का कहना है कि स्मारक आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाएगा कि तथाकथित विकास की कीमत निर्दोष नागरिकों की जान नहीं हो सकती। साथ ही यह प्रशासन को भविष्य में ऐसी चूक से बचने का संदेश भी देगा।
फिलहाल, इस मांग पर नगर निगम या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, यह मुद्दा पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में उभरता जा रहा है और शहरी पेयजल व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जवाबदेही पर व्यापक बहस को जन्म दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और भागीरथपुरा के पीड़ित परिवारों को किस तरह का भरोसा दिलाया जाता है।
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