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आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पर शिकंजा: आयकर विभाग ने शाहपुरा स्थित स्कूल भवन किया अटैच
भोपाल (म.प्र.)
52 किलो सोना और 11 करोड़ नकद मामले से जुड़ी जांच में बड़ी कार्रवाई, बेनामी संपत्ति मानकर सौरभ शर्मा की मां और सहयोगियों को नोटिस
राजधानी भोपाल में आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा से जुड़े 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामदगी मामले में आयकर विभाग की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। शुक्रवार को आयकर विभाग की बेनामी निषेध इकाई (बेनामी प्रोहिबिशन यूनिट—BPU) ने शाहपुरा इलाके में निर्माणाधीन एक स्कूल भवन को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया। विभाग का कहना है कि यह संपत्ति बेनामी लेन-देन के जरिए खड़ी की गई थी और इसका वास्तविक स्वामी सौरभ शर्मा है।
क्या है मामला
आयकर विभाग के अनुसार, करीब 7.5 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह स्कूल भवन ‘राजमाता (भारतमाता) शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति, भोपाल’ के नाम पर पंजीकृत है। इस ट्रस्ट में सौरभ शर्मा की मां उमा शर्मा के साथ चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल ट्रस्टी के रूप में दर्ज हैं। जांच में सामने आया कि ट्रस्ट केवल नाममात्र का मालिक है, जबकि संपत्ति पर वास्तविक नियंत्रण और निवेश सौरभ शर्मा का है।
कैसे हुई कार्रवाई
बेनामी निषेध इकाई ने बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम, 1988 (PBPT Act) के तहत जांच के बाद इस संपत्ति को बेनामी घोषित किया। इसके बाद अधिनियम की धारा 24(3) के अंतर्गत स्कूल भवन को अस्थायी रूप से अटैच किया गया। साथ ही, कथित बेनामीदारों और वास्तविक स्वामी को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
जांच का दायरा बढ़ा
सूत्रों के मुताबिक, संबंधित ट्रस्ट ने स्कूल संचालन के लिए एक नामी स्कूल श्रृंखला से फ्रेंचाइजी भी ली थी। आयकर विभाग अब निर्माण में लगाए गए धन के स्रोत, ट्रस्ट के बैंक खातों और अन्य गतिविधियों की भी गहन जांच कर रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े अन्य अचल परिसंपत्तियों पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।
सोना और नकदी बरामदगी
यह पूरा मामला दिसंबर 2024 में सामने आया था, जब भोपाल के मेंडोरी गांव में एक इनोवा कार लावारिस हालत में मिली थी। तलाशी के दौरान कार से 52 किलोग्राम सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। जांच में सामने आया कि कार चेतन सिंह गौर के नाम पर पंजीकृत थी, लेकिन बरामद संपत्ति वास्तव में सौरभ शर्मा की थी, जिसे करीबी सहयोगियों के नाम पर छिपाया गया था।
आयकर विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई उस व्यापक जांच का हिस्सा है, जिसमें सौरभ शर्मा और उसके नेटवर्क से जुड़ी आय, निवेश और संपत्तियों की पड़ताल की जा रही है। मामले पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी नजर है और आने वाले समय में पूछताछ और जब्ती की कार्रवाई तेज होने की संभावना जताई जा रही है
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भोपाल (म.प्र.)
राजधानी भोपाल में आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा से जुड़े 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामदगी मामले में आयकर विभाग की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। शुक्रवार को आयकर विभाग की बेनामी निषेध इकाई (बेनामी प्रोहिबिशन यूनिट—BPU) ने शाहपुरा इलाके में निर्माणाधीन एक स्कूल भवन को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया। विभाग का कहना है कि यह संपत्ति बेनामी लेन-देन के जरिए खड़ी की गई थी और इसका वास्तविक स्वामी सौरभ शर्मा है।
क्या है मामला
आयकर विभाग के अनुसार, करीब 7.5 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह स्कूल भवन ‘राजमाता (भारतमाता) शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति, भोपाल’ के नाम पर पंजीकृत है। इस ट्रस्ट में सौरभ शर्मा की मां उमा शर्मा के साथ चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल ट्रस्टी के रूप में दर्ज हैं। जांच में सामने आया कि ट्रस्ट केवल नाममात्र का मालिक है, जबकि संपत्ति पर वास्तविक नियंत्रण और निवेश सौरभ शर्मा का है।
कैसे हुई कार्रवाई
बेनामी निषेध इकाई ने बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम, 1988 (PBPT Act) के तहत जांच के बाद इस संपत्ति को बेनामी घोषित किया। इसके बाद अधिनियम की धारा 24(3) के अंतर्गत स्कूल भवन को अस्थायी रूप से अटैच किया गया। साथ ही, कथित बेनामीदारों और वास्तविक स्वामी को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
जांच का दायरा बढ़ा
सूत्रों के मुताबिक, संबंधित ट्रस्ट ने स्कूल संचालन के लिए एक नामी स्कूल श्रृंखला से फ्रेंचाइजी भी ली थी। आयकर विभाग अब निर्माण में लगाए गए धन के स्रोत, ट्रस्ट के बैंक खातों और अन्य गतिविधियों की भी गहन जांच कर रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े अन्य अचल परिसंपत्तियों पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।
सोना और नकदी बरामदगी
यह पूरा मामला दिसंबर 2024 में सामने आया था, जब भोपाल के मेंडोरी गांव में एक इनोवा कार लावारिस हालत में मिली थी। तलाशी के दौरान कार से 52 किलोग्राम सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। जांच में सामने आया कि कार चेतन सिंह गौर के नाम पर पंजीकृत थी, लेकिन बरामद संपत्ति वास्तव में सौरभ शर्मा की थी, जिसे करीबी सहयोगियों के नाम पर छिपाया गया था।
आयकर विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई उस व्यापक जांच का हिस्सा है, जिसमें सौरभ शर्मा और उसके नेटवर्क से जुड़ी आय, निवेश और संपत्तियों की पड़ताल की जा रही है। मामले पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी नजर है और आने वाले समय में पूछताछ और जब्ती की कार्रवाई तेज होने की संभावना जताई जा रही है
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