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एमपी के इस शहर में लगी हैकर्स की भीड़, आईटी प्रोफेशनल्स की लगातार 36 घंटे कोडिंग
JABALPUR, MP
जबलपुर के ट्रिपल आईटीडीएम में हैकाथॉन-3 का आयोजन किया गया है. इसमें आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटीडीएम के बेहतरीन आईटी प्रोफेशनल्स शामिल हैं.
भारत के आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटीडीएम के सबसे बेहतरीन आईटी प्रोफेशनल्स जबलपुर में इकट्ठे हुए हैं. यह सभी एक अनोखे कंपटीशन में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे हैं. जिसे हैकाथॉन 3 का नाम दिया गया है. इन प्रोफेशनल्स को अगले 36 घंटे में कुछ ऐसा बनाना है जो अब तक ना बनाया गया हो. इन्हें दुनिया के कुछ बेहतरीन सॉफ्टवेयर और सलाहकार भी मुहैया करवाए गए हैं और यह रेसजबलपुर के ट्रिपल आईटीडीएम में शुरू हो गई है.
जबलपुर पहुंचे 480 हैकर्स
जबलपुर के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग इंस्टीट्यूट में पूरे देश से 480 हैकर्स इकट्ठा हुए हैं. ट्रिपल आईटीडीएम की टीम ने हैकाथॉन 3.0 का आयोजन किया है. इस आयोजन की टीम लीडर उत्तरा कामत ने बताया कि "हैकाथॉन 3.0 में लगभग 5000 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया था लेकिन इसमें से 480 प्रतिभागियों को चुना गया है. यह भारत के लगभग सभी आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटीडीएम के स्टूडेंट हैं. इनमें कुछ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी के स्टूडेंट हैं और कुछ दूसरे विषयों के लेकिन इन सभी की रुचि कोडिंग में है."

लगातार 36 घंटे काम करेंगे हैकर्स
जबलपुर ट्रिपल आईटीडीएम की टीम ने इस आयोजन का जिम्मा लिया है. यह उनका तीसरा आयोजन है. आयोजन टीम के सदस्य ईशान ने बताया कि "इन सभी 480 छात्र-छात्राओं के रुकने खाने पीने की पूरी व्यवस्था जबलपुर ट्रिपल आईटीडीएम के छात्रों ने की है. यह आयोजन लगातार 36 घंटे तक चलेगा और स्टूडेंट लगातार जागकर 36 घंटे तक काम करेंगे."

आयोजन टीम के सदस्य ईशान ने बताया कि "यह सभी छात्र कोडिंग के मास्टर हैं. सभी को कोडिंग के जरिए अपनी प्रतिभा दिखानी है. इन सभी को अगले 36 घंटे में या तो ऐप बनाना है या कोई सिक्योरिटी सिस्टम बनाना है या कोई सपोर्ट सिस्टम बनाना है. इन्हें कोई ऐसा सॉफ्टवेयर बनाना है जो सबसे अच्छा हो. इन छात्र-छात्राओं को इस बात की पूरी छूट है कि वह एआई की मदद भी ले सकते हैं. हो सकता है इनमें से कोई छात्र एआई का नया टूल बना दे."
'सबसे अच्छे प्रोडक्ट को मिलेगा इनाम'
आयोजन की टीम लीडर उत्तरा कामत ने बताया कि "यहां अगले 36 घंटे में छात्र जो कुछ बनाएंगे उसके लिए उन्हें मैटर्स भी मुहैया करवाए गए हैं जो कई नामी कंपनियों से जुड़े हैं. ये छात्रों को तकनीकी सलाह, विचार की पुष्टि और कार्यान्वयन के स्तर पर बहुमूल्य सुझाव के लिए हैं. इसके बाद जो प्रोडक्ट बनाए जाएंगे उन्हें आईआईटी के कई पुराने प्रोफेशनल्स और देश की बड़ी कंपनियों के आईटी के प्रोफेशनल्स चेक करेंगे. जो प्रोडक्ट सबसे अच्छा होगा उसे इनाम दिया जाएगा."
'प्रतियोगिता से प्रतिभाओं की खोज'
ट्रिपल आईटीडीएम के डीन मुकेश राय ने बताया कि "आईटी के जमाने में इस तरह की प्रतियोगिता से भारत के कुछ बेहद प्रतिभावान छात्र निकल सकते हैं. जो इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी में क्रांति ला सकते हैं. इसलिए इस तरह की प्रतियोगिता प्रतिभाओं की खोज की जरूरी है. मुकेश राय का कहना है कि वे इस बात को लेकर अपने छात्रों का धन्यवाद करना चाहते हैं जिन्होंने इस आयोजन का जिम्मा उठाया."
हैकर का मतलब नकारात्मक नहीं
इंटरनेट के जमाने में हैकर का मतलब नकारात्मक समझा जाता है. सामान्य आदमी हैकर को बुरा मानता है. हैकर के बारे में सामान्य आदमी की समझ यह है कि जो इंटरनेट की सेवाओं को बाधित कर दे वह हैकर है. जबकि वास्तव में हैकर का मतलब नकारात्मक नहीं है. हैकर्स कोडिंग के जरिए नए नए प्रोडक्ट तैयार करते हैं.
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एमपी के इस शहर में लगी हैकर्स की भीड़, आईटी प्रोफेशनल्स की लगातार 36 घंटे कोडिंग
JABALPUR, MP
भारत के आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटीडीएम के सबसे बेहतरीन आईटी प्रोफेशनल्स जबलपुर में इकट्ठे हुए हैं. यह सभी एक अनोखे कंपटीशन में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे हैं. जिसे हैकाथॉन 3 का नाम दिया गया है. इन प्रोफेशनल्स को अगले 36 घंटे में कुछ ऐसा बनाना है जो अब तक ना बनाया गया हो. इन्हें दुनिया के कुछ बेहतरीन सॉफ्टवेयर और सलाहकार भी मुहैया करवाए गए हैं और यह रेसजबलपुर के ट्रिपल आईटीडीएम में शुरू हो गई है.
जबलपुर पहुंचे 480 हैकर्स
जबलपुर के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग इंस्टीट्यूट में पूरे देश से 480 हैकर्स इकट्ठा हुए हैं. ट्रिपल आईटीडीएम की टीम ने हैकाथॉन 3.0 का आयोजन किया है. इस आयोजन की टीम लीडर उत्तरा कामत ने बताया कि "हैकाथॉन 3.0 में लगभग 5000 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया था लेकिन इसमें से 480 प्रतिभागियों को चुना गया है. यह भारत के लगभग सभी आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटीडीएम के स्टूडेंट हैं. इनमें कुछ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी के स्टूडेंट हैं और कुछ दूसरे विषयों के लेकिन इन सभी की रुचि कोडिंग में है."

लगातार 36 घंटे काम करेंगे हैकर्स
जबलपुर ट्रिपल आईटीडीएम की टीम ने इस आयोजन का जिम्मा लिया है. यह उनका तीसरा आयोजन है. आयोजन टीम के सदस्य ईशान ने बताया कि "इन सभी 480 छात्र-छात्राओं के रुकने खाने पीने की पूरी व्यवस्था जबलपुर ट्रिपल आईटीडीएम के छात्रों ने की है. यह आयोजन लगातार 36 घंटे तक चलेगा और स्टूडेंट लगातार जागकर 36 घंटे तक काम करेंगे."

आयोजन टीम के सदस्य ईशान ने बताया कि "यह सभी छात्र कोडिंग के मास्टर हैं. सभी को कोडिंग के जरिए अपनी प्रतिभा दिखानी है. इन सभी को अगले 36 घंटे में या तो ऐप बनाना है या कोई सिक्योरिटी सिस्टम बनाना है या कोई सपोर्ट सिस्टम बनाना है. इन्हें कोई ऐसा सॉफ्टवेयर बनाना है जो सबसे अच्छा हो. इन छात्र-छात्राओं को इस बात की पूरी छूट है कि वह एआई की मदद भी ले सकते हैं. हो सकता है इनमें से कोई छात्र एआई का नया टूल बना दे."
'सबसे अच्छे प्रोडक्ट को मिलेगा इनाम'
आयोजन की टीम लीडर उत्तरा कामत ने बताया कि "यहां अगले 36 घंटे में छात्र जो कुछ बनाएंगे उसके लिए उन्हें मैटर्स भी मुहैया करवाए गए हैं जो कई नामी कंपनियों से जुड़े हैं. ये छात्रों को तकनीकी सलाह, विचार की पुष्टि और कार्यान्वयन के स्तर पर बहुमूल्य सुझाव के लिए हैं. इसके बाद जो प्रोडक्ट बनाए जाएंगे उन्हें आईआईटी के कई पुराने प्रोफेशनल्स और देश की बड़ी कंपनियों के आईटी के प्रोफेशनल्स चेक करेंगे. जो प्रोडक्ट सबसे अच्छा होगा उसे इनाम दिया जाएगा."
'प्रतियोगिता से प्रतिभाओं की खोज'
ट्रिपल आईटीडीएम के डीन मुकेश राय ने बताया कि "आईटी के जमाने में इस तरह की प्रतियोगिता से भारत के कुछ बेहद प्रतिभावान छात्र निकल सकते हैं. जो इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी में क्रांति ला सकते हैं. इसलिए इस तरह की प्रतियोगिता प्रतिभाओं की खोज की जरूरी है. मुकेश राय का कहना है कि वे इस बात को लेकर अपने छात्रों का धन्यवाद करना चाहते हैं जिन्होंने इस आयोजन का जिम्मा उठाया."
हैकर का मतलब नकारात्मक नहीं
इंटरनेट के जमाने में हैकर का मतलब नकारात्मक समझा जाता है. सामान्य आदमी हैकर को बुरा मानता है. हैकर के बारे में सामान्य आदमी की समझ यह है कि जो इंटरनेट की सेवाओं को बाधित कर दे वह हैकर है. जबकि वास्तव में हैकर का मतलब नकारात्मक नहीं है. हैकर्स कोडिंग के जरिए नए नए प्रोडक्ट तैयार करते हैं.
