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गांधी प्राणी उद्यान में 6 माह के शावक की मृत्यु, सांस लेने में हो रही थी दिक्कत
Gwalior, MP
गांधी प्राणी उद्यान में एक 6 माह के शावक आदि की मौत हो गई. बुखार के चलते 3 दिनों से खाना-पीना छोड़ दिया था.
गांधी प्राणी उद्यान में रविवार की सुबह एक दुखद खबर के साथ हुई. जहां मीरा बाघिन के 6 महीने के शावक 'आदि' की रविवार तड़के मौत हो गई. डॉक्टर्स के एक पैनल ने शव का पोस्टमार्टम कर जांच के लिए बिसरा को प्रिजर्व कर जबलपुर प्रयोगशाला भेजा दिया है. जिसके बाद गमगीन माहौल में चिड़ियाघर परिसर में प्रबंधन द्वारा उनका अंतिम संस्कार किया गया.
3 दिन पहले छोड़ दिया था खाना पीना
दरअसल, आदि पिछले कुछ दिनों से बीमार था. प्रारंभिक जांच पड़ताल में शावक को नर्वाइन डिसऑर्डर की समस्या बताई गई है. उसने बीते 3 दिनों से खाना-पीना भी छोड़ दिया था. शनिवार को उसे सांस लेने में दिक्कत होने के बाद ऑक्सीजन भी लगाई गई थी. साथ ही ड्रिप के जरिए तरल पदार्थ भी दिया जा रहा था लेकिन उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ. जबलपुर के वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ डॉक्टर एबी श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आदि बाघ का ट्रीटमेंट किया जा रहा था.
चिडिया घर के क्यूरेटर डॉक्टर गौरव परिहार ने कहा, "आदि के खाना पीना छोड़ देने से उसकी स्थिति बेहद खराब हो गई थी. वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था. वहीं, उसे सांस लेने में भी दिक्कत पेश आ रही थी. चिड़ियाघर परिसर में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया. मादा टाइगर मीरा के दो शावक अभी चिड़ियाघर में मौजूद हैं. जोकि सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं."
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गांधी प्राणी उद्यान में 6 माह के शावक की मृत्यु, सांस लेने में हो रही थी दिक्कत
Gwalior, MP
गांधी प्राणी उद्यान में रविवार की सुबह एक दुखद खबर के साथ हुई. जहां मीरा बाघिन के 6 महीने के शावक 'आदि' की रविवार तड़के मौत हो गई. डॉक्टर्स के एक पैनल ने शव का पोस्टमार्टम कर जांच के लिए बिसरा को प्रिजर्व कर जबलपुर प्रयोगशाला भेजा दिया है. जिसके बाद गमगीन माहौल में चिड़ियाघर परिसर में प्रबंधन द्वारा उनका अंतिम संस्कार किया गया.
3 दिन पहले छोड़ दिया था खाना पीना
दरअसल, आदि पिछले कुछ दिनों से बीमार था. प्रारंभिक जांच पड़ताल में शावक को नर्वाइन डिसऑर्डर की समस्या बताई गई है. उसने बीते 3 दिनों से खाना-पीना भी छोड़ दिया था. शनिवार को उसे सांस लेने में दिक्कत होने के बाद ऑक्सीजन भी लगाई गई थी. साथ ही ड्रिप के जरिए तरल पदार्थ भी दिया जा रहा था लेकिन उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ. जबलपुर के वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ डॉक्टर एबी श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आदि बाघ का ट्रीटमेंट किया जा रहा था.
चिडिया घर के क्यूरेटर डॉक्टर गौरव परिहार ने कहा, "आदि के खाना पीना छोड़ देने से उसकी स्थिति बेहद खराब हो गई थी. वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था. वहीं, उसे सांस लेने में भी दिक्कत पेश आ रही थी. चिड़ियाघर परिसर में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया. मादा टाइगर मीरा के दो शावक अभी चिड़ियाघर में मौजूद हैं. जोकि सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं."
