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मौनी अमावस्या पर शिप्रा में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, पुण्य अर्जन के लिए उमड़ा जनसैलाब
Ujjain, MP
उज्जैन में मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने शिप्रा नदी में डुबकी लगाई. पवित्र स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने अन्नदान, वस्त्रदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किया.
माघ मास के कृष्ण पक्ष की मौनी अमावस्या पर उज्जैन में शिप्रा नदी के पावन तटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. रामघाट पर सुबह से ही आस्थावान भक्त पुण्यस्नान कर मोक्ष की कामना कर रहे हैं. अनुमान है कि सुबह से शाम तक हजारों श्रद्धालु स्नान और आस्था की डुबकी लगाएंगे. यह विशेष पर्व सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर संक्रमण से पहले के महापर्व के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष प्रयागराज में महाकुंभ का भव्य आयोजन हो रहा है, लेकिन भीड़भाड़ से बचने के लिए अनेक श्रद्धालु उज्जैन के पवित्र घाटों पर डुबकी लगा रहे हैं.
मौनी अमावस्या पर विशेष संयोग
पुजारी राकेश जोशी ने बताया कि, ''भारतीय ज्योतिष के अनुसार, ग्रहों और नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति के आधार पर कुंभ, महाकुंभ और सिंहस्थ जैसे विशेष पर्व बनते हैं. इस बार मौनी अमावस्या के दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है. जिससे इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है. प्रयागराज में स्नान इस समय अत्यधिक शुभ माना गया है, लेकिन अन्य तीर्थस्थलों पर भी स्नान और कल्पवास करने से पुण्यफल की प्राप्ति संभव है.''
दान-पुण्य का विशेष महत्व
राकेश जोशी ने बताया कि, पवित्र स्नान के बाद श्रद्धालु अन्नदान, वस्त्रदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, और दीपदान करना अत्यंत फलदायी होता है. साथ ही इस अवसर पर पात्रदान, अन्नदान और वस्त्रदान करने से सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है.''
श्रद्धालुओं का कहना है कि, प्रयागराज में अधिक भीड़ होने के कारण उन्होंने उज्जैन के शिप्रा तट पर डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करने का संकल्प लिया. इस पावन अवसर पर पूरा शहर आध्यात्मिक आस्था और धार्मिक उल्लास से सराबोर है.
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मौनी अमावस्या पर शिप्रा में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, पुण्य अर्जन के लिए उमड़ा जनसैलाब
Ujjain, MP
माघ मास के कृष्ण पक्ष की मौनी अमावस्या पर उज्जैन में शिप्रा नदी के पावन तटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. रामघाट पर सुबह से ही आस्थावान भक्त पुण्यस्नान कर मोक्ष की कामना कर रहे हैं. अनुमान है कि सुबह से शाम तक हजारों श्रद्धालु स्नान और आस्था की डुबकी लगाएंगे. यह विशेष पर्व सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर संक्रमण से पहले के महापर्व के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष प्रयागराज में महाकुंभ का भव्य आयोजन हो रहा है, लेकिन भीड़भाड़ से बचने के लिए अनेक श्रद्धालु उज्जैन के पवित्र घाटों पर डुबकी लगा रहे हैं.
मौनी अमावस्या पर विशेष संयोग
पुजारी राकेश जोशी ने बताया कि, ''भारतीय ज्योतिष के अनुसार, ग्रहों और नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति के आधार पर कुंभ, महाकुंभ और सिंहस्थ जैसे विशेष पर्व बनते हैं. इस बार मौनी अमावस्या के दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है. जिससे इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है. प्रयागराज में स्नान इस समय अत्यधिक शुभ माना गया है, लेकिन अन्य तीर्थस्थलों पर भी स्नान और कल्पवास करने से पुण्यफल की प्राप्ति संभव है.''
दान-पुण्य का विशेष महत्व
राकेश जोशी ने बताया कि, पवित्र स्नान के बाद श्रद्धालु अन्नदान, वस्त्रदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, और दीपदान करना अत्यंत फलदायी होता है. साथ ही इस अवसर पर पात्रदान, अन्नदान और वस्त्रदान करने से सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है.''
श्रद्धालुओं का कहना है कि, प्रयागराज में अधिक भीड़ होने के कारण उन्होंने उज्जैन के शिप्रा तट पर डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करने का संकल्प लिया. इस पावन अवसर पर पूरा शहर आध्यात्मिक आस्था और धार्मिक उल्लास से सराबोर है.
