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रायसेन के भोजेश्वर मंदिर में भक्तों का जनसैलाब, महादेव का श्रृंगार देख स्तब्ध रह गए भक्त
Bhojpur, MP
रायसेन के भोजपुर में मौजूद भोजेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ा. फूल और बेलपत्र से महादेव का अद्भुत श्रृंगार किया गया.
देशभर में बुधवार को महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. देश और प्रदेश के सभी मंदिरों और शिवालयों पर भक्तों का जनसैलाब उमड़ा है. वहीं मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के भोजपुर के भोजेश्वर मंदिर में महादेव का फूल-मालाओं से अद्भुत श्रृंगार किया गया. महादेव को दूल्हे की तरह सजाया गया है. पूरे शिवलिंग को सुंदर फूलों और बेलपत्रों से सुशोभित किया गया है.
महादेव का अद्भुत श्रृंगार देख भक्त स्तब्ध
आज सुबह से ही महादेव के भक्त पवित्र जल और पुष्प बेलपत्र लेकर बाबा महादेव को अर्पण करने मंदिरों में पहुंच रहे हैं. शिव मंदिरों में लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं. लोग अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं, तो वहीं मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के भोजेश्वर में बने परमार कालीन शिव मंदिर में भक्तों का जन सैलाब उमड़ा. यहां पर सुबह से ही हजारों की संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं. महादेव का श्रृंगार देख भक्त स्तब्ध रह गए. बता दें यह मंदिर परमार कालीन राजा भोज द्वारा 1010 इस पर्व के लगभग बनाया गया था.

दूर-दूर के पत्थरों से बनाया गया विशाल शिवलिंग
रायसेन जिले के भोजपुर में बना हुआ भोजेश्वर महादेव का मंदिर बहुत प्राचीन है. शिवलिंग को विशाल पत्थर से तरासा गया है. यह मंदिर अपने विशाल शिवलिंग के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है. जिसे परमार वंश के राजा भोज द्वारा 1010 से 1053 ई. में बनवाया गया था. यहां मौजूद शिवलिंग 18.5 मीटर लंबा और 7.5 मीटर चौड़ा है, जो विश्व के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक है. बेतवा नदी के तट पर बने हुए इस विशाल शिवलिंग को बनाने के लिए दूर-दूर से बड़े पत्थरों को इकट्ठा कर मंदिर का निर्माण किया गया था. मंदिर के निर्माण से संबंधित ताम्र पत्र और पत्थरों पर इसके नक्शे भी हैं, जो उस समय के आधुनिक इंजीनियरिंग की मिसाल है.
मंदिर में महाशिवरात्रि पर होता है मेले का आयोजन
हर वर्ष महाशिवरात्रि पर इस मंदिर के प्रांगण में विशाल मेले का भी आयोजन किया जाता है. जहां पर दूर-दूर से आने वाले शिव भक्त अपने परिवार के साथ आनंदित होकर भगवान शिव के दर्शन करने के बाद मेले में भ्रमण करते हैं. शिवरात्रि के साथ ही संक्रांति के पावन पर्व पर भी यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है. इस शिवलिंग को लेकर लोगों की कई धारणा है.

लोगों का मानना है कि शिवरात्रि के पावन पर्व पर महादेव शिव को पवित्र नदियों के जल से अभिषेक करने के बाद फूल बेलपत्र चढ़ाने से मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं. लोगों की आस्था के चलते यहां पर हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक तो पहुंचते ही हैं, वहीं पर अन्य देशों के भी शिव भक्त यहां पर पहुंचते हैं.
यूनेस्को की अस्थाई सूची में शामिल यह मंदिर
विशाल शिवलिंग के साथ इस पूरे मंदिर प्रांगण को विश्व पर्यटन स्थल की निगरानी में साफ स्वच्छ और यथा स्थिति में बनाए रखने के प्रयास किए जाते हैं. हाल ही में यूनेस्को की अस्थाई सूची में भी इस शिवलिंग और महादेव के इस मंदिर को शामिल किया गया है.
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रायसेन के भोजेश्वर मंदिर में भक्तों का जनसैलाब, महादेव का श्रृंगार देख स्तब्ध रह गए भक्त
Bhojpur, MP
देशभर में बुधवार को महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. देश और प्रदेश के सभी मंदिरों और शिवालयों पर भक्तों का जनसैलाब उमड़ा है. वहीं मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के भोजपुर के भोजेश्वर मंदिर में महादेव का फूल-मालाओं से अद्भुत श्रृंगार किया गया. महादेव को दूल्हे की तरह सजाया गया है. पूरे शिवलिंग को सुंदर फूलों और बेलपत्रों से सुशोभित किया गया है.
महादेव का अद्भुत श्रृंगार देख भक्त स्तब्ध
आज सुबह से ही महादेव के भक्त पवित्र जल और पुष्प बेलपत्र लेकर बाबा महादेव को अर्पण करने मंदिरों में पहुंच रहे हैं. शिव मंदिरों में लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं. लोग अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं, तो वहीं मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के भोजेश्वर में बने परमार कालीन शिव मंदिर में भक्तों का जन सैलाब उमड़ा. यहां पर सुबह से ही हजारों की संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं. महादेव का श्रृंगार देख भक्त स्तब्ध रह गए. बता दें यह मंदिर परमार कालीन राजा भोज द्वारा 1010 इस पर्व के लगभग बनाया गया था.

दूर-दूर के पत्थरों से बनाया गया विशाल शिवलिंग
रायसेन जिले के भोजपुर में बना हुआ भोजेश्वर महादेव का मंदिर बहुत प्राचीन है. शिवलिंग को विशाल पत्थर से तरासा गया है. यह मंदिर अपने विशाल शिवलिंग के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है. जिसे परमार वंश के राजा भोज द्वारा 1010 से 1053 ई. में बनवाया गया था. यहां मौजूद शिवलिंग 18.5 मीटर लंबा और 7.5 मीटर चौड़ा है, जो विश्व के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक है. बेतवा नदी के तट पर बने हुए इस विशाल शिवलिंग को बनाने के लिए दूर-दूर से बड़े पत्थरों को इकट्ठा कर मंदिर का निर्माण किया गया था. मंदिर के निर्माण से संबंधित ताम्र पत्र और पत्थरों पर इसके नक्शे भी हैं, जो उस समय के आधुनिक इंजीनियरिंग की मिसाल है.
मंदिर में महाशिवरात्रि पर होता है मेले का आयोजन
हर वर्ष महाशिवरात्रि पर इस मंदिर के प्रांगण में विशाल मेले का भी आयोजन किया जाता है. जहां पर दूर-दूर से आने वाले शिव भक्त अपने परिवार के साथ आनंदित होकर भगवान शिव के दर्शन करने के बाद मेले में भ्रमण करते हैं. शिवरात्रि के साथ ही संक्रांति के पावन पर्व पर भी यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है. इस शिवलिंग को लेकर लोगों की कई धारणा है.

लोगों का मानना है कि शिवरात्रि के पावन पर्व पर महादेव शिव को पवित्र नदियों के जल से अभिषेक करने के बाद फूल बेलपत्र चढ़ाने से मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं. लोगों की आस्था के चलते यहां पर हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक तो पहुंचते ही हैं, वहीं पर अन्य देशों के भी शिव भक्त यहां पर पहुंचते हैं.
यूनेस्को की अस्थाई सूची में शामिल यह मंदिर
विशाल शिवलिंग के साथ इस पूरे मंदिर प्रांगण को विश्व पर्यटन स्थल की निगरानी में साफ स्वच्छ और यथा स्थिति में बनाए रखने के प्रयास किए जाते हैं. हाल ही में यूनेस्को की अस्थाई सूची में भी इस शिवलिंग और महादेव के इस मंदिर को शामिल किया गया है.
