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कर्मचारियों को 23 सालों से नहीं मिला 5वें और 6वें वेतनमान का DA, 7वें वेतनमान में 27 महीने का DA रोका गया, पेंशनर्स भी हुए प्रभावित
मध्य प्रदेश
मध्यप्रदेश में पिछले 23 सालों में कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (DA) के रूप में 15,345 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कांग्रेस और भाजपा दोनों सरकारों की देरी के कारण...
मध्यप्रदेश के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) को लेकर पिछले 23 सालों की एक बड़ी आर्थिक चिंता सामने आई है। कर्मचारियों का दावा है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों की सरकारों ने केंद्र सरकार द्वारा तय तारीखों के अनुसार DA नहीं दिया। इसके कारण कर्मचारियों और पेंशनर्स को कुल मिलाकर 15,345 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। राज्य के विभिन्न पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, कमल नाथ, उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकालों के दौरान भी इस मुद्दे पर गंभीर देरी देखने को मिली।
पांचवें और छठवें वेतनमान में सबसे बड़ा नुकसान
विशेष रूप से पांचवें और छठवें वेतनमान के दौरान कर्मचारियों को करीब 11,970 करोड़ रुपये का महंगाई भत्ता समय पर नहीं मिला। हालांकि बाद में यह भत्ता दिया गया, लेकिन केंद्र की निर्धारित तारीख से देरी होने के कारण कर्मचारियों को एरियर का पूरा लाभ नहीं मिल पाया।
सातवें वेतनमान में 27 महीने का DA रोका गया
सातवें वेतनमान के तहत जुलाई 2019 से सितंबर 2021 तक 27 महीने का 5% DA कर्मचारियों को नहीं दिया गया। इस दौरान राज्य में पहले कमल नाथ की कांग्रेस सरकार थी, बाद में शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार आई, लेकिन महंगाई भत्ता जारी नहीं किया गया। इसके चलते कर्मचारियों को लगभग 3,375 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
दिग्विजय सिंह सरकार के समय में DA पूरी तरह बंद
जनवरी 2002 से दिसंबर 2003 तक दिग्विजय सिंह के कार्यकाल के दौरान लगभग दो साल तक महंगाई भत्ता पूरी तरह से बंद रहा। इससे कर्मचारियों को 1,260 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।
भाजपा सरकार में भी देरी से लाभ
दिग्विजय सिंह के बाद उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में DA कर्मचारियों को दिया गया, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा तय दर और समय से देरी हुई। छठवें वेतनमान के दौरान इस वजह से लगभग 10,710 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
कर्मचारी संगठन की नाराजगी
मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही सरकारों ने समय पर DA नहीं दिया। इसका सीधे कर्मचारियों और पेंशनर्स की जेब पर असर पड़ा। उनका कहना है कि यह लंबे समय से सरकारी कर्मचारियों के साथ अन्याय है और लाखों कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
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कर्मचारियों को 23 सालों से नहीं मिला 5वें और 6वें वेतनमान का DA, 7वें वेतनमान में 27 महीने का DA रोका गया, पेंशनर्स भी हुए प्रभावित
मध्य प्रदेश
मध्यप्रदेश के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) को लेकर पिछले 23 सालों की एक बड़ी आर्थिक चिंता सामने आई है। कर्मचारियों का दावा है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों की सरकारों ने केंद्र सरकार द्वारा तय तारीखों के अनुसार DA नहीं दिया। इसके कारण कर्मचारियों और पेंशनर्स को कुल मिलाकर 15,345 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। राज्य के विभिन्न पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, कमल नाथ, उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकालों के दौरान भी इस मुद्दे पर गंभीर देरी देखने को मिली।
पांचवें और छठवें वेतनमान में सबसे बड़ा नुकसान
विशेष रूप से पांचवें और छठवें वेतनमान के दौरान कर्मचारियों को करीब 11,970 करोड़ रुपये का महंगाई भत्ता समय पर नहीं मिला। हालांकि बाद में यह भत्ता दिया गया, लेकिन केंद्र की निर्धारित तारीख से देरी होने के कारण कर्मचारियों को एरियर का पूरा लाभ नहीं मिल पाया।
सातवें वेतनमान में 27 महीने का DA रोका गया
सातवें वेतनमान के तहत जुलाई 2019 से सितंबर 2021 तक 27 महीने का 5% DA कर्मचारियों को नहीं दिया गया। इस दौरान राज्य में पहले कमल नाथ की कांग्रेस सरकार थी, बाद में शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार आई, लेकिन महंगाई भत्ता जारी नहीं किया गया। इसके चलते कर्मचारियों को लगभग 3,375 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
दिग्विजय सिंह सरकार के समय में DA पूरी तरह बंद
जनवरी 2002 से दिसंबर 2003 तक दिग्विजय सिंह के कार्यकाल के दौरान लगभग दो साल तक महंगाई भत्ता पूरी तरह से बंद रहा। इससे कर्मचारियों को 1,260 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।
भाजपा सरकार में भी देरी से लाभ
दिग्विजय सिंह के बाद उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में DA कर्मचारियों को दिया गया, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा तय दर और समय से देरी हुई। छठवें वेतनमान के दौरान इस वजह से लगभग 10,710 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
कर्मचारी संगठन की नाराजगी
मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही सरकारों ने समय पर DA नहीं दिया। इसका सीधे कर्मचारियों और पेंशनर्स की जेब पर असर पड़ा। उनका कहना है कि यह लंबे समय से सरकारी कर्मचारियों के साथ अन्याय है और लाखों कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
