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12 जिलों में EOW की रेड, 19000 क्विंटल धान के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश, 5 हजार करोड़ का नुकसान; जानें मामला
JAGRAN DESK
एमपी में ईओडब्ल्यू ने 12 जिलों की धान उपार्जन समितियों में बड़ी धांधली का खुलासा किया है। प्रारंभिक जांच में 19910 क्विंटल धान में फर्जीवाड़ा पाया गया है, जिससे शासन को करीब 5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सतना जिले में कनक वेयर हाउस में 535 क्विंटल धान के स्थान पर भूसी मिली है।
मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानि ईओडब्ल्यू ने धान के मामले में बड़ी धांधली पकड़ी है। 12 जिलों में धान उपार्जन समितियों में बड़ा फर्जीवाड़ा हो गया है। यह गड़बड़ी तब पकड़ में आई, जब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने 25 टीमों का गठन किया और यह टीमें पूरे प्रदेश में कार्रवाई करने पहुंची।
ईओडब्ल्यू की टीम प्रदेश के 12 जिलों की 150 उपार्जन समितियों के साथ साथ 140 वेयर हाउसों की जांच करने पहुंची। प्रारंभिक सूचना के अनुसार अब तक करीब 19,910 क्विंटल धान में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। ईओडब्ल्यू ने अनुमान जताया है कि इससे शासन को करीब 5 करोड़ रुपए के नुकसान हुआ है।
धान की जगह भूसी मिली
दिलचस्प बात यह है कि सतना जिले के कनक वेयर हाउस में 535 क्विंटल धान के स्थान पर भूसी मिली है। वहीं वेयर हाउस में सेवा सहकारी समिति पिंडरा एवं सेवा सहकारी समिति हिरौंदी जिला सतना द्वारा धान का भण्डारण किया गया है।
समितियां सरकार को लगा रही चूना
शासकीय उपार्जन में लगी समितियों द्वारा प्रतिवर्ष शासन को करोड़ों की आर्थिक क्षति पहुंचाई जाती है। धान से धन कमाने के इस खेल में उपार्जन समिति के पदाधिकारियों के अलावा कुछ ट्रांसपोर्टर, वेयर हाउस और राइस मिलें भी शामिल हो जाती हैं। इसी गड़बड़ी को पकड़ने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ईओडब्ल्यू को निर्देश दिया था।
EOW ने इन जिलों में मारी रेड
ईओडब्ल्यू की 25 टीमों ने सतना, मैहर, सागर, पन्ना, ग्वालियर, बालाघाट, जबलपुर, डिंडोरी, रीवा, नर्मदापुरम, श्योपुर,नरसिंहपुर सहित 12 जिलों की 150 उपार्जन समितियों एवं 140 वेयर हाउस की जांच की है।
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मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानि ईओडब्ल्यू ने धान के मामले में बड़ी धांधली पकड़ी है। 12 जिलों में धान उपार्जन समितियों में बड़ा फर्जीवाड़ा हो गया है। यह गड़बड़ी तब पकड़ में आई, जब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने 25 टीमों का गठन किया और यह टीमें पूरे प्रदेश में कार्रवाई करने पहुंची।
ईओडब्ल्यू की टीम प्रदेश के 12 जिलों की 150 उपार्जन समितियों के साथ साथ 140 वेयर हाउसों की जांच करने पहुंची। प्रारंभिक सूचना के अनुसार अब तक करीब 19,910 क्विंटल धान में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। ईओडब्ल्यू ने अनुमान जताया है कि इससे शासन को करीब 5 करोड़ रुपए के नुकसान हुआ है।
धान की जगह भूसी मिली
दिलचस्प बात यह है कि सतना जिले के कनक वेयर हाउस में 535 क्विंटल धान के स्थान पर भूसी मिली है। वहीं वेयर हाउस में सेवा सहकारी समिति पिंडरा एवं सेवा सहकारी समिति हिरौंदी जिला सतना द्वारा धान का भण्डारण किया गया है।
समितियां सरकार को लगा रही चूना
शासकीय उपार्जन में लगी समितियों द्वारा प्रतिवर्ष शासन को करोड़ों की आर्थिक क्षति पहुंचाई जाती है। धान से धन कमाने के इस खेल में उपार्जन समिति के पदाधिकारियों के अलावा कुछ ट्रांसपोर्टर, वेयर हाउस और राइस मिलें भी शामिल हो जाती हैं। इसी गड़बड़ी को पकड़ने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ईओडब्ल्यू को निर्देश दिया था।
EOW ने इन जिलों में मारी रेड
ईओडब्ल्यू की 25 टीमों ने सतना, मैहर, सागर, पन्ना, ग्वालियर, बालाघाट, जबलपुर, डिंडोरी, रीवा, नर्मदापुरम, श्योपुर,नरसिंहपुर सहित 12 जिलों की 150 उपार्जन समितियों एवं 140 वेयर हाउस की जांच की है।
