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सरई नगर परिषद में शोषण : सफाई कर्मियों ने CMO पर लगाए रिश्वत व शोषण के गंभीर आरोप
singroli, MP
सरई नगर परिषद के सफाई कर्मियों ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) सुरेंद्र सिंह उइके पर गंभीर आरोप लगाते हुए सिंगरौली कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
आरोप है कि सफाई कर्मचारियों से पूरा दिन काम कराया जाता है, लेकिन उन्हें उचित वेतन नहीं दिया जाता। साथ ही नियमितीकरण के नाम पर उनसे रिश्वत की मांग की गई।
पीड़ितों ने सुनाई आपबीती
कलेक्ट्रेट परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान सफाई कर्मियों ने बताया कि उनसे रोजाना 8 घंटे से अधिक काम लिया जाता है, फिर भी वेतन कभी 6 हजार तो कभी 7 हजार रुपये ही दिया जाता है। इतना ही नहीं, नियमित नौकरी दिलाने के बदले प्रत्येक कर्मचारी से ₹5000 की राशि भी ली गई। आरोप है कि कर्मचारियों को पार्षदों और अधिकारियों के घरों पर निजी कार्य जैसे गाय-बैलों की देखभाल और खेती तक करवाया जाता है।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश, पर कार्रवाई अभी अधूरी
सफाई कर्मचारियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के बाद सिंगरौली कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला ने मामले की जांच के लिए एसडीएम को निर्देशित किया था, लेकिन पीड़ितों के अनुसार अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सफाई कर्मियों का कहना है कि वे अब भी न्याय की आस में दर-दर भटक रहे हैं।
राजनीतिक चुप्पी पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में राजनीतिक दलों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि यदि पीड़ित सामान्य वर्ग से होते तो कांग्रेस, भाजपा समेत अन्य दलों के नेता अब तक सीएमओ कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर चुके होते। लेकिन चूंकि पीड़ित और आरोपी दोनों ही एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग से हैं, इसलिए कोई राजनीतिक दल खुलकर सामने नहीं आ रहा।
क्या बोले कलेक्टर और पीड़ित
कलेक्टर सिंगरौली चंद्रशेखर शुक्ला ने कहा, "ज्ञापन मिला है, मामले की जांच एसडीएम को सौंपी गई है, जल्द उचित कार्रवाई की जाएगी।"
वहीं पीड़ित सफाई कर्मियों का कहना है, "हमसे पूरा समय काम लिया जाता है, लेकिन न वेतन मिलता है न सम्मान। हमने सीएमओ को पैसे भी दिए, फिर भी नौकरी पक्की नहीं हुई। हमें न्याय चाहिए।"
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singroli, MP
आरोप है कि सफाई कर्मचारियों से पूरा दिन काम कराया जाता है, लेकिन उन्हें उचित वेतन नहीं दिया जाता। साथ ही नियमितीकरण के नाम पर उनसे रिश्वत की मांग की गई।
पीड़ितों ने सुनाई आपबीती
कलेक्ट्रेट परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान सफाई कर्मियों ने बताया कि उनसे रोजाना 8 घंटे से अधिक काम लिया जाता है, फिर भी वेतन कभी 6 हजार तो कभी 7 हजार रुपये ही दिया जाता है। इतना ही नहीं, नियमित नौकरी दिलाने के बदले प्रत्येक कर्मचारी से ₹5000 की राशि भी ली गई। आरोप है कि कर्मचारियों को पार्षदों और अधिकारियों के घरों पर निजी कार्य जैसे गाय-बैलों की देखभाल और खेती तक करवाया जाता है।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश, पर कार्रवाई अभी अधूरी
सफाई कर्मचारियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के बाद सिंगरौली कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला ने मामले की जांच के लिए एसडीएम को निर्देशित किया था, लेकिन पीड़ितों के अनुसार अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सफाई कर्मियों का कहना है कि वे अब भी न्याय की आस में दर-दर भटक रहे हैं।
राजनीतिक चुप्पी पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में राजनीतिक दलों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि यदि पीड़ित सामान्य वर्ग से होते तो कांग्रेस, भाजपा समेत अन्य दलों के नेता अब तक सीएमओ कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर चुके होते। लेकिन चूंकि पीड़ित और आरोपी दोनों ही एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग से हैं, इसलिए कोई राजनीतिक दल खुलकर सामने नहीं आ रहा।
क्या बोले कलेक्टर और पीड़ित
कलेक्टर सिंगरौली चंद्रशेखर शुक्ला ने कहा, "ज्ञापन मिला है, मामले की जांच एसडीएम को सौंपी गई है, जल्द उचित कार्रवाई की जाएगी।"
वहीं पीड़ित सफाई कर्मियों का कहना है, "हमसे पूरा समय काम लिया जाता है, लेकिन न वेतन मिलता है न सम्मान। हमने सीएमओ को पैसे भी दिए, फिर भी नौकरी पक्की नहीं हुई। हमें न्याय चाहिए।"
