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मुआवजे की मांग को लेकर किसानों की लेटी परिक्रमा और पदयात्रा: राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति
Satna, MP
पावर ग्रिड कंपनी द्वारा खेतों में बिना मुआवजा दिए टावर लगाए जाने से नाराज़ सतना जिले के किसानों ने मंगलवार को अनोखे और भावनात्मक ढंग से विरोध दर्ज कराया। चिलचिलाती धूप में किसान लेटी परिक्रमा और पदयात्रा करते हुए सतना कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय न मिला तो वे राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगेंगे।
पोस्टर-बैनर लेकर 42 डिग्री में निकले किसान
नागौद थाना क्षेत्र के पोंड़ी तिराहा से शुरू हुई इस यात्रा में महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल रहीं। किसानों ने बताया कि टावर निर्माण से उनकी जमीनों को नुकसान हुआ है, फिर भी न मुआवजा दिया गया, न प्रशासन ने सुनवाई की। जबकि न्यायालय द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए।
न्यायालय के आदेश के बाद भी नहीं मिला मुआवजा
सितपुरा स्थित पावर ग्रिड प्लांट के अंतर्गत गांवों में हाईटेंशन टावर स्थापित किए गए, लेकिन कई किसानों को आज तक उसका मुआवजा नहीं मिल पाया है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने कंपनी का साथ देकर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की। इसी अन्याय के खिलाफ अब किसान सड़कों पर हैं।
किसान बोले: या मुआवजा दो या इच्छामृत्यु की अनुमति
यात्रा के दौरान किसानों ने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन मुआवजा देने में सक्षम नहीं हैं, तो वे राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अनुमति चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
आंदोलन को मिला कृषि वैज्ञानिकों का समर्थन
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्व महानिदेशक डॉ. सदाचारी तोमर भी इस आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने किसानों के संघर्ष को जायज बताया और कहा कि सरकार को मुआवजे का भुगतान कर यह सिद्ध करना चाहिए कि वह वास्तव में किसान हितैषी है।
रामनाथ कोल फिर आंदोलन में शामिल
अतरबेदिया के आदिवासी किसान रामनाथ कोल, जो पूर्व में दो महीने तक टावर पर चढ़कर विरोध कर चुके हैं, इस बार भी आंदोलन में शामिल हुए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें अब तक केवल आश्वासन मिला, लेकिन मुआवजा नहीं। अब वे फिर से पैदल कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए हैं।
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मुआवजे की मांग को लेकर किसानों की लेटी परिक्रमा और पदयात्रा: राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति
Satna, MP
पोस्टर-बैनर लेकर 42 डिग्री में निकले किसान
नागौद थाना क्षेत्र के पोंड़ी तिराहा से शुरू हुई इस यात्रा में महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल रहीं। किसानों ने बताया कि टावर निर्माण से उनकी जमीनों को नुकसान हुआ है, फिर भी न मुआवजा दिया गया, न प्रशासन ने सुनवाई की। जबकि न्यायालय द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए।
न्यायालय के आदेश के बाद भी नहीं मिला मुआवजा
सितपुरा स्थित पावर ग्रिड प्लांट के अंतर्गत गांवों में हाईटेंशन टावर स्थापित किए गए, लेकिन कई किसानों को आज तक उसका मुआवजा नहीं मिल पाया है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने कंपनी का साथ देकर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की। इसी अन्याय के खिलाफ अब किसान सड़कों पर हैं।
किसान बोले: या मुआवजा दो या इच्छामृत्यु की अनुमति
यात्रा के दौरान किसानों ने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन मुआवजा देने में सक्षम नहीं हैं, तो वे राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अनुमति चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
आंदोलन को मिला कृषि वैज्ञानिकों का समर्थन
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्व महानिदेशक डॉ. सदाचारी तोमर भी इस आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने किसानों के संघर्ष को जायज बताया और कहा कि सरकार को मुआवजे का भुगतान कर यह सिद्ध करना चाहिए कि वह वास्तव में किसान हितैषी है।
रामनाथ कोल फिर आंदोलन में शामिल
अतरबेदिया के आदिवासी किसान रामनाथ कोल, जो पूर्व में दो महीने तक टावर पर चढ़कर विरोध कर चुके हैं, इस बार भी आंदोलन में शामिल हुए हैं। उनका आरोप है कि उन्हें अब तक केवल आश्वासन मिला, लेकिन मुआवजा नहीं। अब वे फिर से पैदल कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए हैं।
