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चार दिन के नवजात के पेट में भ्रूण, डॉक्टर ने कहा- जीवन का पहला केस
sagar, MP
* चार दिन की बच्ची के पेट में जिंदा भ्रूण * सागर जिले में फीट्स इन फीटू का पहला मामला * डॉक्टर ने कहा कि यह जीवन का पहला मामला * डॉक्टर भी रह गए हैरान, बच्चे को बचाने में जुटे
मध्य प्रदेश में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां, एक महिला के पेट में पल रहे बच्चे के अंदर भी एक बच्चा पल रहा था। अल्ट्रासाउंट कराने पर डॉक्टरों को इसकी जानकारी लगी थी। अब महिला ने बच्चे को जन्म दिया दे दिया। इस कंडीशन को मेडिकल भाषा में फीटस इन फीटू कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार लाखों महिलाओं में किसी एक साथ ऐसा होता है। जन्म के बाद से नवजात जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती हैं, उसे बचाने के लिए डॉक्टर सर्जरी करने को लेकर विचार-विमर्श कर
रहे हैं।
सागर जिले के केसली ब्लॉक निवासी एक प्रसूता की चार दिन पहले डिलीवरी कराई गई थी। उसकी नवजात को जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया है। मामले में सीटी स्कैन जांच में सामने आया है कि नवजात के गर्भ में भी एक गर्भ मौजूद है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भ्रूण भी जीवित अवस्था में है। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने नवजात का परीक्षण किया है। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग के डॉक्टर बताते हैं कि उनके जीवन में यह पहला मामला सामने आया है।
5 लाख मामलों में एक
डॉक्टर्स का कहना है कि यह पूरा मामला अपने आप में बहुत अनोखा है. क्योंकि इस तरह के केस 5 लाख महिलाओं में किसी एक में देखने को मिलते हैं. डॉक्टर्स ने बताया कि मेडिकल की भाषा में इस कंडीशन को फीटस इन फीटू कहा जाता है. महिला को डिलीवरी के बाद जिला हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है. डॉक्टर्स के मुताबिक नवजात बच्चे को बचाने के लिए एकमात्र उपाय सर्जरी करना ही है. ऐसे में एक्सपर्ट डॉक्टर्स इसी पर विचार विमर्श कर रहे हैं.
सर्जरी ही एकमात्र विकल्प, विकसित नहीं हो सकता भ्रूण
बीएमसी के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. वृषभान अहिरवार के अनुसार फीट्स इन फीटू के ऐसे दुर्लभ मामलों में भ्रूण के अंदर भ्रूण जीवित नहीं रह पाते हैं। ऐसा एक भी केस हिस्ट्री में सामने नहीं आया है। दरअसल, शिशु का शरीर बहुत छोटा होता है और पेट के अंदर भ्रूण को पर्याप्त ब्लड व अन्य पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं, जिस कारण भ्रूण जीवित नहीं पाता है।
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चार दिन के नवजात के पेट में भ्रूण, डॉक्टर ने कहा- जीवन का पहला केस
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मध्य प्रदेश में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां, एक महिला के पेट में पल रहे बच्चे के अंदर भी एक बच्चा पल रहा था। अल्ट्रासाउंट कराने पर डॉक्टरों को इसकी जानकारी लगी थी। अब महिला ने बच्चे को जन्म दिया दे दिया। इस कंडीशन को मेडिकल भाषा में फीटस इन फीटू कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार लाखों महिलाओं में किसी एक साथ ऐसा होता है। जन्म के बाद से नवजात जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती हैं, उसे बचाने के लिए डॉक्टर सर्जरी करने को लेकर विचार-विमर्श कर
रहे हैं।
सागर जिले के केसली ब्लॉक निवासी एक प्रसूता की चार दिन पहले डिलीवरी कराई गई थी। उसकी नवजात को जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया है। मामले में सीटी स्कैन जांच में सामने आया है कि नवजात के गर्भ में भी एक गर्भ मौजूद है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भ्रूण भी जीवित अवस्था में है। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने नवजात का परीक्षण किया है। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग के डॉक्टर बताते हैं कि उनके जीवन में यह पहला मामला सामने आया है।
5 लाख मामलों में एक
डॉक्टर्स का कहना है कि यह पूरा मामला अपने आप में बहुत अनोखा है. क्योंकि इस तरह के केस 5 लाख महिलाओं में किसी एक में देखने को मिलते हैं. डॉक्टर्स ने बताया कि मेडिकल की भाषा में इस कंडीशन को फीटस इन फीटू कहा जाता है. महिला को डिलीवरी के बाद जिला हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है. डॉक्टर्स के मुताबिक नवजात बच्चे को बचाने के लिए एकमात्र उपाय सर्जरी करना ही है. ऐसे में एक्सपर्ट डॉक्टर्स इसी पर विचार विमर्श कर रहे हैं.
सर्जरी ही एकमात्र विकल्प, विकसित नहीं हो सकता भ्रूण
बीएमसी के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. वृषभान अहिरवार के अनुसार फीट्स इन फीटू के ऐसे दुर्लभ मामलों में भ्रूण के अंदर भ्रूण जीवित नहीं रह पाते हैं। ऐसा एक भी केस हिस्ट्री में सामने नहीं आया है। दरअसल, शिशु का शरीर बहुत छोटा होता है और पेट के अंदर भ्रूण को पर्याप्त ब्लड व अन्य पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं, जिस कारण भ्रूण जीवित नहीं पाता है।
