मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में खेत की मेड़ पर तार फेंसिंग को लेकर उपजा विवाद रविवार को गंभीर हिंसा में तब्दील हो गया। देवगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम अर्जुनपुरा में दो पक्षों के बीच पहले पथराव हुआ और बाद में एक पक्ष के लोगों ने लाठी-डंडों से लैस होकर दूसरे पक्ष के घर पर हमला कर दिया। इस घटना में दंपति गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि घर के बाहर खड़े वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला और तूल पकड़ता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, अर्जुनपुरा निवासी अशोक सिकरवार अपने खेत में आवारा पशुओं से फसल बचाने के लिए तार फेंसिंग कर रहे थे। इसी बात को लेकर गांव के ही प्रताप गुर्जर, बबलू गुर्जर और धीरज गुर्जर ने आपत्ति जताई। रविवार सुबह विवाद बढ़ा और दोनों पक्षों में पथराव हुआ। उस समय ग्रामीणों की समझाइश से स्थिति शांत हो गई, लेकिन शाम होते-होते हालात फिर बिगड़ गए।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शाम को धीरज गुर्जर ने अपने 25 से 30 साथियों को बुलाया और अशोक सिकरवार के घर पर हमला कर दिया। भीड़ ने घर में घुसकर अशोक सिकरवार और उनकी पत्नी गुड्डी सिकरवार को लाठियों से पीटा। हमले के दौरान परिवार के अन्य सदस्य जान बचाने के लिए घर के कमरों में बंद हो गए। हमलावरों ने घर के बाहर खड़े ट्रैक्टर और बाइक को भी नुकसान पहुंचाया। पूरी घटना का वीडियो परिवार ने घर के भीतर से रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया और पुलिस के पास उपलब्ध है।
घायल अशोक सिकरवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों पर उन्होंने मारपीट का आरोप लगाया है, उनमें से एक प्रताप गुर्जर प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना का मीडिया प्रभारी है। अशोक का आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव के कारण पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही। उन्होंने यह भी कहा कि विवाद पिछले सात दिनों से चल रहा था और इस दौरान जब वे थाने पहुंचे तो उनका आवेदन लेने से मना कर दिया गया और केवल समझौते की बात कही गई, लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए।
वहीं, देवगढ़ थाना प्रभारी जयपाल सिंह गुर्जर ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि खेत की फेंसिंग को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ और पथराव दोनों ओर से हुआ है। टीआई के अनुसार, दोनों पक्षों के लोग घायल हुए हैं और वीडियो में भी पथराव की स्थिति दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि एफआईआर में जिन नामों को दर्ज कराने की मांग की जा रही है, वे तथ्यों से मेल नहीं खाते, इसलिए फिलहाल मामला दर्ज नहीं किया गया है। दोनों पक्षों को जांच के लिए दोबारा बुलाया गया है।
घटना ने ग्रामीण इलाकों में भूमि विवाद, कानून-व्यवस्था और पुलिस की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते प्रशासन की सक्रियता होती तो हालात इतने नहीं बिगड़ते। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर किए जाने की बात कही जा रही है।

