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शहीद नायब सूबेदार अनिल कुमार पटेल को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई, ग्रामीण बोले—शहीद के घर तक नहीं है पक्की सड़क
Mauganj, MP
ग्वालियर से गांव पहुंचा पार्थिव शरीर, युवाओं ने निकाली बाइक रैली; प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति पर ग्रामीणों ने जताई नाराज़गी
देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए नायब सूबेदार अनिल कुमार पटेल को बुधवार शाम मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले के इटहा कला गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। शहीद का पार्थिव शरीर सेना के वाहन से ग्वालियर से रघुनाथगंज बाईपास लाया गया, जहां सैकड़ों युवाओं ने बाइक रैली निकालकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान “भारत माता की जय” और “शहीद अनिल कुमार अमर रहें” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
गांव पहुंचने पर सेना के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया और अंतिम सलामी अर्पित की। हजारों की संख्या में ग्रामीण, परिजन, पूर्व सैनिक और क्षेत्रवासी नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई देने पहुंचे। ग्रामीणों ने उनके परिवार के साथ संवेदना जताते हुए गर्व और दुख दोनों की भावना व्यक्त की।
ग्रामीणों ने जताई नाराज़गी, बोले—“शहीद के घर तक सड़क नहीं”
भावनाओं से भरे माहौल के बीच ग्रामीणों ने नाराज़गी भी जाहिर की। उनका कहना था कि शहीद के घर तक पक्की सड़क न होने के कारण सेना का वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका, जिससे पार्थिव शरीर को बीच रास्ते रोकना पड़ा। स्थानीय लोगों और पूर्व सैनिकों ने प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि “जिस जवान ने देश के लिए जान दी, उसके गांव तक पहुंचने के लिए सड़क भी नहीं है।”
पूर्व सैनिक संघ और ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से गांव में पक्की सड़क के निर्माण, शहीद के नाम पर प्रवेश द्वार बनाने, और सड़क का नाम ‘शहीद अनिल कुमार पटेल मार्ग’ रखने की मांग की है।
प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर असंतोष
अंतिम संस्कार के समय किसी भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि की मौजूदगी न होने पर ग्रामीणों में भारी असंतोष देखा गया। स्थानीय लोगों ने कहा कि “शहीद की शहादत का सम्मान सिर्फ शब्दों से नहीं, कार्यों से होना चाहिए।”
गांव के युवाओं ने कहा कि शहीद अनिल पटेल ने अपने कर्तव्य के लिए प्राण न्योछावर किए, और अब सरकार को उनके नाम को स्थायी रूप से सम्मान देने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
शहीद के प्रति श्रद्धांजलि
सेना के जवानों ने पारंपरिक सम्मान के साथ 21 तोपों की सलामी दी। परिजनों की आंखों में आंसू थे, लेकिन गर्व की भावना स्पष्ट झलक रही थी। शहीद की पत्नी और बच्चों ने पूरे साहस के साथ अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया।
शहीद अनिल कुमार पटेल की अंतिम यात्रा में युवाओं, ग्रामीणों और पूर्व सैनिकों ने एक स्वर में कहा—“देश ऐसे वीरों पर गर्व करता है।”
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देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए नायब सूबेदार अनिल कुमार पटेल को बुधवार शाम मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले के इटहा कला गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। शहीद का पार्थिव शरीर सेना के वाहन से ग्वालियर से रघुनाथगंज बाईपास लाया गया, जहां सैकड़ों युवाओं ने बाइक रैली निकालकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान “भारत माता की जय” और “शहीद अनिल कुमार अमर रहें” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
गांव पहुंचने पर सेना के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया और अंतिम सलामी अर्पित की। हजारों की संख्या में ग्रामीण, परिजन, पूर्व सैनिक और क्षेत्रवासी नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई देने पहुंचे। ग्रामीणों ने उनके परिवार के साथ संवेदना जताते हुए गर्व और दुख दोनों की भावना व्यक्त की।
ग्रामीणों ने जताई नाराज़गी, बोले—“शहीद के घर तक सड़क नहीं”
भावनाओं से भरे माहौल के बीच ग्रामीणों ने नाराज़गी भी जाहिर की। उनका कहना था कि शहीद के घर तक पक्की सड़क न होने के कारण सेना का वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका, जिससे पार्थिव शरीर को बीच रास्ते रोकना पड़ा। स्थानीय लोगों और पूर्व सैनिकों ने प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि “जिस जवान ने देश के लिए जान दी, उसके गांव तक पहुंचने के लिए सड़क भी नहीं है।”
पूर्व सैनिक संघ और ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से गांव में पक्की सड़क के निर्माण, शहीद के नाम पर प्रवेश द्वार बनाने, और सड़क का नाम ‘शहीद अनिल कुमार पटेल मार्ग’ रखने की मांग की है।
प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर असंतोष
अंतिम संस्कार के समय किसी भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि की मौजूदगी न होने पर ग्रामीणों में भारी असंतोष देखा गया। स्थानीय लोगों ने कहा कि “शहीद की शहादत का सम्मान सिर्फ शब्दों से नहीं, कार्यों से होना चाहिए।”
गांव के युवाओं ने कहा कि शहीद अनिल पटेल ने अपने कर्तव्य के लिए प्राण न्योछावर किए, और अब सरकार को उनके नाम को स्थायी रूप से सम्मान देने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
शहीद के प्रति श्रद्धांजलि
सेना के जवानों ने पारंपरिक सम्मान के साथ 21 तोपों की सलामी दी। परिजनों की आंखों में आंसू थे, लेकिन गर्व की भावना स्पष्ट झलक रही थी। शहीद की पत्नी और बच्चों ने पूरे साहस के साथ अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया।
शहीद अनिल कुमार पटेल की अंतिम यात्रा में युवाओं, ग्रामीणों और पूर्व सैनिकों ने एक स्वर में कहा—“देश ऐसे वीरों पर गर्व करता है।”
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