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भोपाल के 85 वार्डों में पहली बार ‘जल सुनवाई’: दूषित पानी से परेशान नागरिक नगर निगम पहुंचे
भोपाल, (म.प्र.)
निशातपुरा सहित कई इलाकों में जहरीले पानी का आरोप, हर मंगलवार होगी वार्ड स्तर पर सुनवाई
राजधानी भोपाल में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच मंगलवार को नगर निगम ने एक नई पहल करते हुए सभी 85 वार्डों में एक साथ ‘जल सुनवाई’ का आयोजन किया। यह सुनवाई सुबह 11 बजे शुरू होकर दोपहर 1 बजे तक चली, जिसमें नागरिकों ने सीधे अधिकारियों के सामने पानी से जुड़ी समस्याएं रखीं। कई इलाकों से आए लोगों ने दूषित और बदबूदार पानी की शिकायत करते हुए स्वास्थ्य पर खतरे की बात कही।
निशातपुरा में विरोध, नगर निगम कार्यालय तक पहुंचे लोग
जल सुनवाई के दौरान ब्रिज विहार, निशातपुरा क्षेत्र के रहवासी नगर निगम के आईएसबीटी स्थित कार्यालय पहुंचे और जोरदार नारेबाजी की। रहवासियों का आरोप है कि इलाके में सप्लाई किया जा रहा पानी कार्बाइड और अन्य रसायनों से दूषित है, जिसे पीने के लिए वे मजबूर हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद जल आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है।
कुछ वार्डों में कम उपस्थिति
जहां कुछ इलाकों में बड़ी संख्या में लोग जल सुनवाई में पहुंचे, वहीं वार्ड क्रमांक 22 जैसे कुछ वार्डों में निगम अधिकारी तय समय तक लोगों का इंतजार करते रहे। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में लोगों की भागीदारी बढ़ेगी, क्योंकि यह व्यवस्था स्थायी रूप से लागू की जा रही है।
क्यों जरूरी पड़ी जल सुनवाई
हाल के महीनों में प्रदेश के कई हिस्सों से दूषित पानी की शिकायतें सामने आई हैं। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से करीब 23 लोगों की मौत के बाद सरकार और प्रशासन सतर्क हुआ है। भोपाल के आदमपुर छावनी, वाजपेयी नगर, खानूगांव और हरिपुरा जैसे इलाकों में भी भूजल में प्रदूषण की पुष्टि होने पर उसके उपयोग पर रोक लगाई जा चुकी है।
इन्हीं हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने जनसुनवाई की तर्ज पर हर मंगलवार ‘जल सुनवाई’ आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि पानी की गुणवत्ता से जुड़े मामलों का समय पर समाधान हो सके।
कैसे होगी जल सुनवाई
नगर निगम के अनुसार, जल सुनवाई के दौरान नागरिक अपने क्षेत्र के पानी के नमूने वार्ड कार्यालय में जमा कर सकेंगे। इन नमूनों की जांच रंग, स्वाद, गंध, पीएच, टीडीएस, कठोरता, क्लोराइड, टरबीडिटी, रेसिडुअल क्लोरीन, कोलीफार्म और ई-कोलाई जैसे मानकों पर की जाएगी। विशेषज्ञों की मौजूदगी में रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
अधिकारियों का दावा
नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने निर्देश दिए हैं कि हर वार्ड कार्यालय में नियमित रूप से जल सुनवाई आयोजित की जाए और शिकायतों का लिखित रिकॉर्ड रखा जाए। निगम अधिकारियों का कहना है कि जहां भी पानी की गुणवत्ता मानकों से कम पाई जाएगी, वहां वैकल्पिक जल आपूर्ति और सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाएंगे।
आगे की स्थिति
प्रशासन का मानना है कि जल सुनवाई से लोगों की शिकायतें सीधे सामने आएंगी और समय रहते समाधान संभव होगा। हालांकि, नागरिकों का कहना है कि केवल सुनवाई नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी समाधान जरूरी है, ताकि सुरक्षित पेयजल सभी तक पहुंच सके।
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भोपाल, (म.प्र.)
राजधानी भोपाल में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच मंगलवार को नगर निगम ने एक नई पहल करते हुए सभी 85 वार्डों में एक साथ ‘जल सुनवाई’ का आयोजन किया। यह सुनवाई सुबह 11 बजे शुरू होकर दोपहर 1 बजे तक चली, जिसमें नागरिकों ने सीधे अधिकारियों के सामने पानी से जुड़ी समस्याएं रखीं। कई इलाकों से आए लोगों ने दूषित और बदबूदार पानी की शिकायत करते हुए स्वास्थ्य पर खतरे की बात कही।
निशातपुरा में विरोध, नगर निगम कार्यालय तक पहुंचे लोग
जल सुनवाई के दौरान ब्रिज विहार, निशातपुरा क्षेत्र के रहवासी नगर निगम के आईएसबीटी स्थित कार्यालय पहुंचे और जोरदार नारेबाजी की। रहवासियों का आरोप है कि इलाके में सप्लाई किया जा रहा पानी कार्बाइड और अन्य रसायनों से दूषित है, जिसे पीने के लिए वे मजबूर हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद जल आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है।
कुछ वार्डों में कम उपस्थिति
जहां कुछ इलाकों में बड़ी संख्या में लोग जल सुनवाई में पहुंचे, वहीं वार्ड क्रमांक 22 जैसे कुछ वार्डों में निगम अधिकारी तय समय तक लोगों का इंतजार करते रहे। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में लोगों की भागीदारी बढ़ेगी, क्योंकि यह व्यवस्था स्थायी रूप से लागू की जा रही है।
क्यों जरूरी पड़ी जल सुनवाई
हाल के महीनों में प्रदेश के कई हिस्सों से दूषित पानी की शिकायतें सामने आई हैं। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से करीब 23 लोगों की मौत के बाद सरकार और प्रशासन सतर्क हुआ है। भोपाल के आदमपुर छावनी, वाजपेयी नगर, खानूगांव और हरिपुरा जैसे इलाकों में भी भूजल में प्रदूषण की पुष्टि होने पर उसके उपयोग पर रोक लगाई जा चुकी है।
इन्हीं हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने जनसुनवाई की तर्ज पर हर मंगलवार ‘जल सुनवाई’ आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि पानी की गुणवत्ता से जुड़े मामलों का समय पर समाधान हो सके।
कैसे होगी जल सुनवाई
नगर निगम के अनुसार, जल सुनवाई के दौरान नागरिक अपने क्षेत्र के पानी के नमूने वार्ड कार्यालय में जमा कर सकेंगे। इन नमूनों की जांच रंग, स्वाद, गंध, पीएच, टीडीएस, कठोरता, क्लोराइड, टरबीडिटी, रेसिडुअल क्लोरीन, कोलीफार्म और ई-कोलाई जैसे मानकों पर की जाएगी। विशेषज्ञों की मौजूदगी में रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
अधिकारियों का दावा
नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने निर्देश दिए हैं कि हर वार्ड कार्यालय में नियमित रूप से जल सुनवाई आयोजित की जाए और शिकायतों का लिखित रिकॉर्ड रखा जाए। निगम अधिकारियों का कहना है कि जहां भी पानी की गुणवत्ता मानकों से कम पाई जाएगी, वहां वैकल्पिक जल आपूर्ति और सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाएंगे।
आगे की स्थिति
प्रशासन का मानना है कि जल सुनवाई से लोगों की शिकायतें सीधे सामने आएंगी और समय रहते समाधान संभव होगा। हालांकि, नागरिकों का कहना है कि केवल सुनवाई नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी समाधान जरूरी है, ताकि सुरक्षित पेयजल सभी तक पहुंच सके।
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