पांढुर्ना जिला की हिराबेन रायचंदभाई शाह चेरिटेबल ट्रस्ट, पांढुरना की पहल पर श्मशान घाट की सूरत और सीरत बदलने का काम किया है. आम तौर पर श्मशान घाट कभी केवल पुरूष ही जाते थे, परन्तु पांढुरना के मोक्षधाम में महिलाये पुजा अर्चना करने प्रतिदिन जाति है ।पांढुर्ना का श्मशान घाट दर्शनीय स्थल का रूप ले रहा है. यहां पर भगवान की भव्य विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है, एक बड़ा सा पार्क बनाया गया है. साथ ही शवयात्रा के साथ यहां आने वाले लोगों के लिए बड़े बड़े हॉल बनाए गए हैं. जिसमें कूलर लगे हुए हैं और वातानुकूलित हॉल बनाया गया है. यहां लॉकर की सुविधा है. श्मशान घाट में कॉटेज का निर्माण कर भव्यता प्रदान की है. यहां आने वाले लोग इसकी सराहना करते नहीं थक रहे हैं.
आम तौर पर लोगों के मन में श्मशान घाट की छवि के तौर पर गंदगी भरा उजाड़ स्थान होता है जहां ना तो बैठने की जगह होती है और ना पीने का पानी या अन्य सुविधाएं भी नहीं होती. लोग श्मशान घाट में जाते हैं और अंतिम संस्कार संपन्न कर तुरंत वापस लौटना चाहते हैं लेकिन, पांढुर्ना का श्मशान घाट अपवाद है.
यहां पर आने वाले लोग आने के बाद बैठते है तो सब कुछ भूल जाते है. आगंतुक पार्क में जाकर सुकून का अनुभव करते हैं. वैसे तो किसी की शव यात्रा में जाने पर गमगीन माहौल ही होता है लेकिन, यहां के श्मशान घाट का माहौल उन्हें कुछ देर के लिए मन को शांत रखने में मददगार होता है.
वातानुकूलित हॉल और कुर्सियों का है इंतजाम
यहां पर बैठने के लिए बड़े-बड़े हॉल हैं जहां पर कुर्सियां लगी हुई हैं. गर्मियों के लिए कूलर और पंखे लगे हुए हैं. यहां पर वातानुकूलित हॉल है, यहां पर लॉकर की सुविधा भी है. जहां पर लोग अपने परिजनों की अस्थियों को सुरक्षित रख सकते हैं और अपनी सुविधा के अनुसार विसर्जन के लिए ले जा सकते हैं.
कूलर और ठंडे पानी की भी है व्यवस्था
इस श्मशान घाट में भव्य हरा भरा पार्क है जिसमें तरह-तरह के पेड़ और फूलों के पौधे लगे हुए हैं. स्थानीय का कहना है कि श्मशान घाट की व्यवस्था ऐसी की गई है जहां दुख भरे माहौल में भी चंद पल में सुख का एहसास हो सके.

